एमयूडीए मामला: लोकायुक्त अधिकारियों ने ‘गोपनीय’ जानकारी मीडिया से साझा करने पर नाराजगी जताई
देवेंद्र धीरज
- 04 Dec 2024, 10:58 PM
- Updated: 10:58 PM
बेंगलुरु, चार दिसंबर (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा मैसुरु शहर विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूखंड आवंटन मामले में अनियमितताओं के बारे में जानकारी मीडिया के साथ साझा करने को लोकायुक्त संस्था ने ‘‘गैर-पेशेवर और अनैतिक’’ बताया।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उनकी पत्नी पार्वती बी एम, उनके रिश्तेदार मल्लिकार्जुन स्वामी और अन्य के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने एक विशेष अदालत के निर्देश पर मामला दर्ज किया है।
एक वरिष्ठ लोकायुक्त अधिकारी ने कहा कि जब मामला जांच के दायरे में हो तो ऐसे ‘‘अत्यंत गोपनीय मामलों’’ को कभी भी मीडिया के साथ साझा नहीं किया जाना चाहिए।
ईडी भी सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा की शिकायत के आधार पर लोकायुक्त पुलिस के साथ मिलकर एमयूडीए भूखंड आवंटन मामले की जांच कर रहा है।
पार्वती पर केसारे गांव में तीन एकड़ और 16 गुंटा भूमि के ‘अधिग्रहण’ के बदले में मैसुरु शहर के पॉश इलाके में 14 एमयूडीए भूखंडों को अवैध रूप से हासिल करने का आरोप है।
एक शीर्ष लोकायुक्त अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हमें उनके (ईडी) द्वारा धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 66 के तहत साझा की गई जानकारी प्राप्त हुई है। यह सूचना का आदान-प्रदान है और एक जांच एजेंसी और दूसरी जांच एजेंसी के बीच सूचना का आदान-प्रदान, विशेषकर जब मामला जांच के अधीन हो, अत्यंत गोपनीय मामला होता है।’’
ईडी को एमयूडीए द्वारा मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती को 14 भूखंडों को आवंटित करने के मामले में कई अनियमितताओं के सबूत मिले हैं। केंद्रीय एजेंसी ने मंगलवार को यह जानकारी दी थी।
संघीय एजेंसी ने हाल में कर्नाटक लोकायुक्त विभाग को भेजे गए एक पत्र में यह भी दावा किया था कि उसकी जांच में यह भी पता चला है कि एमयूडीए ने बेनामी और अन्य ऐसे लेनदेन में कुल 1,095 भूखंडों को “अवैध रूप से” आवंटित किया है।
अधिकारी ने आशंका व्यक्त की कि ईडी ने लोकायुक्त के साथ ऐसा करने से पहले सूचना मीडिया के साथ साझा की गई।
उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है मैंने वो जानकारी मीडिया से ही ली हो। जब आप किसी मामले के बारे में जानकारी किसी अन्य जांच एजेंसी के साथ साझा करते हैं, तो यह बिल्कुल नहीं होना चाहिए कि आप वही जानकारी मीडिया के साथ भी साझा करें। यह पूरी तरह से गैर-पेशेवर और अनैतिक है।’’
उन्होंने कहा कि ईडी धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत मामले की जांच करता है, लेकिन सीआरपीसी के तहत मामले की जांच नहीं करता है तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम में निर्धारित साक्ष्य मानकों को लागू करता है।
उन्होंने हालांकि कहा कि यदि जानकारी उपयोगी पाई गई तो इसका उपयोग किया जायेगा।
भाषा
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