मध्यप्रदेश: बांग्लादेशी हिंदुओं पर हमले के खिलाफ कई शहरों में विरोध प्रदर्शन
दिमो हर्ष जितेंद्र
- 04 Dec 2024, 09:32 PM
- Updated: 09:32 PM
भोपाल/इंदौर, चार दिसंबर (भाषा) बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ मध्यप्रदेश में लगातार दूसरे दिन बुधवार को विरोध प्रदर्शन जारी रहा। विभिन्न शहरों में ‘एक हैं तो सेफ हैं’ के नारे के बीच पैदल मार्च निकाले गए।
कुछ स्थानों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और मंत्रियों ने भी प्रदर्शनों में हिस्सा लिया जबकि भोपाल, इंदौर और अन्य शहरों व कस्बों में एकजुटता के लिए आधे दिन के लिए व्यावसायिक प्रतिष्ठान और बाजार बंद रहे।
बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर पांच अगस्त के बाद से 200 से अधिक हमले हुए हैं।
भाजपा नेताओं और मंत्रियों ने आम लोगों के साथ मिलकर भोपाल के भदभदा चौराहे से रोशनपुरा तक विरोध मार्च निकाला।
इस मार्च में भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री कृष्णा गौर और विश्वास सारंग, विधायक रामेश्वर शर्मा व भगवानदास सबनानी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों की आलोचना करने वाली तख्तियां पकड़ी हुई थीं और उन्होंने ‘जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई’ और ‘एक हैं तो सेफ हैं’ जैसे नारे लगाए।
भोपाल हुजूर सीट से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि ‘सकल हिंदू समाज’ हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों, मंदिरों, गुरुद्वारों और बुद्ध तीर्थस्थलों को तोड़ने और आगजनी से दुखी है।
शर्मा ने कहा, “बांग्लादेश में हिंदू सरकारी कर्मचारियों को तलवार की नोंक पर इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हम मानवता के रक्षकों से कहना चाहते हैं कि वे बांग्लादेश की सेना और सरकार को समझाएं। मानवता का खून न बहाएं।”
इन्दौर में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी आशीष सिंह को सौंपा।
‘‘सकल हिंदू समाज’’ के नाम से सौंपे गए ज्ञापन में प्रमुख तौर पर यह मांग की गई कि भारत सरकार बांग्लादेश पर ‘दबाव’ डाले ताकि पड़ोसी देश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके तथा उनकी धार्मिक स्वतंत्रता को कायम रखा जा सके।
प्रदर्शन में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, शहर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, भाजपा विधायक उषा ठाकुर और भाजपा के अन्य नेता भी शामिल हुए।
ठाकुर ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर अत्याचारों को लेकर गुस्सा जताते हुए कहा,‘‘अगर वे (बांग्लादेशी नागरिक) अपने देश के संविधान का पालन नहीं करते और मनुष्यों की तरह जीवन जीना नहीं चाहते, तो ऐसे लोगों के साथ न तो व्यापार किया जाना चाहिए, न ही हमें उनके साथ खेल प्रतियोगिताओं में शामिल होना चाहिए।’’
दमोह, उज्जैन, आगर मालवा, जबलपुर, मैहर, सीधी, शाजापुर और कई अन्य जिला मुख्यालयों में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन आयोजित किए गए और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन स्थानीय प्रशासन को सौंपे गए।
मध्यप्रदेश के विभिन्न शहरों और कस्बों में मंगलवार को भी विरोध प्रदर्शन हुए थे।
अगस्त में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारत-बांग्लादेश के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं।
भाषा दिमो हर्ष