शीर्ष अदालत ने भाजपा नेता के विरूद्ध दर्ज मामला सीबीआई को सौंपा
राजकुमार प्रशांत
- 04 Dec 2024, 08:50 PM
- Updated: 08:50 PM
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, चार दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता कबीर शंकर बोस के खिलाफ दर्ज दो प्राथमिकियों को बुधवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को स्थानांतरित कर दिया। ये प्राथमिकियां 2020 में उनके सुरक्षाकर्मियों और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प से संबंधित हैं।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना एवं न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक परिदृश्य केंद्र में सत्तारूढ़ दल के विरूद्ध जान पड़ता है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में पक्षकार तृणमूल सांसद कल्याण बनर्जी की बेटी से बोस की शादी हुई थी लेकिन पति-पत्नी के बीच तलाक हो गया और फिर दोनों पक्षों के बीच दुश्मनी हो गयी।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वर्तमान स्थिति में, याचिकाकर्ता के खिलाफ स्थानीय पुलिस द्वारा निष्पक्ष जांच न किए जाने या स्थानीय पुलिस द्वारा उसके साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार न किए जाने की आशंका शायद निराधार नहीं है और इसे पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता।
उच्चतम न्यायालय ने कहा, ‘‘इसलिये, मामले के तथ्यों को देखते हुए, विशेष रूप से, जब प्रतिवादी संख्या सात (बनर्जी) पश्चिम बंगाल राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी के एक सांसद हैं और याचिकाकर्ता केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी से संबंधित है, पश्चिम बंगाल राज्य में राजनीतिक रूप से गर्म माहौल इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बहुत अनुकूल नहीं हो सकता है।’’
पीठ ने कहा कि ऐसे में वह इसे अनिश्चितकाल के लिए लंबित रखने के बजाय सीबीआई को जांच के लिए सौंपना उपयुक्त मानती है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मामला सीआईएसएफ या उसके कर्मियों की भूमिका की जांच से जुड़ा है, जिसे हितों के टकराव के कारण स्थानीय पुलिस के हाथों में नहीं छोड़ा जा सकता, इसलिए इस मामले में स्थानीय पुलिस को सीआईएसएफ कर्मियों के आचरण की जांच करने की अनुमति देना उचित नहीं है।
पीठ ने बोस की एक याचिका पर यह फैसला दिया। बोस ने शीर्ष अदालत से इस मामले की जांच पश्चिम बंगाल पुलिस से लेकर सीबीआई या विशेष जांच दल (एसआईटी) या किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।
पीठ ने कहा, ‘‘इस मामले के विशिष्ट तथ्यों को देखते हुए राज्य-प्रतिवादियों को आदेश दिया जाता है कि वे जांच पूरी करने के लिए दोनों प्राथिमिकियों के जांच संबंधी दस्तावेज तथा सभी रिकॉर्ड सीबीआई को सौंप दें, ताकि यदि आवश्यक हो तो मुकदमा शुरू किया जा सके और संबंधित पक्षों को न्याय मिल सके।’’
बोस ने कथित हाथापाई के संबंध में पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में जांच और आगे की कार्यवाही पर रोक लगाने की भी अपील की थी।
अपनी याचिका में पेशे से वकील बोस ने दावा किया था कि छह दिसंबर, 2020 को पश्चिम बंगाल के सेरामपुर में रात करीब आठ बजे उनके आवास के बाहर उन पर और उनके सीआईएसएफ गार्ड पर हमला हुआ तथा नारेबाजी की गई थी।
उनकी याचिका में कहा गया है, ‘‘ प्रोटोकॉल के तहत सीआईएसएफ (कर्मियों) ने याचिकाकर्ता को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद जो हुआ वह सीआईएसएफ की ओर से अपने सुरक्षाकर्मी की जान बचाने के लिए प्रोटोकॉल था और याचिकाकर्ता मौके पर मौजूद भी नहीं था।’’
याचिका में आरोप लगाया गया, ‘‘रात दो बजे तक पूरी इमारत को तृणमूल के 200 से अधिक गुंडों ने घेर रखा था, जिनका नेतृत्व इलाके के तत्कालीन सांसद कल्याण बनर्जी कर रहे थे और उन्हें राज्य पुलिस का भी पूरा समर्थन हासिल था।’’
भाषा राजकुमार