प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने भारत में मेटा के तृतीय पक्ष तथ्य जांच कार्यक्रम से हाथ मिलाया
वैभव माधव
- 01 Apr 2024, 07:03 PM
- Updated: 07:03 PM
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप पर गलत जानकारी का पता लगाने, उसकी समीक्षा करने और मूल्यांकन करने के लिए मेटा की ‘थर्ड पार्टी फैक्ट चेकिंग पार्टनरशिप’ (3पीएफसी) के साथ हाथ मिलाया है।
मेटा लोकसभा चुनाव प्रचार के गति पकड़ने के बीच अपने तृतीय पक्ष तथ्यान्वेषी नेटवर्क का विस्तार कर रहा है और इस सिलसिले में उसने भारत की शीर्ष समाचार एजेंसी के साथ जुड़ने की घोषणा की।
पीटीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) और प्रधान संपादक विजय जोशी ने कहा, ‘‘मेटा के 3पीएफसी कार्यक्रम में शामिल होकर पीटीआई की फैक्ट चेक क्षमता और प्रभाव महत्वपूर्ण तरीके से बढ़ेगा। यह साझेदारी भारत में डिजिटल परिदृश्य में गलत सूचनाओं के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगी और उपयोगकर्ताओं को ऑनलाइन दुनिया में अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाएगी।’’
पीटीआई की स्थापना 1947 में हुई थी। यह एशिया की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी समाचार एजेंसियों में से एक है। इसका भारत और दुनिया भर में संवाददाताओं का विशाल नेटवर्क है और यह टेक्स्ट, वीडियो, तस्वीरों तथा इंफोग्राफिक्स के रूप में समाचार मुहैया कराती है।
गलत सूचनाओं के प्रसार से लड़ने और लोगों को अधिक प्रामाणिक जानकारी प्रदान करने के लिए, मेटा स्वतंत्र तृतीय-पक्ष तथ्य-जांचकर्ताओं के साथ साझेदारी करती है जो गैर-पक्षपातपूर्ण ‘इंटरनेशनल फैक्ट-चेकिंग नेटवर्क’ (आईएफसीएन) के माध्यम से प्रमाणित हों और मेटा के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर गलत सूचनाओं की पहचान, समीक्षा और मूल्यांकन करते हों।
मेटा ने दुनियाभर में किसी भी प्लेटफॉर्म का सबसे बड़ा स्वतंत्र ‘फैक्ट चेक’ करने वाला नेटवर्क बनाया है जिसमें दुनिया में करीब 100 से अधिक साझेदार 60 से अधिक भाषाओं में गलत सूचनाओं की समीक्षा कर उनका आकलन करेंगे।
पीटीआई अपनी प्रामाणिकता और पत्रकारीय नैतिकताओं के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जानी जाती है और यह मेटा के ‘फैक्ट-चेकिंग’ के प्रयासों को बढ़ा रही है।
पीटीआई ने 2022 में अपनी तथ्यान्वेषी इकाई ‘पीटीआई फैक्ट चेक’ की स्थापना की थी। इसमें तथ्यों की पड़ताल करने का विशाल अनुभव रखने वाले पत्रकारों की विशिष्ट टीम ऑनलाइन किए जा रहे दावों की सत्यता की पहचान करती है।
‘पीटीआई फैक्ट चेक’ इस काम के लिए कठोर पद्धति अपनाती है जिसमें प्रामाणिक सूत्रों से सूचनाओं का सत्यापन, विशेषज्ञों से संपर्क करना और आंकड़ों का विश्लेषण करना शामिल है। इस बाबत जानकारी पीटीआई वेबसाइट और सोशल मीडिया मंचों पर प्रकाशित की जाती है।
मेटा के ‘3पीएफसी’ कार्यक्रम में स्वतंत्र तथ्य-जांचकर्ताओं के साथ साझेदारी करके काम किया जाता है जो अपने मंचों पर साझा की गई सामग्री की सटीकता की समीक्षा और रेटिंग करते हैं। जब किसी उपयोगकर्ता के सामने तथ्यान्वेषी दल द्वारा गलत या भ्रामक के रूप में चिह्नित सामग्री आएगी तो तदनुसार उसे ‘लेबल’ किया जाएगा, और उपयोगकर्ताओं को तथ्यात्मक जानकारी वाले लिंक पर भेजा जाएगा।
इससे गलत सूचनाओं का प्रसार रुकता है और उपयोगकर्ता अपनी विषयवस्तु के बारे में सोच-समझकर निर्णय लेने में सक्षम होते हैं।
मेटा के एक बयान के अनुसार, ‘‘2016 से हमारे फेक्ट-चेकिंग कार्यक्रम का विस्तार हुआ है और इसमें दुनियाभर में करीब 100 संस्थान शामिल हुए हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य सोशल मीडिया पर फैली गलत सूचनाओं पर, खासतौर पर स्पष्ट रूप से फर्जी और निराधार सामग्री पर ध्यान देना है। तथ्य जांच करने वाले साझेदार संभावित झूठे दावों पर प्राथमिकता से ध्यान देते हैं जो सामयिक, प्रचलित और परिणामी होते हैं।’’
पीटीआई से इस साझेदारी के साथ मेटा के भारत में 12 तथ्यान्वेषी साझेदार हो गए हैं और यह मेटा के सभी मंचों पर विश्व स्तर पर सबसे अधिक तृतीय-पक्ष तथ्य-जांच भागीदारों वाला देश बन गया है।
भारत में मौजूदा फैक्ट चेकिंग साझेदारों के माध्यम से ‘3पीएफसी’ में 16 भाषाएं हैं जिनमें हिंदी, बांग्ला, तेलुगु, कन्नड, मलयालम, उर्दू, पंजाबी, असमिया, मणिपुर/मैइती, मराठी, गुजराती, तमिल, कश्मीरी, भोजपुरी, ओड़िया और नेपाली के साथ अंग्रेजी भी है।
भाषा वैभव