बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख यूनुस को निशाना बनाने वाले पोस्टर सिलीगुड़ी में ‘पाए’ गये
अमित संतोष
- 03 Dec 2024, 09:43 PM
- Updated: 09:43 PM
सिलीगुड़ी, तीन दिसंबर (भाषा) बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमलों और भारतीय तिरंगे के अपमान की खबरों के बीच, पड़ोसी देश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के पोस्टर पश्चिम बंगाल में सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिसमें उनकी तस्वीर के पास अपमानजनक शब्द लिखे हुए हैं।
ये पोस्टर कथित तौर पर सिलीगुड़ी नगर निगम भवन और उत्तर बंगाल के व्यस्त शहर के अन्य हिस्सों के पास देखे गए। इसके बाद इसकी तस्वीरें तुरंत सोशल मीडिया पर प्रसारित हो गईं, हालांकि ‘पीटीआई’ स्वतंत्र रूप से इसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं कर सका।
जिले के एक अधिकारी ने कहा कि पोस्टरों की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारी ने कहा, ‘‘हम इसकी जांच कर रहे हैं कि क्या किसी अन्य देश के खिलाफ आपत्तिजनक संदेश वाले ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं। अगर हमें कुछ मिलता है, तो प्रशासन उन्हें हटाने के लिए उचित कार्रवाई करेगा।’’
पोस्टरों के बारे में सूचना मिलने के बाद सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष ने कहा, ‘‘हर कोई जानता है कि बांग्लादेश में कई उच्च शिक्षण संस्थानों में भारतीय राष्ट्रीय ध्वज का कैसे अपमान किया गया। इन कृत्यों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गईं, जिससे भारतीयों के साथ-साथ सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने वालों की भावनाओं को ठेस पहुंची।’’
उन्होंने एक तरह से इसका संकेत दिया कि सिलीगुड़ी में इन पोस्टरों का दिखना बांग्लादेश में कुछ लोगों द्वारा भारत और उसके राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति दिखाए गए कथित अनादर के जवाब में गुस्से और हताशा की अभिव्यक्ति हो सकती है।
घोष ने कहा, ‘‘हालांकि पोस्टर कुछ लोगों द्वारा बनाए गए हो सकते हैं, लेकिन वे पड़ोसी देश में हमारे ध्वज के जानबूझकर अपमान और बांग्लादेश सरकार द्वारा इस तरह के कृत्यों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफलता पर कई लोगों द्वारा महसूस किए गए गहरे गुस्से और दर्द को दर्शाते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, किसी भी राष्ट्राध्यक्ष के अपमान को उचित नहीं ठहराया जा सकता।’’
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक घोष ने कहा कि हो सकता है कि पोस्टर लगाने के लिए जिम्मेदार लोगों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के उत्पीड़न को रोकने में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस की विफलता पर प्रतिक्रिया जताई हो।
घोष ने हिंदू आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास के मामले का भी उल्लेख किया, जिन्हें अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए बांग्लादेश में गिरफ्तार किया गया है। घोष ने कहा, ‘‘दास बांग्लादेश की अदालतों में अपना बचाव करने के लिए वकील नहीं ढूंढ़ पाए हैं, जो अल्पसंख्यकों के दमन और सरकार के इस्लामी ताकतों के सामने स्पष्ट रूप से आत्मसमर्पण को उजागर करता है।’’
भाषा अमित