नागरिक उड्डयन मंत्री नायडू ने राज्यसभा में पेश किया वायुयान विधेयक
ब्रजेन्द्र अविनाश
- 03 Dec 2024, 07:10 PM
- Updated: 07:10 PM
नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को ‘भारतीय वायुयान विधयेक, 2024’ पेश किया गया, जो कानून बनने पर 90 साल पुराने विमान अधिनियम की जगह लेगा तथा विमानन क्षेत्र के प्रमुख निकायों को ज्यादा शक्ति प्रदान करेगा।
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने उच्च सदन में यह विधेयक प्रस्तुत किया। लोकसभा ने इसी साल अगस्त महीने में भारतीय वायुयान विधेयक 2024 को मंजूरी दी थी।
नायडू ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि पहले के अधिनियम में कुछ भ्रम थे उनको दूर करने के लिए यह विधेयक लाया गया है।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) के मूल कानून में संशोधन के सुझाव के बाद विधेयक को विचार के लिए लाया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने विधेयक में सब कुछ व्यवस्थित किया है जो डीजीसीए जैसे निकायों की शक्तियों के लिए अलग-अलग स्पष्ट करता है। इसलिए स्पष्ट सीमांकन और संकेत हैं जिन पर प्रत्येक निकाय को आईसीएओ द्वारा अनुशंसित कार्य करना होगा।’’
नायडू ने उल्लेख किया कि विमानन क्षेत्र में अर्थव्यवस्था को चलाने की क्षमता है और इसका विस्तार किया जाना चाहिए।
उन्होंने सदन को सूचित किया कि देश में हवाई अड्डों की संख्या 2014 में 74 से बढ़कर 157 हो गई है और बेड़े का आकार भी 2014 में 400 (विमानों) से दोगुना होकर 813 हो गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले के कानून में सिर्फ वैश्विक भरण-पोषण का जिक्र था। इसकी कोई परिभाषा नहीं थी। अब हम डिजाइन और विनिर्माण भी जोड़ रहे हैं। हम इन तीनों शब्दों को भी (नए कानून में) परिभाषित कर रहे हैं। हम अपील प्रणाली लाए हैं।’’
मंत्री ने बताया, ‘‘ज्यादातर, हम मूल अधिनियम के समर्थन के साथ अधिनियम के नियमों में संशोधन करते हैं और यही कारण है कि हम मूल अधिनियम में संशोधन कर रहे हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘हम अधिनियम के तहत नियमों को मजबूत कानूनी समर्थन दे रहे हैं।’’
उन्होंने यह भी कहा कि आज हर कोई अपने जिले में एक हवाई अड्डा बनाना चाहता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम उन सपनों को पूरा करना चाहते हैं। हम उन हवाई अड्डों का निर्माण करना चाहते हैं। हमें लगता है कि अगर हम आज ऐसा नहीं कर सके तो कल यह एक चुनौती बन जाएंगी। जमीन की कमी होने वाली है।’’
विधेयक विभिन्न विमानन कानूनों के बीच मौजूदा विसंगतियों को हल करने और अच्छी तरह से परिभाषित अध्यायों और खंडों के साथ एक सुसंगत नियामक वातावरण सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।
प्रस्तावित कानून के साथ, मंत्रालय का उद्देश्य एक मजबूत नियामक ढांचा, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुपालन को सुनिश्चित कर उड़ान की आसानी को बढ़ावा देना है।
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि विधेयक का नाम हिंदी में नहीं होना चाहिए क्योंकि 60 फीसदी आबादी गैर-हिंदी भाषी है।
उन्होंने कहा कि विधेयक का हिंदी में नामकरण गैर-हिंदी भाषी लोगों के लिए समझना मुश्किल है।
उन्होंने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एजेंसियों की स्वायत्तता के बारे में भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा, ‘‘हर चीज को केंद्रीकृत करने की सरकार की प्रवृत्ति को देखते हुए, यह गंभीर चिंता का विषय है। विधेयक में कहा गया है कि डीजीसीए या बीसीएएस के आदेश के खिलाफ अपील केंद्र सरकार के समक्ष होगी। केंद्र सरकार के आदेश के खिलाफ आगे किसी भी अपील की अनुमति नहीं दी जाएगी।’’
हुसैन ने कहा, ‘‘इसलिए यह देखा जाना बाकी है कि केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण में ऐसी एजेंसियां पेशेवर और स्वतंत्र रूप से कैसे काम कर पाएंगी।’’
कांग्रेस सदस्य ने यात्रियों और विमान कंपनियों के बीच शिकायतों के समाधान के तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
हुसैन ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान संख्या के साथ गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाता था लेकिन वर्तमान सरकार के दौरान ‘‘संख्या बढ़ाने, फीता काटने और छवि चमकाने’’ पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यही वजह है कि दिल्ली, राजकोट और जबलपुर सहित देश के कई हवाई अड्डों पर सुरक्षा संबंधी घटनाएं हुईं।
उन्होंने सरकार पर साठगांठ वाले पूंजीवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि सरकार के पास न तो हवाई अड्डे हैं न विमान हैं। उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के पास बस मंत्री है।’’
कांग्रेस सदस्य ने सरकार पर विमानन क्षेत्र का निजीकरण करने और आम गरीबों की जेब से पैसे निकालने की अनुमति देने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि सरकार हवाई चप्पल पहनने वालों के हवाई जहाज से उड़ने की बात तो करती है लेकिन वास्तविकता है कि हवाई किराए आम आदमी की पहुंच से काफी दूर हैं।
हुसैन ने इस दौरान सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगाए जिसका भाजपा के सदस्यों ने जोरदार विरोध किया।
उन्होंने कहा कि नीति आयोग और वित्त आयोग की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए एक कंपनी को छह हवाई अड्डे दे दिए गए जबकि उस कपंनी पर अमेरिका में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एयरलाइंस पर दो कपंनियों का कब्जा है जबकि हवाई अड्डों पर एक व्यक्ति का। क्यों एक व्यक्ति की मदद की जा रही है।’’
उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री देश के ब्रांड एम्बेसडर हैं या एक कंपनी विशेष के ‘प्रोमोटर’।
सदन के नेता जे पी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस के सदस्य वायुयान विधेयक पर अपनी बात नहीं रख रहे हैं बल्कि प्रधानमंत्री की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने विपक्षी सदस्य से सदन की गरिमा के अनुरूप अपना पक्ष रखने का आग्रह करते हुए कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बहुत मौके आएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘कृपया चर्चा के स्तर को नीचे न गिराएं।’’
आसन पर मौजूद बीज जनता दल के सस्मित पात्रा ने कांग्रेस सदस्य हुसैन को आगाह किया कि यदि उन्होंने विधेयक से परे कोई भी आपत्तिजनक बात की होगी तो उसे सदन की कार्यवाही से हटा दिया जाएगा।
इस पर व्यवस्था का प्रश्न उठाते हुए कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने कहा कि इस विधेयक पर विमान कंपनियों, उसके मालिकों, प्रोमोटरों और ऑपरेटर पर चर्चा होगी।
आसान की ओर से आगाह किए जाने के बाद भी हुसैन ने बार-बार एक उद्योगपति का नाम लिया और उन्हें प्रधानमंत्री का ‘जिगरी मित्र’ बताया।
इसके बाद आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हवाई टिकटों की कीमतें बहुत अधिक हैं और सरकार को उसका नियमन करना चाहिए।
आप सदस्य ने कहा कि मालदीव की तुलना में लक्षद्वीप का किराया अधिक है। उन्होंने एक ही दिन अलग-अलग किराया होने पर भी चिंता जतायी। उन्होंने कहा कि हवाई अड्डों पर खाने-पीने के सामान की कीमतें बाजार की तुलना में कई गुना ज्यादा होती हैं। उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा कि टिकटों की कीमतें ज्यादा होने से पर्यटन क्षेत्र भी प्रभावित होता है।
उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह ‘‘उड़े देश का आम आदमी’’ यानी उड़ान योजना की बात करती है लेकिन वास्तविकता कुछ और है और लोग ‘‘प्लेन से वापस ट्रेन’’ की ओर जा रहे हैं।
चर्चा अधूरी रही।
भाषा ब्रजेन्द्र
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