पुलिस को शिमला जिले में मादक पदार्थ के खतरे से निपटने में एसआईएस से मिली मदद
अमित मनीषा
- 02 Dec 2024, 05:23 PM
- Updated: 05:23 PM
शिमला, दो दिसंबर (भाषा) शिमला पुलिस को एक स्रोत नेटवर्क के माध्यम से मादक पदार्थ की समस्या से निपटने, अंतरराज्यीय मादक पदार्थ गिरोहों को खत्म करने और मादक पदार्थ के व्यापार के प्रमुख लोगों को पकड़ने में मदद मिल रही है। यह जानकारी एक अधिकारी ने सोमवार को दी।
अधिकारी ने बताया कि ‘एसआईआईएनएस’ (सोशल इंटेलिजेंस इंटीग्रेटेड नेटवर्क सिस्टम) महिला मंडलों, स्कूल एवं कॉलेज के विद्यार्थियों, जागरूक नागरिकों, भूतपूर्व सैनिकों, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों, टैक्सी ऑपरेटरों और होटल व्यवसायियों सहित सामाजिक प्रतिभागियों को एकीकृत करता है, ताकि वे मादक पदार्थ के तस्करों और उपयोगकर्ताओं के बारे में सूचना एकत्र करने में शिमला पुलिस के साथ सहयोग कर सकें।
पुलिस ने बताया कि इस वर्ष नवंबर तक शिमला पुलिस ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत 237 मामलों में 557 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि इसमें 21 महिलाएं, 142 अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्कर और 35 नेपाली नागरिक शामिल हैं।
शिमला के पुलिस अधीक्षक (एसपी) संजीव कुमार गांधी ने सोमवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘एसआईआईएनएस के माध्यम से, विशेष रूप से महिला मंडलों और कॉलेज छात्रों से एकत्रित जानकारी ने पुलिस को सरगना शाही महात्मा सहित 52 मादक पदार्थ तस्करों को गिरफ्तार करने में मदद मिली, जो रोहड़ू और आसपास के इलाकों में नशेड़ी और आपूर्तिकर्ता दोनों बन गए थे।’’
उन्होंने कहा कि सेब व्यापारी शाही महात्मा उर्फ शशि नेगी, जो 'चिट्टा' (मिलावटी हेरोइन) की आपूर्ति कर रहा था, उसे 20 सितंबर को गिरफ्तार किया गया। गांधी ने बताया कि एक अन्य मामले में, टैक्सी ऑपरेटरों और होटल मालिकों से एकत्रित जानकारी से पुलिस को 15 अंतरराज्यीय मादक पदार्थ आपूर्तिकर्ताओं को गिरफ्तार करने में मदद मिली, जिनकी पहचान विशिष्ट होटलों में संदिग्ध गतिविधियों के माध्यम से की गई थी। उन्होंने बताया कि इसके अलावा, जिले के रामपुर, ठियोग और ननखरी क्षेत्रों में परिवहन विभाग से मिली जानकारी ने कई मादक पदार्थ तस्करों की गिरफ्तारी में मदद मिली।
कार्यप्रणाली में व्हाट्सऐप के माध्यम से मादक पदार्थ के लिए ऑर्डर देना और आपूर्ति करना शामिल था, जिसमें आपूर्ति करने वाले व्यक्ति और अंतिम प्राप्तकर्ता के बीच कभी सीधे संवाद नहीं होता था। एसपी ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला में भागीदार असंबंधित इकाइयों की तरह काम करते हैं, जिससे उनका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
एसपी ने कहा, ‘‘एसआईआईएनएस शिमला में नशीले पदार्थ के दुरुपयोग और तस्करी को खत्म करने में कारगर साबित हो रहा है। इसका उद्देश्य मादक पदार्थ के उपयोग के अभिशाप को समाप्त करने के लिए एसआईआईएनएस का उपयोग करना है, जो युवाओं और उनके परिवारों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। साथ ही उद्देश्य चोरी, सेंधमारी और चेन छिनैती जैसे मादक पदार्थ से संबंधित अपराधों को भी कम करना है।’’
यह प्रणाली मादक पदार्थ के तस्करों पर नज़र रखती है, उन्हें सक्रिय या निष्क्रिय के रूप में वर्गीकृत करती है और मादक पदार्थ की समस्या से पीड़ित उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करती है।
पुलिस ने बताया कि स्थानीय निवासियों से मिली प्रतिक्रिया के माध्यम से, एसआईआईएनएस ने खुलासा किया है कि जिले में 'चिट्टा' (मिलावटी हेरोइन) का अवैध व्यापार लगभग 45 करोड़ रुपये का है।
भाषा अमित