लोकसभा चुनाव: बंगाल से टीएमसी के उम्मीदवारों में यूसुफ पठान, महुआ मोइत्रा, कीर्ति आज़ाद शामिल
नोमान सुभाष
- 10 Mar 2024, 10:20 PM
- Updated: 10:20 PM
कोलकाता, 10 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पश्चिम बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीट के लिए रविवार को अपने उम्मीदवार घोषित कर दिए, और पार्टी ने इस सूची में अपने अनुभवी नेताओं के साथ-साथ नये चेहरों को भी जगह दी है।
सूची में शामिल कुछ महत्वपूर्ण उम्मीदवारों का परिचय इस प्रकार है:
अभिषेक बनर्जी - डायमंड हार्बर
डायमंड हार्बर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले दो बार के सांसद, अभिषेक बनर्जी टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और उन्हें ममता बनर्जी के बाद पार्टी में दूसरा सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता है।
टीएमसी सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का भतीजा होने की वजह से अभिषेक भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अक्सर निशाने पर रहे हैं।
अभिषेक ने अपने खिलाफ भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और पार्टी के भीतर एक-व्यक्ति-एक-पद का नियम लागू करने और राजनीति में सन्यास की आयु तय करने की वकालत की है।
सुदीप बंद्योपाध्याय - उत्तरी कोलकाता
सुदीप बंद्योपाध्याय एक अनुभवी राजनीतिक नेता हैं जो उत्तरी कोलकाता लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं और सांसद के रूप में अपना पांचवां कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। वह लोकसभा में टीएमसी के नेता भी हैं।
रोज़ वैली पोंजी घोटाला मामले में कथित तौर पर जांच एजेंसी से सहयोग नहीं करने लेकर 2017 में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किये जाने के बावजूद, 71 वर्षीय नेता पार्टी में अहम शख्सियत बने हुए हैं।
हालांकि, उम्रदराज़ नेताओं और युवा पीढ़ी के मध्य कथित सत्ता संघर्ष के बीच, टीएमसी की युवा ब्रिगेड के एक वर्ग ने उन्हें टिकट नहीं देने की मांग की थी।
यूसुफ पठान - बहरामपुर
टीएमसी ने आगामी लोकसभा चुनावों के लिए जिन 42 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, उनमें पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान का नाम भी शामिल हैं। वह सूची में शामिल शायद एकमात्र ऐसे उम्मीदवार हैं, जो राजनीति में नये होने के साथ-साथ बंगाल के बाहर के निवासी भी हैं।
गुजरात के बड़ौदा में जन्मे और क्रिकेट के मैदान में आक्रामक ऑलराउंडर माने जाने वाले पठान ने लगभग दो दशकों के करियर के बाद फरवरी 2021 में आधिकारिक तौर पर इस खेल के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया।
उन्हें कांग्रेस के गढ़ बहरामपुर से चुनाव मैदान में उतारा गया है। इस सीट का प्रतिनिधित्व लोकसभा में कांग्रस के नेता और प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अधीर रंजन चौधरी करते हैं।
कांग्रेस ने फिलहाल चौधरी की उम्मीदवारी का ऐलान नहीं किया है लेकिन राजनीति के जानकारों का मानना है कि पठान के लिए राह आसान नहीं होगी, क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस क्षेत्र के मूल निवासी भी हैं।
महुआ मोइत्रा- कृष्णानगर
महुआ मोइत्रा को पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में पिछले साल दिसंबर में लोकसभा से निष्कासित किये जाने और फिर राष्ट्रीय राजधानी में उनसे सरकारी आवास खाली कराये जाने के बाद, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया था कि मोइत्रा को फिर से कृष्णानगर सीट से टिकट दिया जाएगा।
जेपी मॉर्गन चेज़ की पूर्व निवेश बैंकर मोइत्रा संसद में अपनी मुखरता लिए जानी जाती हैं।
साल 2019 में सांसद चुने जाने से पहले, मोइत्रा बंगाल के नादिया जिले की करीमपुर से टीएमसी की विधायक थी।
मोइत्रा ने संसद में अडाणी समूह की संपत्ति के विस्तार में केंद्र की भागीदारी पर बार-बार सवाल उठाए थे। मोइत्रा ने केंद्र की (नरेन्द्र) मोदी सरकार के कई नीतिगत कदमों को शीर्ष अदालत में चुनौती दी।
जुलाई 2022 में देवी काली पर उनकी टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद उत्पन्न हो गया था। उन्होंने टिप्पणी की थी, "मेरे लिए काली एक मांस खाने वाली, शराब स्वीकार करने वाली देवी हैं।"
सायोनी घोष - जादवपुर
अभिनेत्री एवं राजनीतिक नेता सायोनी घोष को जादवपुर से मौजूदा सांसद मिमी चक्रवर्ती की जगह टिकट दिया गया है। घोष का मुकाबला भाजपा उम्मीदवार अनिर्बान गांगुली से होगा, जो पार्टी के अहम सदस्य हैं।
घोष जनवरी 2021 में ‘दीदी की’ कोर टीम का हिस्सा बनीं और आसनसोल दक्षिण विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें भाजपा नेता और फैशन डिजाइनर अग्निमित्रा पॉल ने शिकस्त दी थी।
अभिषेक बनर्जी की करीबी माने जाने वाली घोष ने जून 2021 में टीएमसी की युवा शाखा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उनका स्थान लिया था और वह इस पद पर बनी हुई हैं।
कीर्ति आज़ाद - बर्धमान-दुर्गापुर
आज़ाद 1983 में क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा थे। वह बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आज़ाद के बेटे हैं। वह भाजपा के टिकट पर दरभंगा से तीन बार लोकसभा सदस्य रहे, लेकिन 2015 में उन्हें भाजपा से निलंबित कर दिया गया था। वह 2019 में कांग्रेस में शामिल हो गए तथा दरभंगा से लोकसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए, जिसके बाद वह नवंबर 2021 में टीएमसी में शामिल हो गए।
देबांगशु भट्टाचार्य - तमलुक
टीएमसी के टिकट पर पहली बार चुनाव लड़ रहे भट्टाचार्य पार्टी की प्रदेश आईटी प्रकोष्ठ के प्रभारी हैं और 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले वह उस वक्त चर्चा में आए थे जब उन्होंने ‘खेला होबे’ नारा लिखा था। तमलुक सीट भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी का गढ़ है।
कालीपद सोरेन - झाड़ग्राम
झाड़ग्राम निवासी और पूर्व बैंक कर्मचारी कालीपद सोरेन को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने 2022 में पद्म श्री से सम्मानित किया था। वह राजनीति में नये हैं और वह खेरवाल सोरेन नाम से लेखन करते हैं तथा दो बार साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किये जा चुके हैं।
भाषा नोमान