कर्नाटक की मांड्या लोकसभा सीट को लेकर भाजपा आलाकमान के निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी
देवेंद्र अमित
- 10 Mar 2024, 07:40 PM
- Updated: 07:40 PM
बेंगलुरु, 10 मार्च (भाषा) कर्नाटक की मांड्या लोकसभा सीट के संबंध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व के फैसले का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है क्योंकि पार्टी समर्थित मौजूदा निर्दलीय सांसद सुमलता अंबरीश और उसके गठबंधन सहयोगी जनता दल (सेक्युलर), दोनों टिकट के लिए मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
जद (एस) ने भाजपा नेतृत्व को बताया है कि वह अपना उम्मीदवार खड़ा करना चाहता है, तो वहीं सुमलता भी राष्ट्रीय पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहती हैं।
यह सीट बेंगलुरु और मैसूरु के बीच स्थित है और जद (एस) इस सीट को लेकर दृढ़ है क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र में वोक्कालिगा समुदाय का वर्चस्व है।
पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा की अध्यक्षता वाली जद (एस) पहले ही उम्मीदवार पर निर्णय लेने के लिए अपने प्रदेश अध्यक्ष एच डी कुमारस्वामी के नेतृत्व में कई दौर की बैठकें कर चुकी है।
वर्ष 2019 में, सुमलता ने मांड्या सीट पर राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के बेटे निखिल को हराया था जो कांग्रेस-जद (एस) गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार थे।
मांड्या सीट कांग्रेस और जद (एस) के बीच प्रतिद्वंद्विता के लिए जानी जाती है। भाजपा भी पिछले कुछ वर्षों से यहां अपनी पैठ बनाने के लिए प्रयास कर रही है।
सुमलता अपने पति एवं लोकप्रिय फिल्म अभिनेता एम एच अंबरीश के निधन के बाद 2019 चर्चा में आईं थीं। एम एच अंबरीश ने पूर्व में मांड्या का लोकसभा में प्रतिनिधित्व किया था। उस चुनाव में सुमलता ने देवेगौड़ा के पोते जद (एस) के निखिल कुमारस्वामी को 1,25,876 वोटों के भारी अंतर से हराया था।
भाजपा के सूत्रों ने हालांकि कहा कि इस बार, पार्टी अपने गठबंधन सहयोगी के लिए मांड्या सीट छोड़ सकती है। सूत्रों ने कहा कि हालांकि भाजपा के कई स्थानीय नेता पार्टी से सुमलता की उम्मीदवारी का समर्थन कर रहे हैं और जद (एस) को सीट देने के कदम का विरोध कर रहे हैं।
मांड्या से टिकट किसे मिलेगा, इस पर ज्यादा टिप्पणी न करते हुए कुमारस्वामी यह कहते रहे हैं कि फैसले की घोषणा भाजपा आलाकमान करेगा।
सुमलता ने भी भाजपा केंद्रीय नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए मांड्या से टिकट मिलने का भरोसा जताया है। उन्होंने इससे पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा सहित पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की थी।
यह पूछे जाने पर कि यदि भाजपा उन्हें टिकट नहीं देती है तो क्या वह चुनाव लड़ेंगी, उन्होंने कहा, ‘‘कुछ दिन इंतजार करें, अधिकतम एक सप्ताह, सब कुछ आपके सामने होगा। फिर बात करते हैं। मेरी इच्छा भाजपा सांसद बनने की है।’’
भाषा देवेंद्र