राणे के गढ़ सिंधुदुर्ग में शिवसेना (यूबीटी) अपनी पकड़ को मजबूत करने में लगी
खारी रंजन
- 16 Nov 2024, 04:54 PM
- Updated: 04:54 PM
(प्रशांत रांगणेकर)
कणकवली/कुडाल, 16 नवंबर (भाषा) शिवसेना (यूबीटी) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद नारायण राणे के गृह क्षेत्र सिंधुदुर्ग में अपनी पकड़ को मजबूत करना चाहती है जिसके लिए वह वंशवाद की राजनीति को मुद्दा बनाकर राणे के दोनों बेटे नीलेश और नितेश पर निशाना साध रही है जो तटीय जिले की दो सीट से विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
दक्षिण कोंकण क्षेत्र यानी सिंधुदुर्ग कभी अविभाजित शिवसेना का गढ़ हुआ करता था लेकिन एकनाथ शिंदे के विद्रोह के दौरान उसके दो विधायक और मंत्री दीपक केसरकर और उदय सामंत के गठबंधन में शामिल होने से उसका वर्चस्व खो गया। शिवसेना (यूबीटी) लोकसभा चुनाव में सिंधुदुर्ग-रत्नागिरी सीट भी नारायण राणे से हार गई थी।
गोवा और कर्नाटक से सटे सिंधुदुर्ग जिले में तीन विधानसभा सीट-सावंतवाडी, कुडाल और कणकवली हैं। नितेश कुडाल से शिवसेना उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि नितेश पड़ोसी कणकवली से भाजपा उम्मीदवार हैं।
बुधवार को मालवण में एक रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वंशवाद की राजनीति की बात करते हैं, लेकिन उनकी पार्टी कोंकण में भी यही करती आ रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘क्या आपको लगता है कि कोंकण पिता (नारायण राणे) को अपने सिर पर और उनके दो बेटों (नीलेश और नितेश) को अपने कंधों पर बैठने देगा? क्या यह वंशवाद की राजनीति नहीं है? आप शिवसेना या शिवसेना प्रमुख (बाल ठाकरे) की वंशवाद की राजनीति नहीं चाहते। मैं अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ा रहा हूं।’’
उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी पार्टी में ‘‘गद्दारों’’ को स्वीकार करेगी लेकिन जब बाल ठाकरे के बेटे की बात आती है तो उसे वंशवाद की राजनीति से परेशानी होती है।
मालवण, कुडाल विधानसभा सीट का हिस्सा है। उन्होंने कणकवली में भी इसी मुद्दे पर हमला किया और कोंकण में राजनीतिक हिंसा को याद करते हुए राणे से इस पर बात करने की मांग की।
कुडाल से शिवसेना (यूबीटी) के उम्मीदवार वैभव नाइक ने कहा कि पार्टी सिंधुदुर्ग में वंशवाद की राजनीति के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
नाइक ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘यहां हमारे सांसद के रूप में नारायण राणे और उम्मीदवार के रूप में उनके दो बेटे हैं। हम सिंधुदुर्ग में वंशवाद की राजनीति को मुद्दा बनाकर लोगों को साध रहे हैं।’’
बाल ठाकरे के बेटे उद्धव पर खुद वंशवाद की राजनीति का हिस्सा होने का आरोप लगते रहे हैं। उनके बेटे आदित्य ठाकरे विधायक एवं पूर्व मंत्री हैं, जबकि उनकी पार्टी ने उनके भतीजे वरुण सरदेसाई को बांद्रा पूर्व निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतारा है।
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हैं और उद्धव के कट्टर प्रतिद्वंद्वी हैं। उनके बड़े बेटे नीलेश 2009 से 2014 तक रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से लोकसभा सदस्य थे। हालांकि, वह 2014 और 2019 में चुनाव हार गए। उनके छोटे बेटे नितेश कणकवली से विधायक हैं और उन्होंने 2014 में कांग्रेस विधायक और 2019 में भाजपा विधायक के रूप में इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है।
नीलेश ने पलटवार करते हुए कहा, ‘‘वंशवाद की राजनीति के बारे में बात करने का उद्धव को कोई अधिकारी नहीं है। अगर वह सिर्फ उद्धव होते तो क्या कोई उन्हें जानता। वह बाल ठाकरे के बेटे होने के कारण मुख्यमंत्री बने।’’
नीलेश ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘2024 में इससे बड़ा कोई मजाक नहीं है। उद्धव की एकमात्र पहचान ठाकरे के बेटे के रूप में है।’’
उन्होंने कहा कि 288 सीट में से मुश्किल से 30-33 सीट ऐसी हैं जहां नेताओं के रिश्तेदार चुनाव लड़ रहे हैं।
नीलेश ने कहा, ‘‘हम इसे हल्के में नहीं लेते। मैं खुद दो बार (लोकसभा चुनाव) हार चुका हूं। लेकिन हम लोगों के बीच जाते हैं और काम करते हैं।’’
भाषा खारी