उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश खानविलकर ने लोकपाल अध्यक्ष के रूप में शपथ ली
शफीक अमित
- 10 Mar 2024, 11:09 PM
- Updated: 11:09 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अजय माणिकराव खानविलकर को रविवार को राष्ट्रपति भवन में लोकपाल अध्यक्ष पद की शपथ दिलाई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
शाम में आयोजित शपथग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हुए।
न्यायमूर्ति खानविलकर (66) ने 13 मई, 2016 से 29 जुलाई, 2022 तक शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में सेवा दी।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, राष्ट्रपति ने रविवार शाम को राष्ट्रपति भवन में एक समारोह के दौरान खानविलकर को लोकपाल अध्यक्ष पद की शपथ दिलाई।
न्यायमूर्ति खानविलकर को पिछले महीने लोकपाल अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। सत्ताईस मई, 2022 को पिनाकी चंद्र घोष की सेवानिवृत्ति के बाद से यह पद रिक्त था।
विधि आयोग अध्यक्ष एवं कर्नाटक उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ऋतुराज अवस्थी, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश लिंगप्पा नारायण स्वामी और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजय यादव को लोकपाल में न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया।
पुणे में जन्मे खानविलकर हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश भी रहे थे।
लोकपाल के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है।
अध्यक्ष के अलावा, लोकपाल में आठ सदस्य - चार न्यायिक और चार गैर-न्यायिक - हो सकते हैं।
पूर्व नौकरशाहों - सुशील चंद्रा, पंकज कुमार और अजय तिर्की को लोकपाल में गैर-न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।
न्यायाधीश के रूप में खानविलकर ने कई महत्वपूर्ण निर्णयों में योगदान दिया, जिसमें 2018 का वह ऐतिहासिक फैसला भी शामिल है, जिसने सहमति से समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध मानने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को रद्द कर दिया था।
न्याययमूर्ति खानविलकर 2022 में उस पीठ का हिस्सा थे जिसने 2002 के गुजरात दंगा मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित 64 लोगों को विशेष जांच दल (एसआईटी) की क्लीन चिट को चुनौती देने वाली जकिया जाफरी की याचिका खारिज कर दी थी। जकिया जाफरी दिवंगत सांसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं। दंगे के दौरान एहसान जाफरी की मौत हो गई थी।
अपनी सेवानिवृत्ति से दो दिन पहले, न्यायमूर्ति खानविलकर ने एक फैसला सुनाया था, जो धनशोधन रोकथाम अधिनियम के तहत प्रवर्तन निदेशालय को और अधिक शक्तियां देता है।
भाषा शफीक