जम्मू कश्मीर के लोगों में राज्य का दर्जा वापस पाने की प्रबल आकांक्षा है : उपराज्यपाल मनोज सिन्हा
राजकुमार माधव
- 04 Nov 2024, 04:39 PM
- Updated: 04:39 PM
(फोटो के साथ)
श्रीनगर, चार नवंबर (भाषा) जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि विधानसभा चुनाव में भारी मतदान से लोगों की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अटूट आस्था झलकती है, लेकिन राज्य का दर्जा वापस पाने की आकांक्षा अब भी प्रबल है।
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर की पहली विधानसभा में अपने पहले संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि सरकार घाटी में कश्मीरी पंडितों के सम्मान के साथ पुनर्वास का प्रयास करेगी और उसके लिए सुरक्षित माहौल तैयार किया जायेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा के उद्घाटन सत्र में सदन के सभी नवनिर्वाचित सदस्यों का स्वागत करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। हम एक दशक से भी अधिक समय में पहली बार लोकतांत्रिक चुनाव के सफल और शांतिपूर्ण आयोजन के बाद यहां एकत्र हुए हैं।’’
उपराज्यपाल ने कहा कि अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किये जाने तथा जम्मू कश्मीर को संघशासित क्षेत्र में पुनर्गठित किये जाने के बाद हुआ यह पहला चुनाव ‘राजनीतिक अनिश्चितता’ के एक दौर के बाद लोकतांत्रिक शासन की बहाली में ‘मील का अहम पत्थर’ है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह लोकतंत्र की स्थायी भावना, हमारी संस्थाओं की ताकत और इस क्षेत्र के लोगों का इस विधानसभा के माध्यम से अपने लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व में विश्वास का प्रमाण है। इस प्रतिष्ठित सदन की बहाली देखना सौभाग्य की बात है, जो एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है।’’
सिन्हा ने कहा कि विधानसभा चुनाव के सबसे उत्साहजनक पहलुओं में एक उच्च मतदान प्रतिशत रहा, जो लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में लोगों की अटूट आस्था को दर्शाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘ विशेषकर जिन क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से अलगाववादी भावनाओं के प्रति अल्पसंख्यकों के मुखर रूप से सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण होने के कारण मतदान में हिस्सेदारी नहीं होती थी, वहां उच्च मतदान प्रतिशत यह दर्शाता है कि जम्मू-कश्मीर के लोग अब भी चुनावी भागीदारी को अपनी चिंताओं और आकांक्षाओं को व्यक्त करने के साधन के रूप में देखते हैं। चुनावी प्रक्रिया का सफलतापूर्वक पूरा होना जम्मू-कश्मीर के इतिहास में एक युग का प्रतीक है।’’
सिन्हा ने कहा कि वह लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने तथा लोगों को उनके योग्य शासन और भविष्य प्रदान करने के लिए सभी के साथ मिलकर काम करने के लिए तत्पर हैं।
सिन्हा ने कहा कि लोगों को सरकार से काफी उम्मीदें एवं आकाक्षाएं हैं तथा सरकार इन उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरी करने के लिए कमर कस चुकी है।
हालांकि, उपराज्यपाल ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में राज्य का दर्जा वापस पाने की आकांक्षा अब भी प्रबल है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई अवसरों पर राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जो लोगों के लिए आशा और आश्वासन का स्रोत है।
जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा बहाल करने के आह्वान के साथ मंत्रिपरिषद द्वारा पारित प्रस्ताव का हवाला देते हुए सिन्हा ने कहा कि यह प्रस्ताव निर्वाचित प्रतिनिधियों की सामूहिक इच्छा को दर्शाता है और पूर्ण लोकतांत्रिक शासन की बहाली के लिए लोगों की आकांक्षाओं को प्रतिध्वनित करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरी सरकार राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा और संवैधानिक गारंटी को बहाल करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। यह जम्मू-कश्मीर के लोगों द्वारा हमारे लोकतांत्रिक संस्थानों में व्यक्त विश्वास का उचित प्रतिफल होगा।’’
उन्होंने कहा,‘‘इस बीच, मैं सभी संबंधित पक्षों से एक टीम के रूप में मिलकर काम करने और लोगों की आशाओं एवं आकांक्षाओं को पूरा करने में मेरी सरकार को पूरा समर्थन देने का आग्रह करता हूं।’’
उपराज्यपाल ने कहा कि सरकार लोगों को और अधिक राजनीतिक सशक्तीकरण प्रदान करने तथा रोजगार, सतत विकास, सामाजिक समावेशन और जीवन की समग्र गुणवत्ता बढ़ाने के लिए अर्थव्यवस्था के विस्तार हेतु अनुकूल वातावरण बनाने के लिए किए गए वादों को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के हर वर्ग और हर क्षेत्र के साथ समान व्यवहार किया जाएगा तथा समावेशी और संतुलित विकास सुनिश्चित करने के लिए उनका विकास किया जाएगा, जो मेरी सरकार की एक गंभीर और पवित्र प्रतिबद्धता होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी के लिए प्रयास करेगी और घाटी में उनकी वापसी के लिए सुरक्षित माहौल बनाया जाएगा।
भाषा राजकुमार