पवार, पटोले ने महाराष्ट्र की डीजीपी के तबादले संबंधी फैसले का स्वागत किया
सिम्मी नरेश
- 04 Nov 2024, 04:21 PM
- Updated: 04:21 PM
मुंबई, चार नवंबर (भाषा) पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार और महा विकास आघाडी (एमवीए) में उनके गठबंधन सहयोगियों-शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे (यूबीटी) और कांग्रेस ने सोमवार को महाराष्ट्र में पुलिस महानिदेशक रश्मि शुक्ला का तत्काल प्रभाव से तबादला करने का निर्देश देने के निर्वाचन आयोग के फैसले का स्वागत किया।
सूत्रों ने बताया कि निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों से शिकायतें मिलने के बाद राज्य सरकार को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रश्मि शुक्ला का तत्काल प्रभाव से तबादला करने का सोमवार को निर्देश दिया।
उन्होंने बताया कि निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र की मुख्य सचिव को शुक्ला का प्रभार उनके बाद काडर के सबसे वरिष्ठ आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया।
सूत्रों ने बताया कि मुख्य सचिव को डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए मंगलवार दोपहर तक तीन आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजने का भी निर्देश दिया गया।
उन्होंने बताया कि मुख्य सचिव ने मुंबई पुलिस आयुक्त को इस पद का अतिरिक्त प्रभार संभालने को कहा है।
महाराष्ट्र में 20 नवंबर को चुनाव होगा।
पवार ने मुंबई में संवाददाताओं से कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग ने सही फैसला किया है। ऐसे लोगों को पद पर नहीं बने रहना चाहिए।’’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘उन्हें पद पर बनाए रखना और उन्हें सेवा विस्तार देना पूरी तरह अनुचित था। यह सकारात्मक बात है कि निर्वाचन आयोग ने उन्हें हटाने के लिए कदम उठाया। राज्य में उनका कार्यकाल पहले ही समाप्त हो चुका था।’’
संवाददाता सम्मेलन में मौजूद शिवसेना-यूबीटी के नेता उद्धव ठाकरे ने भी शुक्ला के संबंध में निर्वाचन आयोग के फैसले का स्वागत किया।
कांग्रेस की राज्य इकाई के अध्यक्ष नाना पटोले ने नागपुर में संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी ने विपक्षी नेताओं के फोन टैप करने में शुक्ला की कथित भूमिका का हवाला देते हुए उनके स्थानांतरण की मांग को लेकर निर्वाचन आयोग से तीन बार संपर्क किया था। उन्होंने सवाल किया कि आयोग को निर्णय लेने में इतना समय क्यों लगा?
उन्होंने आयोग से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि शुक्ला को चुनाव संबंधी कोई जिम्मेदारी न दी जाए।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘शुक्ला भाजपा का समर्थन करती थीं। उन्होंने विपक्षी नेताओं के फोन टैप कराए थे और हमने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। हम राज्य सरकार से लगातार मांग कर रहे थे कि ऐसे अधिकारी को महत्वपूर्ण पद न दिया जाए।’’
उन्होंने आरोप लगाया, लेकिन (मुख्यमंत्री एकनाथ) शिंदे और (उपमुख्यमंत्री देवेंद्र) फडणवीस ने उन्हें दो साल का ‘‘अवैध’’ सेवा विस्तार दिया और अपने चुनावी हितों के लिए उन्हें डीजीपी बनाया।
कांग्रेस नेता ने आयोग को उसके फैसले के लिए धन्यवाद देते हुए कहा, ‘‘इसलिए, हमने निर्वाचन आयोग से शिकायत की और उसने हमारी शिकायत का संज्ञान लिया लेकिन सवाल यह उठता है कि इसमें इतना समय क्यों लगा?’’
पटोले ने कहा कि पश्चिम बंगाल और झारखंड के डीजीपी का वहां चुनाव की घोषणा के तुरंत बाद तबादला कर दिया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग को महाराष्ट्र के डीजीपी शुक्ला का तबादला करने में इतना समय क्यों लगा?’’
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के 20 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनाव से दूर रहने के फैसले पर पवार ने कहा कि महा विकास आघाडी के किसी भी नेता का जरांगे के फैसले से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह सुनकर खुशी हुई कि मनोज जरांगे ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से हटने का फैसला किया है। अगर उन्होंने अपना अभियान जारी रखने का फैसला किया होता तो इससे चुनाव प्रक्रिया में भाजपा को अनजाने में फायदा हो सकता था इसलिए हम उनके फैसले का तहे दिल से स्वागत करते हैं।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या एमवीए नेता जरांगे को भाजपा के खिलाफ अपना अभियान जारी रखने में गुप्त रूप से मदद कर रहे हैं, पवार ने कहा, ‘‘एमवीए के रूप में, हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि जरांगे के फैसले से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, हमने उम्मीदवारी वापस लेने के उनके फैसले का स्वागत किया, क्योंकि इससे आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भाजपा को फायदा हो सकता था।’’
भाषा सिम्मी