मुख्तार अंसारी की मौत की उच्च स्तरीय जांच जरूरी: मायावती
आनन्द नरेश अमित
- 29 Mar 2024, 01:35 PM
- Updated: 01:35 PM
लखनऊ, 29 मार्च (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी की मौत के मामले की उच्च स्तरीय जांच की शुक्रवार को मांग की।
वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष एवं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अंसारी का नाम लिए बिना शुक्रवार को पुलिस और न्यायिक अभिरक्षा में होने वाली मौतों पर सवाल उठाते हुए उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच की मांग की।
बसपा प्रमुख मायावती ने मुख्तार की मौत के अगले दिन शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मुख्तार अंसारी की जेल में हुई मौत को लेकर उनके परिवार द्वारा जो लगातार आशंकायें व गंभीर आरोप लगाए गए हैं, उनकी उच्च-स्तरीय जांच जरूरी है, ताकि उनकी मौत के सही तथ्य सामने आ सकें।''
मायावती ने कहा, ''ऐसे में उनके परिवार का दुःखी होना स्वाभाविक है। कुदरत उन्हें इस दुःख को सहन करने की शक्ति दे।''
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने शुक्रवार को 'एक्स' पर कहा, ''हर हाल में और हर स्थान पर किसी के जीवन की रक्षा करना सरकार का सबसे पहला दायित्व और कर्तव्य होता है। सरकारों पर निम्नलिखित हालातों में से किसी भी हालात में, किसी बंधक या कैदी की मृत्यु होना, न्यायिक प्रक्रिया से लोगों का विश्वास उठा देगा।''
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, ''थाने में बंद रहने के दौरान - जेल के अंदर आपसी झगड़े में - जेल के अंदर बीमार होने पर- अदालत ले जाते समय- अस्पताल ले जाते समय- अस्पताल में इलाज के दौरान- झूठी मुठभेड़ दिखाकर- झूठी आत्महत्या दिखाकर- किसी दुर्घटना में हताहत दिखाकर, ऐसे सभी संदिग्ध मामलों में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में जांच होनी चाहिए।''
यादव ने कहा, ''सरकार न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार कर जिस तरह दूसरे रास्ते अपनाती है वो पूरी तरह ग़ैर क़ानूनी है। जो हुकूमत जिंदगी की हिफाजत न कर पाये, उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं। उत्तर प्रदेश ‘सरकारी अराजकता’ के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। ये यूपी में ‘क़ानून-व्यवस्था का शून्यकाल है।''
बदायूं पहुंचे लोकसभा क्षेत्र के समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी और पार्टी महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने आज यहां पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव के आवास पर कहा कि मुख्तार अंसारी की मौत पर अदालत को संज्ञान लेना चाहिए, मुख्तार की मौत संदेह के घेरे में है।
यादव ने कहा कि मुख्तार अंसारी के परिवार से उनके अच्छे संबंध रहे हैं और मुख्तार अंसारी का परिवार देश की आजादी में लड़ा था। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में इस परिवार का काफी योगदान रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुख्तार अंसारी की मौत संदेह के घेरे में है और अदालत को इस मामले में स्वत: संज्ञान लेना चाहिए।''
उन्होंने कहा कि मुख्तार अंसारी के बेटे को जनाजे में शामिल होने के लिए जिलाधिकारी को स्वत: संज्ञान लेते हुए उनके बेटे को पैरोल देनी चाहिए।
अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी आपराधिक मामलों में कासगंज की जेल में निरुद्ध हैं।
सपा के प्रमुख महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने 'एक्स' पर चिंता प्रकट करते हुए कहा, ''पूर्व विधायक मुख़्तार अंसारी की जिन परिस्थितियों में मृत्यु हुई, वह अत्यधिक चिंताजनक है। उन्होंने अदालत में अर्जी देकर पहले ही जहर के द्वारा अपनी हत्या की आशंका व्यक्त की थी।''
इसी पोस्ट में प्रोफेसर यादव ने आरोप लगाया, ‘‘मौजूदा व्यवस्था में तो न जेल में कोई सुरक्षित, न पुलिस हिरासत में और न अपने घर में। प्रशासनिक आतंक का माहौल पैदा करके लोगों को मुंह बंद रखने को विवश किया जा रहा है। क्या मुख्तार अंसारी द्वारा अदालत में दी गयी अर्जी के आधार पर कोई न्यायिक जांच का आदेश करेगी उत्तर प्रदेश सरकार?''
मऊ विधानसभा सीट से 1996 से 2017 तक लगातार पांच बार विधायक रहे मुख्तार अंसारी पहली बार (1996) और आखिरी बार (2017) बसपा के टिकट पर ही चुनाव जीता था। वह दो बार निर्दलीय और एक बार अपने भाई सांसद अफजाल अंसारी के नेतृत्व वाली कौमी एकता दल के टिकट पर निर्वाचित हुआ। बसपा से गाजीपुर के सांसद अफजाल अंसारी को समाजवादी पार्टी (सपा) ने इसी सीट से अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
मुख्तार के निधन पर समाजवादी पार्टी की ओर से भी बृहस्पतिवार देर रात शोक जताया गया। सपा के 'एक्स' अकाउंट पर पोस्ट किया गया, ''पूर्व विधायक श्री मुख्तार अंसारी जी का इंतकाल, दुःखद। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें। शोकाकुल परिजनों को यह असीम दुःख सहने का संबल प्राप्त हो। विनम्र श्रद्धांजलि!''
माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी को बृहस्पतिवार को तबीयत बिगड़ने के बाद जिला जेल से रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गयी।
बांदा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य सुनील कौशल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को फोन पर बताया, ''मेडिकल कॉलेज में दिल का दौरा पड़ने से अंसारी की मौत हो गयी।'' बांदा जेल में बंद अंसारी (63) को आज शाम मेडिकल कॉलेज लाया गया था।
मुख्तार के परिजनों ने उसे जेल में खाने में जहर दिये जाने का आरोप लगाया था।
गाजीपुर से बहुजन समाज पार्टी के सांसद अफजाल ने मंगलवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा था कि ''मुख्तार ने उन्हें बताया था कि करीब 40 दिन पहले भी उन्हें जहर दिया गया था और हाल ही में शायद 19 या 22 मार्च को फिर ऐसा किया गया, जिसके बाद से उनकी हालत खराब है।''
अफजाल ने कहा था कि 21 मार्च को बाराबंकी की अदालत में एक मामले की डिजिटल माध्यम से सुनवाई के दिन मुख्तार के वकील ने अदालत में दरखास्त दी थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उनके मुवक्किल को जेल में 'धीमा जहर' दिया गया है जिससे उनकी हालत बिगड़ती जा रही है।
भाषा आनन्द नरेश