कोडकारा मामला : माकपा, कांग्रेस और भाजपा ने एक-दूसरे पर सौदेबाजी करने का आरोप लगाया
धीरज देवेंद्र
- 03 Nov 2024, 12:45 AM
- Updated: 12:45 AM
पल्लकड़/वायनाड/कोझिकोड, दो नवंबर (भाषा) केरल में उपचुनाव के लिए जारी प्रचार अभियान के दौरान कोडकारा काले धन मामले में ताजा खुलासे से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राज्य में सत्तारूढ़ माकपा, केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस एक-दूसरे पर चुनावी फायदे के लिए ‘‘सौदेबाजी’’ करने का आरोप लगा रहे हैं।
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर कटाक्ष करते हुए सुझाव दिया कि उसे ‘‘अपना चुनाव चिह्न कमल को बदलकर बोरी कर लेना चाहिए’’, साथ ही मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की निष्क्रियता पर कांग्रेस की चुप्पी की भी आलोचना की।
भाजपा ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि माकपा और कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने भाजपा की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए एक पूर्व भाजपा सदस्य के माध्यम से 2021 कोडकारा काला धन मामले को लेकर साजिश रची।
कांग्रेस ने मामले की पुनः जांच को एक ‘तमाशा’ बताया। पार्टी ने कहा कि 13 नवंबर को होने वाले उपचुनावों से पहले भाजपा और माकपा के बीच कथित समझौते को छिपाने के लिए यह किया गया है।
केरल के लोक निर्माण मंत्री पी. ए. मोहम्मद रियास ने यह कहकर सियासी माहौल को गर्म कर दिया कि ‘‘नए खुलासों से कई चीजें स्पष्ट हो गई हैं और उनमें से एक यह है कि भाजपा को अपना चिह्न कमल की जगह बोरी कर लेना चाहिए।’’
इस मामले में ईडी के कार्रवाई नहीं करने पर कांग्रेस की चुप्पी को लेकर मंत्री ने यह दिखाने का प्रयास किया कि भाजपा और कांग्रेस मिली हुई है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी)के महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने फिर से जांच को ‘तमाशा’ करार दिया।
कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि ईडी और आयकर विभाग कोडकारा मामले की जांच करने में क्यों हिचकिचा रहे हैं। उन्होंने इसे केरल के सबसे बड़े धनशोधन मामलों में से एक बताया और केंद्र और केंद्रीय वित्त मंत्री से सफाई देने की मांग की।
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के प्रमुख के. सुधाकरन ने मामले की फिर से जांच किए जाने की आलोचना की और इसे उपचुनाव के मद्देनजर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन का “व्यर्थ दांव” बताया।
उन्होंने आरोप लगाया कि कोडकारा काला धन मामले की जांच भाजपा और माकपा के बीच समझौते के तहत ‘‘स्थगित’’ कर दी गई थी, जिससे मुख्यमंत्री और उनके परिवार को भी लाभ हुआ था, क्योंकि केंद्रीय एजेंसियों ने उनके खिलाफ जांच रोक दी थी।
माकपा और कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए भाजपा की केरल इकाई के प्रमुख के. सुरेन्द्रन ने उन पर भाजपा की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए नवीनतम आरोप गढ़ने का आरोप लगाया।
वायनाड में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सुरेन्द्रन ने आरोप लगाया कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछ राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन का हाथ है।
सुरेंद्रन ने कहा, “अगर इस तरह के आरोपों से मेरे हाथ दागदार हो सकते हैं, तो मैं राजनीतिक जीवन छोड़ दूंगा। मैं सभी जांचों का स्वागत करता हूं। इन आरोपों से मुझे या पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा।”
उन्होंने कहा कि ईडी की जांच जारी है और उन्हें गवाह के तौर पर कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया है। सुरेंद्रन ने दलील दी कि इन झूठे आरोपों से पता चलता है कि सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) और यूडीएफ को केरल में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का डर है। उन्होंने कहा कि अगर मकापा -भाजपा के बीच कोई समझौता हुआ है तो दोबारा जांच की जरूरत नहीं होती।
इस बीच, भाजपा की वरिष्ठ नेता शोभा सुरेन्द्रन ने इस मामले से उन्हें जोड़ने वाले दावों को खारिज करते हुए कहा कि उनका परिवार अपनी क्षमता के अनुसार जीवन व्यतीत कर रहा है और उनके बच्चे नौकरी करते हैं।
उन्होंने पूर्व भाजपा पदाधिकारी तिरुर सतीश के साथ किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया तथा पैसों से भरे किसी भी बोरे के दावे पर आशंका जताई। ,सतीश ने इस मामले के संबंध में हाल ही में दावे किए थे।
पलक्कड़ उपचुनाव के लिए भाजपा के उम्मीदवार सी कृष्णकुमार ने कहा कि खुलासे या मामला पार्टी के लिए चिंता का कारण नहीं है क्योंकि 13 नवंबर को उपचुनाव के बाद यह सारा मामला खत्म हो जाएगा।
यूडीएफ के उम्मीदवार मामकुताथिल ने कहा कि माकपा अब यह दिखाने के लिए इस मामले को उजागर कर रही है कि उसका भाजपा के साथ कोई समझौता नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘पहले की जांच का क्या हुआ? क्या वह विफल रही? यदि हां, तो क्यों? अब दोबारा जांच इस बात का संकेत है कि पहले की जांच विफल रही।’’
काले धन का मामला 2021 में केरल विधानसभा चुनाव के लिए मतदान से तीन दिन पहले तीन अप्रैल को त्रिशूर के कोडकारा में राजमार्ग डकैती की घटना से संबंधित है।
पुलिस जांच में पता चला कि चुनाव प्रचार के लिए कथित तौर पर 3.5 करोड़ रुपये एक कार में एर्णाकुलम ले जाए जा रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, इस कार का पीछा कर रहे एक गिरोह ने कोडकारा के पास फर्जी दुर्घटना दिखाकर कार को रोकने के बाद पैसे लूट लिए।
भाषा धीरज