भारत अपनी सीमा की एक इंच जमीन से भी समझौता नहीं कर सकता: मोदी
अमित माधव
- 31 Oct 2024, 06:50 PM
- Updated: 06:50 PM
भुज (गुजरात), 31 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत अपनी सीमा की एक ‘‘इंच’’ जमीन से भी समझौता नहीं कर सकता और लोगों को देश की रक्षा के लिए अपनी सेना की ताकत पर विश्वास है।
मोदी ने सशस्त्र बल कर्मियों के साथ दिवाली मनाने की अपनी परंपरा जारी रखी। उन्होंने गुजरात के कच्छ जिले में सर क्रीक में कहा कि भारत के शत्रु जब भारतीय सशस्त्र बलों की ओर देखते हैं तो उन्हें ‘‘अपने बुरे मंसूबों का अंत दिखाई देता है।’’
यह स्थल भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीक स्थित है।
मोदी ने कहा, ‘‘अतीत में इस क्षेत्र को युद्धक्षेत्र में बदलने के प्रयास किए गए। दुश्मन लंबे समय से इस क्षेत्र पर नजर गड़ाए हुए है। लेकिन हमें चिंता नहीं है, क्योंकि आप देश की रक्षा कर रहे हैं। हमारे दुश्मन भी इसे अच्छी तरह जानते हैं।’’
मोदी ने सीमा सुरक्षा बल, सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘भारत के लोगों को लगता है कि उनका देश आपके कारण सुरक्षित है, दुनिया जब आपको देखती है, तो उसे भारत की ताकत दिखाई देती है और जब दुश्मन आपको देखता है, तो उसे बुरे मंसूबों का अंत दिखाई देता है। जब आप जोश में दहाड़ते हैं, तो आतंक के आका कांप जाते हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘आज देश में एक ऐसी सरकार है जो देश की सीमा के एक इंच से भी समझौता नहीं कर सकती है।’’
मोदी ने कहा कि अतीत में दुश्मन द्वारा ‘‘कूटनीति के नाम पर’’ सर क्रीक पर कब्जा करने के प्रयास किए गए थे, लेकिन उन्होंने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में ऐसे प्रयासों के खिलाफ आवाज उठायी थी।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार देश की रक्षा के लिए सेना के संकल्पों पर भरोसा करती है, दुश्मन की बातों पर नहीं।’’
इस सप्ताह के शुरू में भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग मैदानों में गतिरोध वाले दो स्थलों से सैनिकों की वापसी पूरी कर ली थी। यह कदम दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चार साल से अधिक समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने के लिए हुए समझौते के बाद उठाया गया था।
इस बीच, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ‘‘हम सेना, नौसेना और वायुसेना को अलग-अलग इकाई के रूप में देखते हैं, लेकिन जब वे एकसाथ आएंगे तो उनकी ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।’’
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) के पद का सृजन इस दिशा में एक कदम था और सरकार अब एकीकृत थिएटर कमान बनाने पर काम कर रही है, जिससे थलसेना, वायुसेना और नौसेना के बीच बेहतर समन्वय होगा।
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास ‘‘सर्वोच्च प्राथमिकता’’ है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि रक्षा मंत्रालय के तहत आने वाले सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने अब तक 80,000 किलोमीटर सड़कें बनाई हैं, जिनमें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़कें भी शामिल हैं।
मोदी ने कहा कि उनकी सरकार सशस्त्र बलों को नवीनतम उपकरण प्रदान करने और उन्हें दुनिया की सबसे उन्नत सेनाओं में से एक बनाने पर काम कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह नये जमाने की युद्धनीति का दौर है। ड्रोन तकनीक इसका एक उदाहरण है। वर्तमान में युद्ध में शामिल देश अलग-अलग उद्देश्यों के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम सेना के तीनों अंगों के लिए प्रीडेटर ड्रोन खरीद रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि साथ ही कई भारतीय कंपनियां भी ड्रोन का निर्माण कर रही हैं।
मोदी ने जवानों से कहा कि देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है और ‘‘आप सभी इस सपने के रक्षक हैं।’’ उन्होंने यह भी कहा कि कच्छ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और सीमा पर्यटन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक ऐसा पहलू है जिस पर ज्यादा चर्चा नहीं होती।
मोदी ने कहा, ‘‘हम यहां मैंग्रोव उगाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। मैंग्रोव वन विकसित होने के बाद यह पर्यटकों को आकर्षित करेगा। जिस तरह धोरडो रण उत्सव दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है, मुझे विश्वास है कि यह क्षेत्र निकट भविष्य में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन जाएगा।’’
भाषा अमित