भारत-चीन सीमा से सैनिकों की वापसी से द्विपक्षीय संबंध बेहतर होने की उम्मीद: चीनी राजदूत
धीरज शफीक
- 30 Oct 2024, 08:34 PM
- Updated: 08:34 PM
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 30 अक्टूबर (भाषा) भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने बुधवार को उम्मीद जताई कि पूर्वी लद्दाख से लगती भारत-चीन सीमा से दोनों देशों के सैनिकों की वापसी पूरी होने से रिश्तों को बेहतर करने और आने वाले दिनों में दोनों पड़ोसियों के बीच बेहतर समझ बनाने में मदद मिलेगी।
चीनी राजनयिक ने यहां ‘मर्चेंट चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ (एमसीसीआई) द्वारा आयोजित एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई हालिया बैठक ‘‘बहुत महत्वपूर्ण’’ थी।
पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में भारत-चीन सीमा पर सैनिकों की वापसी से संबंधित एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि वहां जल्द ही सेना की गश्त शुरू होने की उम्मीद है।
चीनी राजदूत ने कहा, ‘‘मुझे उम्मीद है कि इस आम सहमति के आलोक में भविष्य में रिश्ते सुचारू रूप से आगे बढ़ेंगे और दोनों पक्षों के बीच विशिष्ट असहमतियों के कारण सीमित और बाधित नहीं होंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मतभेदों को कैसे दूर किया जाए।’’
चीनी राजनयिक ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में दोनों नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक वार्ता थी, जिसमें महत्वपूर्ण सहमति बनी तथा दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों के आगे बढ़ाने के लिए दिशा-निर्देश तय किए गए।
उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं के बीच भारत-चीन संबंधों को सुधारने और विकसित करने पर महत्वपूर्ण आम सहमति बनी और उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर वापस लाने की रूपरेखा तय की।
मोदी और चिनफिंग की 23 अक्टूबर को रूस के कजान में बैठक हुई थी।
फेइहोंग ने कहा, ‘‘बैठक रचनात्मक थी और इसका बहुत महत्व था। दोनों पक्षों ने कई सामान्य मुद्दों पर सहमति जताई, जिनमें संचार और सहयोग को मजबूत करना, आपसी विश्वास को बढ़ाना, संबंधों को पटरी पर लाने के लिए विभिन्न स्तरों पर हमारे विदेश मंत्रियों और अधिकारियों के बीच वार्ता आयोजित करना शामिल है।’’
चीनी राजदूत ने कहा कि बैठक में भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि तंत्र का अच्छा उपयोग किया गया, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द सुनिश्चित किया जा सके तथा विकासशील देशों के साझा हितों की रक्षा के लिए निष्पक्ष और उचित समाधान निकाला जा सके।
चीन और भारत के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू होने के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘एक राजदूत के तौर पर मैं इसका इंतजार कर रहा हूं क्योंकि इससे समय की बचत होगी। मैं न केवल राजनीति में बल्कि व्यापार में भी सुचारू सहयोग की उम्मीद कर रहा हूं।’’
राजनयिक ने कहा, ‘‘चीन और भारत विकास सहयोग में एक-दूसरे को लाभान्वित कर रहे हैं। भारत-चीन वाणिज्यिक सहयोग ने लंबे समय तक अच्छी गति बनाए रखी है। इस वर्ष भारत में चीनी दूतावास और वाणिज्य दूतावासों ने 2.4 लाख वीजा जारी किए हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत बिजनेस वीजा थे।’’
राजदूत ने कहा कि चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है और द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गया है। चीन को भारत के साथ व्यापार ‘सरप्लस’ का लाभ मिलता है।
उन्होंने कहा, ‘‘चीनी उत्पादों पर कर और प्रतिबंध लगाना भारत में ‘डाउनस्ट्रीम उद्योगों’ के विकास और उपभोक्ताओं के हितों के लिए अनुकूल नहीं है।’’
राजनयिक ने दोनों प्रमुख बाजारों के बीच घनिष्ठ वाणिज्यिक संबंधों की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत और चीन के बीच संबंध दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में से एक है। जब भारत और चीन सहयोग के लिए हाथ मिलाएंगे, तो इससे दोनों देशों के साथ-साथ पूरे एशिया और पूरे विश्व को लाभ होगा।’’
भाषा धीरज