आरआर पाटिल ने कथित सिंचाई घोटाले में खुली जांच का आदेश देकर मेरी पीठ में छुरा घोंपा था: अजित पवार
सुरेश वैभव
- 29 Oct 2024, 07:28 PM
- Updated: 07:28 PM
पुणे, 29 अक्टूबर (भाषा) महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने मंगलवार को आरोप लगाया कि उनके करीबी सहयोगी और तत्कालीन गृहमंत्री आरआर पाटिल ने कई करोड़ रुपये के कथित सिंचाई घोटाले में उनके खिलाफ खुली जांच का आदेश देकर पीठ में छुरा घोंपा था।
पवार ने दावा किया कि जांच का आदेश देने वाली पाटिल की टिप्पणी का उल्लेख करने वाली एक फाइल उन्हें 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री बनने के बाद दिखाई थी।
उन्होंने ये दावे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) उम्मीदवार संजय काका पाटिल के समर्थन में एक रैली को संबोधित करते हुए किए। काका पाटिल सांगली जिले की तासगांव सीट से दिवंगत नेता आरआर पाटिल के बेटे रोहित के खिलाफ मैदान में हैं।
पवार ने दावा किया, ‘‘सिंचाई घोटाले में मेरे खिलाफ आरोप लगाए गए। मुझे बदनाम करने की कोशिश की गई। सिंचाई परियोजना में 70,000 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगाने का फैसला किया गया। परियोजना में वेतन का कुल खर्च 42,000 करोड़ रुपये था, जबकि 70,000 करोड़ रुपये की अनियमितता का आरोप लगाया गया।’’
राकांपा प्रमुख ने कहा कि परियोजना के लिए वास्तविक व्यय 43,000 करोड़ रुपये था, लेकिन 70,000 करोड़ रुपये का घोटाला दिखाने के लिए मामला बनाया गया।
अजित पवार 1999-2009 के दौरान राज्य के जल संसाधन विकास मंत्री थे, जब महाराष्ट्र में कांग्रेस-राकांपा गठबंधन की सरकार थी।
उन्होंने विदर्भ सिंचाई विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया था, जिसने सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी थी, जिनमें कथित अनियमितताएं थीं।
उन्होंने दावा किया, ‘‘एक फाइल तैयार की गई और (आर आर पाटिल की अध्यक्षता वाले) गृह विभाग को भेज दी गई। उन्होंने मेरे खिलाफ खुली जांच को मंजूरी दी और फाइल नोट में इसका उल्लेख किया। यह पूरी तरह से पीठ में छुरा घोंपने का मामला था। मैं बहुत परेशान हो गया, क्योंकि वह (आरआर पाटिल) मेरे करीबी सहयोगी थे।’’
उन्होंने कहा कि इसके बाद राकांपा (अविभाजित) ने पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया और राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
उन्होंने दावा किया, ‘‘तत्कालीन राज्यपाल ने फाइल (खुली जांच के लिए) पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया और कहा कि नये मुख्यमंत्री को इस पर हस्ताक्षर करने दें।’’
उल्लेखनीय है कि शरद पवार के नेतृत्व वाली तत्कालीन राकांपा ने विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले कांग्रेस से नाता तोड़ते हुए सितंबर 2014 में तत्कालीन पृथ्वीराज चव्हाण के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
पवार ने दावा किया, ‘‘जब देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में आई, तो उन्होंने फाइल पर हस्ताक्षर किए और बाद में मुझे बुलाया। उन्होंने कहा कि फाइल मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर का इंतजार कर रही थी। उन्होंने मुझे बताया कि आरआर पाटिल ने जांच शुरू की थी। उन्होंने मुझे फाइल पर अपने हस्ताक्षर दिखाए। मैं बहुत परेशान था, क्योंकि वह (पाटिल) मेरे करीबी सहयोगी थे।’’
महाराष्ट्र के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 28 नवंबर, 2019 को शिवसेना, तत्कालीन अविभाजित राकांपा और कांग्रेस के गठबंधन वाली महा विकास आघाडी (एमवीए) सरकार के शपथ लेने के बाद करोड़ों रुपये के विदर्भ सिंचाई घोटाले में अजित पवार को क्लीन चिट दे दी थी।
आरआर पाटिल ने 2004 से 2014 तक कांग्रेस-राकांपा सरकारों के कार्यकाल के दौरान काफी समय तक राज्य के गृह मंत्री के रूप में कार्य किया था।
भाषा सुरेश