गुजरात के पत्रकार के नियंत्रण वाली कंपनी जीएसटी ‘धोखाधड़ी’ मामले में शामिल: ईडी
संतोष अविनाश
- 29 Oct 2024, 07:17 PM
- Updated: 07:17 PM
नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को दावा किया कि गुजरात के एक पत्रकार उस आरोपी कंपनी को ‘नियंत्रित’ कर रहे थे जिसके परिसर से राज्य पुलिस ने हाल ही में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) ‘धोखाधड़ी’ मामले की जांच के दौरान बेहिसाबी नकदी जब्त की थी।
संघीय जांच एजेंसी ने कहा कि उसने इस धन शोधन मामले में रविवार को नए सिरे से तलाशी ली और अहमदाबाद, सूरत और भावनगर में सात परिसर में छापेमारी कर ‘आपत्तिजनक’ दस्तावेज जब्त किए।
ईडी के अनुसार, पत्रकार महेश लांगा ‘डीए एंटरप्राइजेज’ कंपनी को नियंत्रित कर रहे थे, जिसके परिसर से पुलिस ने ‘बड़ी मात्रा में बेहिसाबी नकदी’ जब्त की थी।
ईडी ने आरोप लगाया कि शेल (मुखौटा) कंपनियों के साथ कई बेनामी लेनदेन किये जाने का भी संदेह है।
धन शोधन का मामला अहमदाबाद पुलिस की अपराध शाखा की एक प्राथमिकी पर आधारित है जो ‘संगठित अपराधियों के एक समूह द्वारा 200 से अधिक शेल कंपनियों के निर्माण’ के खिलाफ जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की एक शिकायत पर दर्ज किया गया था।
इन कंपनियों के निर्माण का उद्देश्य कोई सामान या सेवा उपलब्ध कराए बिना फर्जी चालान के आधार पर धोखाधड़ी से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) प्राप्त करना और इसे दूसरों को उपलब्ध कराना था।
इस मामले में मुख्य आरोपी कंपनी ‘ध्रुवी एंटरप्राइजेज’ है। लांगा ‘द हिंदू’ अखबार के लिए गुजरात संवाददाता के रूप में काम करते हैं। उनके वकील वेदांत राजगुरु को पहले ‘द हिंदू’ ने यह कहते हुए उद्धृत किया था कि पत्रकार न तो ‘डीए एंटरप्राइज’ के निदेशक हैं और न ही प्रवर्तक हैं, जिसका नाम पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी में भी है।
लंगा और अन्य के रिमांड आवेदन में पुलिस ने कहा था कि वह अपने रिश्तेदार और पत्नी के नाम पर डीए एंटरप्राइज चला रहे हैं। अखबार ने उनके वकील के हवाले से कहा है कि जिस कंपनी की बात हो रही है, उसके मालिक महेश लांगा के रिश्तेदार मनोज लांगा हैं और उनकी पत्नी इसमें निष्क्रिय साझेदार हैं जिसके पास लेन-देन करने या बैंक खातों तक पहुंच का कोई अधिकार नहीं है।
वकील ने कहा था, ‘‘पुलिस का मामला मनोज लांगा के एक बयान पर टिका है कि उन्होंने महेश लांगा के निर्देश पर लेनदेन किया था। महेश के नाम पर कोई लेनदेन या हस्ताक्षर नहीं है।’’
सोमवार को एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, प्रेस एसोसिएशन, इंडियन वुमेन प्रेस कोर, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स और केरल यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स जैसे मीडिया निकायों ने गोपनीय दस्तावेजों को कब्जे में लेने के लिए लांगा के खिलाफ दूसरी प्राथमिकी दर्ज करने की निंदा की और आरोप वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस पार्टी ने लांगा के खिलाफ कार्रवाई को ‘लोकतांत्रिक स्वतंत्रता पर खुला हमला’ करार दिया था। ईडी ने इस कथित जीएसटी धोखाधड़ी मामले में धन शोधन का मामला दर्ज किया था और 17 अक्टूबर को लांगा के परिसर सहित गुजरात के विभिन्न स्थानों पर तलाशी ली थी।
भाषा
संतोष