एडीएम की मौत : केरल की अदालत ने माकपा नेता दिव्या की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की
सुरभि नरेश
- 29 Oct 2024, 02:09 PM
- Updated: 02:09 PM
कन्नूर (केरल), 29 अक्टूबर (भाषा) केरल की एक अदालत ने कन्नूर के पूर्व अतिरिक्त जिलाधिकारी (एडीएम) नवीन बाबू को आत्महत्या के लिए उकसाने की आरोपी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता पी. पी. दिव्या की अग्रिम जमानत याचिका मंगलवार को खारिज कर दी।
थालास्सेरी के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के. टी. निसार अहमद ने कन्नूर जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष दिव्या की याचिका को खारिज करते हुए आदेश जारी किया। आदेश की विस्तृत जानकारी की प्रतीक्षा है।
दिव्या 14 अक्टूबर को कथित रूप से बिना आमंत्रण के बाबू के विदाई समारोह में शामिल हुई थीं और चेंगलाई में एक पेट्रोल पंप की मंजूरी में कई महीनों की देरी करने का आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की थी।
साथ ही दिव्या ने टिप्पणी की थी कि उन्होंने स्थानांतरण के दो दिन बाद ही इसकी मंजूरी दे दी थी। इससे यह संकेत मिलता है कि वह अचानक इस मंजूरी के पीछे के कारणों को जानती थीं।
इसके अगले दिन बाबू कन्नूर स्थित अपने आवास पर मृत पाए गए थे।
एडीएम को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में पुलिस द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किए जाने के बाद दिव्या ने 19 अक्टूबर को थालास्सेरी सत्र अदालत का रुख किया था।
बाबू के परिवार ने अदालत के आदेश का स्वागत किया है।
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबू की पत्नी मंजूषा ने कहा, ‘‘हमारे जीवन को बर्बाद करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाना चाहिए और हम न्याय सुनिश्चित करने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।’’
मंजूषा ने पथनमथिट्टा जिले के मलयालप्पुषा में अपने निवास पर संवाददाताओं से कहा, ‘‘मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है, लेकिन हम न्याय के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।’’
अपनी अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान दिव्या ने अदालत से कहा था कि एडीएम के विरुद्ध उनकी टिप्पणी उनके खिलाफ प्राप्त भ्रष्टाचार की शिकायतों पर आधारित थी।
दिव्या के वकील ने अदालत को यह भी बताया कि कन्नूर के जिलाधिकारी ने उन्हें बाबू के विदाई समारोह के बारे में बताया था और पूछा था कि क्या वह इसमें शामिल होंगी, जिसका उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया था।
दिव्या की दलीलों का विरोध करते हुए अभियोजन पक्ष ने कन्नूर जिलाधिकारी का बयान प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि दिव्या को समारोह में कभी आमंत्रित नहीं किया गया था और जिलाधिकारी ने उनसे अनुरोध किया था कि वह समारोह में भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगाएं।
बाबू के परिवार की ओर से पेश हुए वकील ने कहा था कि उन्होंने और अभियोजन पक्ष दोनों ने दिव्या की जमानत याचिका का विरोध किया था, खासकर तब जब एडीएम को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज होने के बाद माकपा ने उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष पद से हटा दिया था।
भाषा सुरभि