महाराष्ट्र चुनाव: परली में धनंजय मुंडे को मराठा मतदाताओं की एकजुटता का मुकाबला करना होगा
अमित संतोष
- 28 Oct 2024, 08:14 PM
- Updated: 08:14 PM
छत्रपति संभाजीनगर, 28 अक्टूबर (भाषा) महाराष्ट्र के कृषि मंत्री धनंजय मुंडे को परली विधानसभा क्षेत्र में मराठा मतदाताओं के एकजुट होने का प्रभावी ढंग से मुकाबला करना होगा। यह क्षेत्र दिवंगत गोपीनाथ मुंडे का गृहनगर है। दिलचस्प बात यह है कि दशकों बाद यहां से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं है।
महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुनाव 20 नवंबर को होंगे और मतों की गिनती तीन दिन बाद होगी।
महज चार महीने पहले, मराठा कारक की बीड लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार पंकजा मुंडे की मामूली मतों के अंतर से हार में एक भूमिका थी, जिसमें परली निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल है। पंकजा मुंडे, धनंजय की चचेरी बहन हैं।
सोयाबीन की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और बेरोजगारी जैसे मुद्दों से प्रभावित ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र परली में मराठा आरक्षण की भावना एक मजबूत कारक बनी हुई है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ मराठों में नाराजगी का मुकाबला करने के लिए धनंजय को ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) समुदाय का समर्थन सुनिश्चित करना होगा।
शरद पवार ने एक रणनीतिक कदम के तहत अजित पवार के करीबी एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) उम्मीदवार धनंजय मुंडे के खिलाफ राकांपा (शरद चंद्र पवार) के उम्मीदवार के तौर पर राजेसाहेब देशमुख को मैदान में उतारा है। परली दिवंगत गोपीनाथ मुंडे का गृहनगर है, जिन्हें मराठवाड़ा क्षेत्र में भाजपा के विस्तार का श्रेय दिया जाता है।
भाजपा द्वारा पंकजा को विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) बनाये जाने और धनंजय के पहले से ही राकांपा खेमे का एक सदस्य होने के कारण, इस बार परली निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा का कोई प्रतिनिधि नहीं होगा।
पंकजा मुंडे ने 2009 और 2014 के चुनावों में परली में दो जीत दर्ज की थी। 2019 में वह तीसरी बार जीत दर्ज करने से चूक गईं, जब धनंजय मुंडे ने उन्हें 30,701 मतों से हरा दिया।
पिछले पांच सालों में भाई-बहन की जोड़ी ने अपने मतभेद भुला दिए हैं। राकांपा (शरद चंद्र पवार) के उम्मीदवार देशमुख ने दावा किया कि धनंजय परली में किसानों के मुद्दों को हल करने में विफल रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोग डर और असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं।
हालांकि, धनंजय को लगता है कि पिछले कुछ महीनों में मराठा कारक की तीव्रता कम हुई है। उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि लोकसभा चुनाव में देखी गई जातिगत राजनीति एक अपवाद थी, और अतीत में बीड संसदीय क्षेत्र से विभिन्न जातियों के उम्मीदवारों की जीत का उल्लेख किया। उन्होंने मराठा आरक्षण नेता मनोज जरांगे का उल्लेख किए बिना स्वीकार किया कि मराठा आरक्षण आंदोलन से बीड अछूता नहीं है।
धनंजय ने लोकसभा चुनाव के नतीजों का विश्लेषण करते हुए कहा, ‘‘मराठा आरक्षण के लिए मेरी लड़ाई पर लोकसभा चुनाव के दौरान विचार नहीं किया गया। आरक्षण ही एकमात्र मुद्दा नहीं था। किसानों के बीच सीमित असंतोष सहित अन्य कारक भी हैं।’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘आम चुनाव के दौरान जो आरक्षण आंदोलन की तीव्रता थी, वह अब कम हो गई है।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या बीड जिले में किसानों द्वारा सबसे अधिक आत्महत्याएं की गईं, मंत्री ने अपने नेतृत्व वाले कृषि मंत्रालय द्वारा की गई विभिन्न पहलों को सूचीबद्ध किया।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने किसानों के लिए बीमा प्रीमियम का भुगतान किया है। मैंने यह भी मांग की है कि सोयाबीन तेल पर आयात शुल्क बढ़ाया जाए। सरकार ने किसानों से सोयाबीन खरीदने के लिए केंद्र भी शुरू किए हैं।’’
शरद पवार के नेतृत्व वाली राकांपा (शरद चंद्र पवार) को हाल के आम चुनावों में मिली बढ़त को बरकरार रखने का भरोसा है। राकांपा (शरद चंद्र पवार) के उम्मीदवार बजरंग सोनावणे ने बीड से पंकजा को लगभग 6,000 मतों के मामूली अंतर से हराया था।
सोनावणे के पक्ष में मराठा मतों का एकीकरण स्पष्ट है क्योंकि बीड संसदीय सीट के तहत छह विधानसभा क्षेत्रों में से तीन-तीन पर भाजपा और राकांपा (शरद चंद्र पवार) ने बढ़त हासिल की है।
देशमुख ने कहा कि यदि वह परली से चुने जाते हैं तो वह कानून का शासन स्थापित करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय व्यवसायी स्थानांतरित हो रहे हैं, क्योंकि फर्जी अपराध दर्ज हो रहे हैं।
परली विधानसभा क्षेत्र से पंकजा को मतों में बढ़त मिलने के बारे में पूछे जाने पर देशमुख ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग होते हैं।
उन्होंने दावा किया, ‘‘पंकजा मुंडे के काम और गोपीनाथ मुंडे की बेटी होने की सहानुभूति जैसे कारकों ने उन्हें लाभ पहुंचाया। इसके विपरीत, धनंजय मुंडे ने गोपीनाथ मुंडे को धोखा दिया। धनंजय ने कोई काम नहीं किया। किसान वर्षों से फसल बीमा के भुगतान का इंतजार कर रहे हैं।’’
परली निवासी चेतन सौंदले को लगता है कि मराठा आरक्षण मुद्दे का चुनावी नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। सौंदले ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज किया कि धनंजय आम लोगों के लिए सुलभ नहीं हैं और कहा कि बीड जिले के संरक्षक मंत्री होने के नाते, धनंजय मुंडे ने एक एमआईडीसी, एक सोयाबीन अनुसंधान केंद्र और एक कृषि महाविद्यालय को मंजूरी दी है, हालांकि इन निर्णयों के क्रियान्वयन का इंतजार है।
छत्रपति संभाजीनगर के एक पत्रकार एवं मूल रूप से परली के निवासी बिपिन देशपांडे को लगता है कि धनंजय को चुनावों में झटका लग सकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘राकांपा (शरद चंद्र पवार) उम्मीदवार देशमुख अंबाजोगाई क्षेत्र के करीब 40 गांवों में प्रभाव रखते हैं। एमवीए उम्मीदवार होने के नाते, वह परली शहर में महत्वपूर्ण वोट हासिल कर सकते हैं।’’
देशपांडे ने कहा कि महत्वपूर्ण बात यह है कि देशमुख मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े हुए हैं और उन्होंने जरांगे के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए जालना जिले के अंतरवाली सरती गांव का कई बार दौरा किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘धनंजय मुंडे की चुनावी सफलता महा विकास आघाडी के तीन घटकों के कार्यकर्ताओं को कुशलता से संभालने पर निर्भर करती है।’’
परली के निवासी अश्विन मोगरकर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि भाजपा कार्यकर्ता निराश हैं क्योंकि भाजपा ने 44 साल बाद कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है क्योंकि सीट महायुति सहयोगी राकांपा को आवंटित हो गई है। उन्होंने कहा कि परली मराठा आरक्षण विरोध और ‘‘जरांगे कारक’’ से अछूता नहीं रहेगा। उन्होंने कहा, ‘‘मराठा मुद्दा और भाजपा के निष्ठावान मतदाता परली के अगले विधायक को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।’’
भाषा अमित