देहरादून निवासी से तीन करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाला उप्र से गिरफ्तार
दीप्ति, रवि कांत
- 27 Oct 2024, 09:25 PM
- Updated: 09:25 PM
देहरादून, 27 अक्टूबर (भाषा) उत्तराखंड पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने रविवार को कथित रूप से 'डिजिटल अरेस्ट' कर एक व्यक्ति से तीन करोड़ रुपये से अधिक की ठगी करने वाले एक अपराधी को उत्तर प्रदेश के बहराइच से गिरफ्तार किया है।
एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह ने यहां रविवार को बताया कि कार्य बल की साइबर अपराध शाखा ने आरोपी मनोज (27) को बहराइच के सिलोटा रोड से गिरफ्तार किया, जिसने मई में व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए देहरादून निवासी पीड़ित व्यक्ति को 48 घंटे तक 'डिजिटल अरेस्ट' करके रखा था और उसे डरा-धमकाकर अपने खाते में तीन करोड़ रुपये से अधिक स्थानांतरित करवा लिए थे।
उन्होंने बताया कि आरोपी द्वारा धोखाधड़ी में प्रयुक्त किये जा रहे बैंक खाते के विरुद्ध देश भर के विभिन्न राज्यों में 76 शिकायतें दर्ज हैं तथा उस खाते में छह करोड़ से अधिक का संदिग्ध लेन-देन पाया गया है।
सिंह ने बताया कि राजपुर क्षेत्र के रहने वाले पीड़ित द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, 20 मई को उसके मोबाइल फोन पर एक कॉल आयी जिसमें उसे मुंबई हवाई अड्डे पर उसका एक पार्सल स्वापक नियंत्रण ब्यूरो द्वारा पकड़े जाने की जानकारी दी गयी। उसे बताया गया कि उसके पार्सल में कुछ आपत्तिजनक सामग्री जैसे पांच-छह पासपोर्ट और नशीले पदार्थ आदि हैं।
पीड़ित द्वारा ऐसा कोई पार्सल नहीं भेजे जाने की बात बताए जाने के बावजूद कॉल करने वाले ने कहा कि पार्सल पर उसका नाम है तो कार्रवाई उसके ही खिलाफ होगी।
स्वयं को ग्रेटर मुंबई पुलिस का बड़ा अफसर बताने वाले उस व्यक्ति ने पीड़ित को बताया कि उसके विरूद्ध मादक पदार्थों की तस्करी और धनशोधन का मामला दर्ज हो गया है जिसकी जांच के लिए उसे मुंबई आना होगा और संभवत: जेल भी जाना पड़ेगा।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उस व्यक्ति की बातें सुनकर वह भयभीत हो गया जिस पर उसने उसे बचाने के लिए अपने बड़े अफसरों से बात करने की बात कही।
उस व्यक्ति ने पीड़ित से कहा कि वह अब उससे व्हॉट्सऐप के माध्यम से वीडियो कॉल करेगा लेकिन इस बीच वह उसके अलावा किसी और से न बात करे और न उसकी मर्जी के बिना घर से बाहर निकले।
शिकायतकर्ता ने बताया कि वह व्यक्ति 20 मई से लेकर 22 मई तक लगातार उससे व्हॉट्सऐप वीडियो व वॉइस कॉल के माध्यम से जुड़ा रहा और तरह-तरह की बातें बता कर डराता रहा। शिकायत में कहा गया है कि उक्त व्यक्ति बीच-बीच में ऐसा प्रतीत करा रहा था कि वह उसके बारे में पुलिस के बड़े अफसरों से भी बात कर रहा है।
पीड़ित ने बताया कि इसके बाद उस व्यक्ति ने कहा कि अगर आपको मादक पदार्थों की तस्करी व धनशोधन के मुकदमे से बचना है तो अपने खाते में जमा पूरे पैसे की जांच करानी होगी और इसके लिए पैसे को उसके द्वारा बताए जा रहे खाते में डालना होगा। उस व्यक्ति ने पीड़ित को भरोसा दिलाया कि जांच के बाद पैसा उसे लौटा दिया जाएगा।
पीड़ित ने बताया कि भयभीत होकर उसने 21 मई को आरटीजीएस के माध्यम से दो करोड़ रूपये उस व्यक्ति के खाते में भेज दिए। इसके बाद, 22 मई को उसने अपने अन्य दो खातों में जमा एक करोड़ से अधिक रूपये भी उसी खाते में भेजे।
शिकायतकर्ता ने कहा कि तीन करोड़ बारह हजार 678 रूपये भेजने के बाद उसे अपने साथ धोखाधड़ी होने का अहसास हुआ। इस घटना से वह सदमे में आ गया और पुलिस के पास तुरंत शिकायत भी नहीं दर्ज करा पाया।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए साइबर अपराध पुलिस ने संबंधित बैंकों, सेवा प्रदाता कंपनी, मेटा और गूगल से डेटा लिया और फिर उसका विश्लेषण करते हुये तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य जुटाए। इसके बाद घटना में शामिल मुख्य आरोपी को चिन्हित करते हुए उसकी तलाश में कई स्थानों पर दबिश दी गयी।
उन्होंने बताया कि आरोपी अत्यंत शातिर था और लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था, लेकिन पुलिस टीम की मेहनत और तकनीकी संसाधनों के प्रयोग से उसे गिरफ्तार कर लिया गया। उसके कब्जे से घटना में प्रयुक्त सिम सहित मोबाइल हैंडसेट भी बरामद हुआ है जिसमें उसने शिकायतकर्ता से दो करोड़ रूपये स्थानांतरित करवाये थे ।
सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी द्वारा धोखाधड़ी में प्रयुक्त किये जा रहे बैंक खाते के विरुद्ध देश भर के विभिन्न राज्यों में 76 शिकायतें दर्ज हैं तथा उसमें छह करोड़ से अधिक का संदिग्ध लेन-देन पाया गया है।
भाषा
दीप्ति, रवि कांत