टकराव वाले दो बिंदुओं से सैनिकों की वापसी 28-29 अक्टूबर तक पूरी होने की संभावना : सेना के सूत्र
प्रशांत नोमान
- 25 Oct 2024, 11:58 PM
- Updated: 11:58 PM
नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में डेमचोक और डेपसांग मैदानी क्षेत्रों में टकराव वाले दो बिंदुओं से सैनिकों की वापसी शुरू कर दी है और यह प्रक्रिया 28-29 अक्टूबर तक पूरी होने की संभावना है। सेना के सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि समझौता केवल टकराव वाले इन दो बिंदुओं के लिए हुआ है तथा अन्य क्षेत्रों के लिए “बातचीत अब भी चल रही है।”
सूत्रों ने कहा कि सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टकराव वाले दोनों बिंदुओं पर गश्त शुरू होगी और दोनों पक्ष अपने-अपने सैनिकों को हटाकर अस्थायी ढांचों को नष्ट कर देंगे।
उन्होंने कहा कि अंतत: गश्त का स्तर अप्रैल 2020 से पहले के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है।
एक सूत्र ने बताया कि गश्त सशस्त्र कर्मियों द्वारा की जाएगी तथा ध्वस्त की जाने वाली संरचनाओं में अस्थायी शेड और टेंट शामिल हैं।
कुछ दिन पहले दोनों देशों के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के पास से सैनिकों की वापसी और गश्त को लेकर समझौता हुआ था जो चार साल से अधिक समय से जारी गतिरोध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता है।
सैन्य सूत्रों ने बताया कि समझौता रूपरेखा पर पहली बार राजनयिक स्तर पर सहमति बनी थी और फिर सैन्य स्तर की वार्ता हुई। उन्होंने कहा कि कोर कमांडर स्तर की बातचीत में समझौते के महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम हुआ।
सेना के सूत्रों ने बताया कि समझौते की रूपरेखा पर पहले राजनयिक स्तर पर “हस्ताक्षर” किए गए और फिर सैन्य स्तर की वार्ता हुई। उन्होंने बताया कि समझौते की बारीकियों पर कोर कमांडर स्तर की वार्ता में काम किया गया, जिस पर “सोमवार को हस्ताक्षर” किए गए।
दोनों पक्षों के बीच समझौतों का पालन करते हुए भारतीय सैनिकों ने इन क्षेत्रों से साजो-सामान वापस लाना शुरू कर दिया है।
यह तत्काल ज्ञात नहीं है कि इन दो टकराव बिंदुओं पर सैनिकों की वापसी पूरी होने के उपलक्ष्य में कोई प्रतीकात्मक कार्य किया जाएगा या नहीं, क्योंकि इन दोनों स्थानों पर प्रमुख अनसुलझे मुद्दे अब भी बने हुए हैं।
जून 2020 में गलवान घाटी में दोनों देशों के सैनिकों के बीच भीषण संघर्ष के बाद संबंधों में तनाव आ गया था। यह पिछले कुछ दशकों में दोनों पक्षों के बीच सबसे गंभीर सैन्य संघर्ष था।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 21 अक्टूबर को दिल्ली में संवाददाताओं से कहा था कि पिछले कुछ सप्ताह में हुई बातचीत के बाद समझौते को अंतिम रूप दिया गया और इससे 2020 में सामने आए मुद्दों का समाधान निकलेगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 23 अक्टूबर को रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन से इतर अपनी द्विपक्षीय बातचीत में पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास से सैनिकों की वापसी और गश्त को लेकर हुए समझौते का समर्थन किया था।
इस बीच उधमपुर में सेना की उत्तरी कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एम.वी. सुचिन्द्र कुमार ने शुक्रवार को कहा कि सैन्य और कूटनीतिक वार्ता से भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर गश्त करने पर सहमति बनी है, जिससे टकराव बिंदुओं से सैनिकों के पीछे हटने और 2020 में पैदा हुए मुद्दों के समाधान में मदद मिली।
उन्होंने कहा कि इन वार्ताओं के दौरान बनी सहमति में पारंपरिक क्षेत्रों में गश्त और चरागाहों तक पहुंच भी शामिल है।
कुमार ने लद्दाख में एलएसी पर टकराव बिंदुओं से सैनिकों के पीछे हटने से संबंधित एक सवाल के जवाब में कहा, ‘‘वहीं, आप जानते ही होंगे कि विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 21 अक्टूबर 2024 को अपने बयान में उल्लेख किया था कि पिछले कई हफ्तों से भारतीय और चीनी राजनयिक तथा सैन्य वार्ताकार विभिन्न मंचों पर निकट संपर्क में हैं।’’
कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इन चर्चाओं के परिणामस्वरूप, भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में एलएसी पर गश्त व्यवस्था पर एक सहमति बनी है, जिससे सैनिकों की (टकराव बिंदुओं से) वापसी और 2020 में उभरे मुद्दों का समाधान हुआ है।’’
भाषा प्रशांत