यूक्रेन, पश्चिम एशिया में संघर्ष चिंता का विषय, शांति के लिए भारत हर योगदान को तैयार: मोदी
नेत्रपाल प्रशांत
- 25 Oct 2024, 10:23 PM
- Updated: 10:23 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि यूक्रेन और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष चिंता का विषय है और भारत शांति बहाली के लिए हरसंभव योगदान देने को तैयार है।
उनकी टिप्पणी जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज के साथ हुई बातचीत के बाद आई, जिसमें उन्होंने भारत से यूक्रेन में लंबे समय से जारी संघर्ष का राजनीतिक समाधान खोजने में योगदान देने का आह्वान किया।
मोदी ने जर्मन चांसलर के साथ सातवें अंतर-सरकारी परामर्श (आईजीसी) के बाद कहा, ‘‘यूक्रेन और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष हम दोनों के लिए चिंता के विषय हैं। भारत का हमेशा मत रहा है कि युद्ध से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता और शांति की बहाली के लिए वह हरसंभव योगदान देने को तैयार है।’’
आईजीसी में, दोनों पक्षों ने 18 समझौतों और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए जिनमें आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता संधि और खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान तथा पारस्परिक सुरक्षा पर एक समझौता भी शामिल है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में बढ़ता सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास को दर्शाता है। खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर समझौता इस दिशा में एक नया कदम है। आज हस्ताक्षरित पारस्परिक कानूनी सहायता संधि आतंकवाद तथा अलगाववादी तत्वों से निपटने के हमारे संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करेगी।’’
मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी हरित एवं सतत विकास के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता पर लगातार काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आज हम अपनी हरित और सतत विकास भागीदारी को आगे बढ़ाते हुए हरित नगरीय गतिशीलता साझेदारी के दूसरे चरण पर सहमत हुए हैं। इसके अलावा, हरित हाइड्रोजन प्रारूप की भी शुरुआत की गई है।’’
मोदी ने कहा कि वह और शोल्ज इस बात पर सहमत हैं कि 20वीं सदी में स्थापित वैश्विक मंच 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित विभिन्न बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की आवश्यकता है।’’
जर्मन चांसलर का शनिवार को गोवा जाने का कार्यक्रम है जहां जर्मनी के नौसैनिक जहाजों ने हिंद महासागर में समुद्री साझेदारी अभ्यास में भागीदारी की है।
द्विपक्षीय वार्ता में छह उन्नत पनडुब्बियों के निर्माण की भारत की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स कंपनी भारतीय नौसेना से पनडुब्बी सौदा हासिल करने का प्रयास कर रही है जिसमें स्पेन की कंपनी नवंतिया भी प्रतिस्पर्धी है।
शोल्ज ने जोर देकर कहा कि जर्मनी को अधिक कुशल भारतीयों की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ‘‘जर्मन श्रम बाजार में प्रतिभा का स्वागत है।’’ शोल्ज ने कहा कि हालांकि जर्मनी अनियमित प्रवासन को कम करने के प्रयासों में लगा है, लेकिन कुशल श्रमिकों के लिए इसके द्वार खुले हैं।
मोदी ने कहा कि लोगों से लोगों का संपर्क भारत-जर्मनी संबंधों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज, हमने कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा में एक साथ काम करने का फैसला किया है। आईआईटी-चेन्नई और ड्रेसडेन विश्वविद्यालय के बीच एक समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं, जो हमारे छात्रों को दोहरे डिग्री कार्यक्रम का लाभ उठाने की अनुमति देगा।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का युवा प्रतिभा समूह जर्मनी की प्रगति और समृद्धि में योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम भारत के लिए जर्मनी द्वारा जारी कुशल श्रम नीति का स्वागत करते हैं। मुझे विश्वास है कि हमारी युवा प्रतिभा को जर्मनी के विकास में योगदान करने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।’’
इससे पहले, आईजीसी की शुरुआत करते हुए मोदी ने कहा कि भारत और जर्मनी की रणनीतिक साझेदारी ऐसे समय में मजबूत सहारे के रूप में उभरी जब दुनिया तनाव, संघर्ष और अनिश्चितता का सामना कर रही है।
मोदी ने कहा कि भारत-जर्मनी के संबंध आदान-प्रदान के संबंध नहीं, बल्कि दो सक्षम और मजबूत लोकतंत्रों की परिवर्तनकारी साझेदारी है।
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया तनाव, संघर्ष और अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कानून के शासन और नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। इस समय में, भारत और जर्मनी के बीच रणनीतिक साझेदारी एक मजबूत सहारे के रूप में उभरी है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह शोल्ज की भारत की तीसरी यात्रा है जो भारत तथा जर्मनी के बीच दोस्ती के ‘ट्रिपल जश्न’ को चिह्नित करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘2022 में बर्लिन में पिछले आईजीसी में हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिए थे। दो वर्षों में, हमारे सामरिक संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों में उत्साहजनक प्रगति हुई है। रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, हरित और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ रहा है जो आपसी विश्वास के प्रतीक बन गए हैं।’’
प्रधानमंत्री ने जर्मनी द्वारा घोषित ‘फोकस ऑन इंडिया’ रणनीति का भी स्वागत किया।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि अपनी साझेदारी को विस्तार देने और बढ़ाने के लिए हम कई नयी और महत्वपूर्ण पहल कर रहे हैं और ‘संपूर्ण सरकार’ से पूरे राष्ट्र के दृष्टिकोण की ओर बढ़ रहे हैं।’’
मोदी और शोल्ज ने जर्मन बिजनेस 2024 के 18वें एशिया-प्रशांत सम्मेलन को भी संबोधित किया, जो 12 साल के अंतराल के बाद भारत में आयोजित किया गया और इसमें 650 से अधिक व्यापारिक नेताओं ने भाग लिया।
आईजीसी एक द्विवार्षिक कवायद है और पिछली बार इसका आयोजन मई 2022 में बर्लिन में किया गया था। प्रधानमंत्री मोदी और जर्मन चांसलर के बीच बैठक में जर्मन-भारतीय हरित और सतत विकास साझेदारी (जीएसडीपी) पर सहमति बनी थी।
वर्ष 2011 में आईजीसी की शुरुआत की गई थी। इसमें सहयोग की व्यापक समीक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच जुड़ाव के नए क्षेत्रों की पहचान की जाती है।
भाषा नेत्रपाल