आबकारी मामला : न्यायालय ने व्यवसायी अमनदीप सिंह ढल को जमानत दी
सिम्मी नरेश
- 25 Oct 2024, 04:10 PM
- Updated: 04:10 PM
नयी दिल्ली, 25 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में व्यवसायी अमनदीप सिंह ढल को शुक्रवार को जमानत देते हुए कहा कि वह एक वर्ष से अधिक समय से जेल में हैं और मुकदमा जल्द समाप्त होने की संभावना नहीं है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को करीब 300 गवाहों से पूछताछ करनी है और सुनवाई अभी शुरू नहीं हुई है।
पीठ ने कहा कि ढल को और अधिक समय तक हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा। ढल को अधीनस्थ अदालत द्वारा लगाए गए नियमों और शर्तों के अधीन राहत प्रदान की गई।
पीठ ने सुनवाई की शुरुआत में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के वकील से कहा कि एजेंसी का ध्यान दोषसिद्धि पर केंद्रित होना चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘आपको दोषसिद्धि दर पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। गिरफ्तारियों की संख्या के बजाय गवाहों की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।’’
पीठ ने ढल को प्रत्येक सुनवाई पर अधीनस्थ अदालत के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया।
ढल ने उच्च न्यायालय के चार जून के उस फैसले को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था, जिसमें उन्हें मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
ढल को इस मामले में सीबीआई ने पिछले साल अप्रैल में गिरफ्तार किया था।
ढल के अलावा मामले के अन्य आरोपियों-आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल, भारत राष्ट्र समिति की नेता के कविता, ‘आप’ नेता मनीष सिसोदिया, ‘आप’ सांसद संजय सिंह, ‘आप’ के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर, हैदराबाद के व्यवसायी अभिषेक बोइनपल्ली एवं अरुण पिल्लई तथा शराब व्यवसायी समीर महेंद्रू को भी मामले में जमानत दी गई है।
वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के लोकसभा सदस्य मगुंटा श्रीनिवासुलु रेड्डी के बेटे राघव मगुंटा रेड्डी, व्यवसायी दिनेश अरोड़ा और पी सरथ चंद्र रेड्डी इस मामले में सरकारी गवाह बन गए थे।
सरकारी गवाह अपराध स्वीकार करता है और मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ गवाही देने पर सहमत होता है।
ढल कथित घोटाले से जुड़े उन अलग-अलग मामलों में आरोपी हैं जिनकी जांच सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, ढल ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर कथित तौर पर साजिश रची और वह आबकारी नीति तैयार करने तथा आम आदमी पार्टी (आप) को रिश्वत देने एवं विभिन्न माध्यमों से ‘साउथ ग्रुप’ द्वारा इसकी पुनर्प्राप्ति में ‘‘सक्रिय रूप से’’ शामिल थे।
सीबीआई और ईडी के अनुसार, आबकारी नीति में संशोधन के दौरान अनियमितताएं की गईं और लाइसेंस धारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
दिल्ली सरकार ने 17 नवंबर, 2021 को नीति लागू की थी और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच सितंबर 2022 के अंत में इसे रद्द कर दिया था।
भाषा
सिम्मी