खालिस्तानियों के खिलाफ कार्रवाई न करना आतंकवाद को बढ़ावा देने के समान: राजनयिक संजय वर्मा
सुभाष माधव
- 24 Oct 2024, 08:41 PM
- Updated: 08:41 PM
(विजय जोशी)
नयी दिल्ली, 24 अक्टूबर (भाषा) कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा खालिस्तानी तत्वों को दिए जा रहे समर्थन को लेकर उनपर सीधा हमला करते हुए, ओटावा से वापस बुलाये गए राजनयिक संजय वर्मा ने कहा है कि अलगाववादी अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई न करना इन्हें प्रोत्साहित करने के समान है।
दोनों देशों के बीच संबंधों में आई कड़वाहट आने पर, नयी दिल्ली लौटने के कुछ दिनों बाद वर्मा ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा कि ट्रूडो राजनीतिक लाभ के लिए खालिस्तानियों को बढ़ावा दे रहे हैं।
वर्मा से पूछा गया कि क्या भारत ने कनाडा के साथ इस बात के सबूत साझा किए हैं कि ट्रूडो और उनकी सरकार खालिस्तानी आतंकवाद को बढ़ावा दे रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रोत्साहन दोनों तरह से हो सकता है, एक तो उन्हें सक्रिय रूप से कुछ करने के लिए कहना और दूसरा यह कि आप चुप्पी साधे रहें। इसतरह, यदि कोई अपराधियों, आतंकवादियों, चरमपंथियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है, तो यह प्रोत्साहन देने के समान है।’’
राजनयिक ने कहा, ‘‘इसलिए, वहां यह प्रोत्साहन काफी दिख रहा है, चाहे वह वोट बैंक के लिए हो या किसी अन्य राजनीतिक कारण से। इस प्रोत्साहन के कारण, उनका (खालिस्तानियों का) हौसला बढ़ गया है और वे लगातार भारत के हितों पर हमला कर रहे हैं तथा हमें नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या ट्रूडो की भारत के खिलाफ कार्रवाई अगले साल कनाडा में होने वाले चुनावों से पहले उनकी घटती लोकप्रियता से ध्यान भटकाने के मकसद से की गई है, वर्मा ने कहा, ‘‘मैं कनाडा की घरेलू नीति में नहीं पड़ूंगा। यह मेरा काम नहीं है। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए। मैंने जो सर्वेक्षण देखे हैं, जो (कनाडा की) मीडिया में प्रकाशित हुए हैं, उनमें कहा गया है कि श्रीमान ट्रूडो की लोकप्रियता घट रही है।’’
वर्मा ने कहा, ‘‘इस समय ट्रूडो की रेटिंग मुख्य विपक्षी पार्टी और उसके नेता से काफी नीचे चली गई है। इसलिए, कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है और यह मेरी राय नहीं है कि अगर अभी चुनाव हुए तो उनके लिए सत्ता में बने रहना बहुत मुश्किल हो सकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन ये सिर्फ सर्वेक्षण हैं और हम जानते हैं कि ओपिनयन पोल कभी-कभी अच्छे होते हैं, तो कभी उतने अच्छे नहीं होते। इसलिए, कनाडा में क्या होना है, इसका फैसला चुनावों के दौरान कनाडा के लोग करेंगे। मैं वहां (मुद्दे पर) जाना या टिप्पणी करना पसंद नहीं करूंगा।’’
वर्मा ने कहा कि उनका विश्लेषण यह है कि कनाडा से बाहर होने वाली ज्यादातर भारत विरोधी गतिविधियां केवल घरेलू राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए हैं।
उन्होंने कहा कि खालिस्तानियों द्वारा भारत को बदनाम करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
वर्मा ने कहा, ‘‘लेकिन मैं इसके लिए पूरे कनाडा को दोषी नहीं ठहराऊंगा। कनाडाई अच्छे मित्र हैं, वे निष्पक्ष लोग हैं, बहुत विनम्र हैं। इसलिए, एक देश के रूप में कनाडा एक खूबसूरत जगह है, लेकिन मैं कनाडा में खालिस्तानी आतंकवादियों एवं चरमपंथियों और उनके राजनीतिक समर्थकों के लिए ऐसा नहीं कह सकता।’’
दोनों देशों के बीच संबंधों में अप्रत्याशित गिरावट आने के बाद, कनाडा ने हरदीप सिंह निज्जर की जून 2023 में हुई हत्या के सिलसिले में 13 अक्टूबर को कहा था कि वर्मा को ‘‘जांच के तहत निगरानी की श्रेणी में’’ रखा गया है।
निज्जर एक कनाडाई नागरिक है जिसे भारत द्वारा खालिस्तानी आतंकवादी घोषित किया गया था। कनाडा द्वारा आगे की कार्रवाई करने से पहले, नयी दिल्ली ने वर्मा और उन पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया, जिन्हें वहां निगरानी की श्रेणी में रखा गया है।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) से स्नातक और परमाणु वैज्ञानिक वर्मा इससे पहले जापान और सूडान में भारत के राजदूत रह चुके हैं।
भाषा सुभाष