न्यायालय ने पर्यावरण संबंधी कानून को ‘शक्तिहीन’ बनाने के लिए केंद्र की खिंचाई की
शफीक अविनाश
- 23 Oct 2024, 10:21 PM
- Updated: 10:21 PM
नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पर्यावरण संबंधी कानून को ‘शक्तिहीन’ बनाने के लिए बुधवार को केंद्र की खिंचाई की और कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहने का मौलिक अधिकार है।
न्यायालय ने कहा कि पराली जलाने पर जुर्माने से संबंधित वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) अधिनियम के प्रावधानों को लागू नहीं किया जा रहा है।
न्यायमूर्ति अभय एस. ओका, न्यायमूर्ति अहसनुद्दीन अमानुल्ला और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने पराली जलाने के मामलों में अदालती आदेशों को लागू नहीं करने के लिए पंजाब और हरियाणा सरकारों की भी खिंचाई की।
पीठ ने कहा, ‘‘भारत सरकार और राज्य सरकारों को यह याद दिलाने का समय आ गया है कि प्रदूषण मुक्त वातावरण में रहना देश के प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘ये मौजूदा कानूनों को लागू करने के मामले नहीं हैं, बल्कि ये भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकारों के घोर उल्लंघन के मामले हैं।’’
पीठ ने कहा कि पंजाब में अब तक पराली जलाने के 1,000 से अधिक और हरियाणा में 400 से अधिक मामले सामने आए हैं।
शीर्ष अदालत 1985 में एम.सी मेहता द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
पीठ ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के मामलों में अदालत को कठोर आदेश पारित करने की जरूरत है, जिसे कई लोग पसंद नहीं करेंगे।
इससे पहले, पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग अधिनियम, 2021 (सीएक्यूएम अधनियिम) को वायु प्रदूषण पर अंकुश के लिए आवश्यक व्यवस्था किए बिना ही लागू कर दिया गया।
केंद्र की ओर पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा किसीएक्यूएम अधिनियम की पराली जलाने के लिए जुर्माने से संबंधित धारा 15 के तहत जुर्माने पर दिशानिर्देश 10 दिन में जारी कर दिए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि एक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा और कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
भाटी ने बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने पंजाब और हरियाणा के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा कई राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए।
पीठ ने सीएक्यूएम से पूछा कि आपके नोटिस को कौन गंभीरता से ले रहा है, क्योंकि कानून के तहत इसकी प्रक्रिया का प्रावधान नहीं है।
पीठ ने कहा, ‘‘कृपया सीएक्यूएम के अपने अध्यक्ष से कहें कि इन अधिकारियों को बचाने का प्रयास नहीं करें। हम जानते हैं कि जमीनी स्तर पर क्या हो रहा है।’’
भाटी ने कहा कि पंजाब के अमृतसर, फिरोजपुर, पटियाला, संगरूर, तरन तारन जैसे कई जिलों में पराली जलाने की 1,000 से अधिक घटनाएं हुई हैं।
शीर्ष अदालत ने 16 अक्टूबर को पराली जलाने के दोषी पाए गए उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाने को लेकर पंजाब और हरियाणा सरकारों की खिंचाई की थी और राज्य के मुख्य सचिवों को स्पष्टीकरण के लिए 23 अक्टूबर को पेश होने को कहा था।
शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक के संबंध में सीएक्यूएम की ओर से जारी निर्देशों को लागू करने के लिए पंजाब और हरियाणा सरकारों द्वारा कोई कदम नहीं उठाए जाने को लेकर नाखुशी जताई है।
भाषा
शफीक