प्रौद्योगिकियों का हथियार के रूप में इस्तेमाल की संभावना से निपटने को तैयार रहना होगा : राजनाथ
पारुल रंजन
- 19 Oct 2024, 08:27 PM
- Updated: 08:27 PM
नयी दिल्ली, 19 अक्टूबर (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सैन्य अधिकारियों से लगातार बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में “रणनीतिक लाभ” हासिल करने के लिए समीक्षात्मक चिंतन करने का शनिवार को आह्वान किया और कहा कि दुश्मन के तकनीकी उपकरणों तथा प्रौद्योगिकियों का“हथियार” के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत है।
दिल्ली में राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज (एनडीसी) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राजनाथ ने कहा, “ड्रोन और स्वचालित वाहन से लेकर कृत्रिम मेधा (आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस या एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग तक, आधुनिक युद्ध को आकार देने वाली प्रौद्योगिकियां बहुत तेज गति से विकसित हो रही हैं। हमारे अधिकारियों को इन प्रौद्योगिकियों को समझना चाहिए और उनका इस्तेमाल करने में सक्षम बनना चाहिए।”
रक्षा मंत्री ने अधिकारियों ने रणनीतिक विचारक बनने का आग्रह किया, जो “भविष्य की लड़ाइयों का पूर्वानुमान लगाने”, वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में होने वाले बदलावों को समझने और बुद्धिमत्ता एवं सहानुभूति दोनों के साथ नेतृत्व करने की क्षमता रखते हों।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे भूराजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक सुरक्षा गठबंधनों की जटिलताओं जैसे विषयों पर अच्छी पकड़ रखें, क्योंकि उनके द्वारा लिए गए फैसलों के “युद्ध के मैदान से इतर” कूटनीति, अर्थशास्त्र और अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में भी दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।
रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, राजनाथ ने अधिकारियों से समीक्षात्मक चिंतन करने, अप्रत्याशित परिस्थितियों के अनुकूल ढलने और तकनीक क्षेत्र में होने वाले नवीनतम आविष्कारों का लाभ उठाने का आह्वान किया, ताकि “वर्तनमान के लगातार बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में रणनीतिक लाभ” हासिल किया जा सके।
उन्होंने दुश्मन द्वारा उन तकनीकी उपकरणों और प्रौद्योगिकियों का “हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं” से निपटने के लिए तैयार रहने की जरूरत को रेखांकित किया, जिनका लोग रोजर्मरा के जीवन में उपयोग करते हैं।
राजनाथ ने कहा, “यह ख्याल भर कि हमारे विरोधी हमारे उपकरणों का दुरुपयोग कर रहे हैं, हमें इस बात की याद दिलाता है कि हमें इन खतरों से निपटने के लिए कितनी तत्परता से तैयारी करनी चाहिए। एनडीसी जैसे संस्थानों को अपना पाठ्यक्रम इस तरह से तैयार करना चाहिए कि न केवल उसमें ऐसे अपरंपरागत युद्ध पर ‘केस स्टडी’ शामिल की जाए, बल्कि रणनीतिक नवाचार को भी बढ़ावा दिया जाए।”
उन्होंने कहा कि लगातार बदलती चुनौतियों के बीच “पूर्वानुमान लगाने, अनुकूलन करने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता उनका सामना करने की हमारी तत्परता को परिभाषित करेगी।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि आज युद्ध “पारंपरिक युद्ध मैदान से आगे निकल गया है” और बहु-क्षेत्रीय परिवेश में लड़ा जाता है, जहां साइबर, अंतरिक्ष और सूचना युद्ध पारंपरिक अभियानों की तरह ही “महत्वपूर्ण” हैं।
उन्होंने कहा, “साइबर हमले, दुष्प्रचार अभियान और आर्थिक युद्ध ऐसे हथियार बन गए हैं, जो बिना एक भी गोली चलाए पूरे देश को अस्थिर कर सकते हैं। सैन्य अधिकारियों के पास जटिल समस्याओं का विश्लेषण करने और नये समाधान सुझाने की क्षमता होनी चाहिए।”
राजनाथ ने 62वें एनडीसी पाठ्यक्रम (2022 बैच) के एमफिल दीक्षांत समारोह में तकनीक के क्षेत्र में हो रही तीव्र प्रगति को “सबसे महत्वपूर्ण शक्ति” बताया, जो भविष्य के लिए तैयार सेना विकसित करने में सहायक है।
उन्होंने रक्षा अधिकारियों से इस बात का गहन विश्लेषण करने को कहा कि एआई जैसी विशिष्ट तकनीकों का सर्वोत्तम लाभ कैसे उठाया जाए, जिनमें सैन्य अभियानों में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता है।
रक्षा मंत्री ने “एआई द्वारा लिए जाने वाले फैसलों की सीमा तय करने" की आवश्यकता पर जोर देते हुए मानवीय हस्तक्षेप के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि फैसले लेने की प्रक्रिया में एआई पर बढ़ती निर्भरता जवाबदेही और “अनपेक्षित परिणामों की संभावनाओं” को लेकर चिंताएं पैदा कर सकती है।
मशीनों को किस हद तक “जीवन-मृत्यु” का फैसला लेना चाहिए? सैन्य अधिकारियों के सामने आने वाली इस नैतिक दुविधा पर राजनाथ ने कहा कि नैतिकता, दर्शन और सैन्य इतिहास के संबंध में अकादमिक शिक्षा अधिकारियों को संवेदनशील विषयों को संबोधित करने और सही निर्णय लेने के उपाय सुझाएगी।
उन्होंने भावी अधिकारियों को मौजूदा समय के युद्ध की चुनौतियों से निपटने की “नैतिक रूपरेखा” प्रदान करने में एनडीसी जैसे रक्षा शिक्षण संस्थानों की अहम भूमिका को रेखांकित किया।
रक्षा मंत्री ने तकनीकी रूप से उन्नत और मजबूत सेना तैयार करने के सरकार के संकल्प का भी जिक्र किया, जो उभरते खतरों का जवाब देने और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम होगी।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि सशस्त्र बल भविष्य के लिए तैयार रहें और एनडीसी जैसे संस्थान सैन्य अधिकारियों के दृष्टिकोण को आकार देने तथा उन्हें आधुनिक युद्ध की जटिलताओं से निपटने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राजनाथ ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों का पाठ्यक्रम “गतिशील और अनुकूलनशील बना रहना चाहिए”, ताकि संबंधित क्षेत्र में सक्रिय लोगों के लिए इसकी प्रासंगिकता सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने आधुनिक युद्ध की चुनौतियों, नैतिक दुविधाओं और रणनीतिक नेतृत्व को न केवल चिंतन का विषय बताया, बल्कि इन्हें वह “नींव” करार दिया, जिस पर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का भविष्य टिका होगा।
राजनाथ ने कहा कि सीखना एक सतत प्रक्रिया होनी चाहिए, जो किसी पाठ्यक्रम की समाप्ति तक सीमित न हो। उन्होंने एनडीसी की पहुंच और प्रभाव बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण विषयों पर छोटे ऑनलाइन पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया।
रक्षा मंत्री ने कहा, “इससे अधिकारियों को उनकी भौगोलिक तैनाती या समय संबंधी सीमाओं से परे जाकर ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान द्वारा प्रदान किए जाने वाले ज्ञान और विशेषज्ञता का लाभ हासिल करने का मौका मिल सकेगा।”
उन्होंने एनडीसी के व्यापक और सुस्थापित पूर्व छात्र नेटवर्क को एक ऐसा अप्रयुक्त संसाधन बताया, जो इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
समारोह में रक्षा सचिव आरके सिंह, एनडीसी के कमांडेंट एयर मार्शल हरदीप बैंस, मद्रास विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर एस एलुमलाई, रक्षा मंत्रालय के विभिन्न वरिष्ठ अधिकारी और एनडीसी के संकाय सदस्य मौजूद थे।
भाषा पारुल