नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए संविधान के तहत सांस्कृतिक अधिकारों का अतिक्रमण नहीं करती: न्यायालय
वैभव अविनाश
- 17 Oct 2024, 10:18 PM
- Updated: 10:18 PM
नयी दिल्ली, 17 अक्टूबर (भाषा) नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखते हुए भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसी राज्य में विभिन्न जातीय समूहों की उपस्थिति मात्र ही किसी की संस्कृति के संरक्षण के लिए संविधान में प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
प्रधान न्यायाधीश ने संविधान के अनुच्छेद 29 (1) का जिक्र किया जिसमें कहा गया है, ‘‘भारत के किसी राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग में निवास करने वाले नागरिकों के किसी भी वर्ग को अपनी विशिष्ट भाषा, लिपि या संस्कृति को संरक्षित करने का अधिकार है।’’
बहुमत के निर्णय से सहमत प्रधान न्यायाधीश ने खुद फैसला लिखते हुए याचिकाकर्ताओं के इस दावे को खारिज कर दिया कि धारा 6ए अनुच्छेद 29 का उल्लंघन करती है, क्योंकि यह बांग्लादेश से आए प्रवासियों को, जिनकी संस्कृति अलग है, असम में सामान्य निवासी बनने तथा नागरिकता प्राप्त करने की अनुमति देती है, जो बदले में असमिया संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रयास करने वालों के अधिकार का उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि अनेक संवैधानिक और विधायी प्रावधान असम की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘असम के नागरिकों के सांस्कृतिक और भाषाई हितों का संवैधानिक तथा वैधानिक प्रावधानों द्वारा संरक्षण किया जाता है। इस प्रकार नागरिकता अधिनियम की धारा 6ए संविधान के अनुच्छेद 29 (1) का उल्लंघन नहीं करती।’’
पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल रहे। पीठ ने धारा 6ए की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाने वाली 17 याचिकाओं पर अपना आदेश सुनाया।
इस धारा को असम समझौते के तहत आने वाले लोगों की नागरिकता के मुद्दे से निपटने के लिए एक विशेष प्रावधान के रूप में नागरिकता अधिनियम में शामिल किया गया था।
इसमें कहा गया है कि जो लोग 1985 में संशोधित नागरिकता अधिनियम के तहत 1 जनवरी, 1966 को या इसके बाद और 25 मार्च, 1971 से पहले बांग्लादेश सहित निर्दिष्ट क्षेत्रों से असम आए थे और तब से इस पूर्वोत्तर राज्य में रह रहे हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए धारा 18 के तहत पंजीकरण कराना होगा।
परिणामस्वरूप, प्रावधान में प्रवासियों, विशेष रूप से बांग्लादेश से आकर असम में रहने वाले लोगों को नागरिकता देने की ‘कट-ऑफ’ तारीख 25 मार्च, 1971 तय की गई।
भाषा वैभव