भारतीय समस्याओं का भारतीय समाधान खोजने की जरूरत है : एनसीपीसीआर अध्यक्ष
गोला नरेश
- 16 Oct 2024, 01:36 PM
- Updated: 01:36 PM
(उज्मी अतहर)
नयी दिल्ली, 16 अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने बच्चों के मुद्दों को हल करने के लिए ‘‘भारतीय समस्याओं का भारतीय समाधान खोजने और यूरोपीय मॉडल का पालन करने नहीं करने’’ की आवश्यकता पर जोर दिया।
उनका मानना है कि यह सिद्धांत शीर्ष बाल अधिकार निकाय के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उनकी सबसे बड़ी चुनौती रहा है। उनका कार्यकाल बुधवार को पूरा हो रहा है।
कानूननो ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उनकी प्रमुख चुनौतियों में से एक मौजूदा बाल कल्याण प्रणालियों को भारतीय संदर्भ के अनुरूप अंगीकार करना था।
कानूनगो ने भारत में यूरोपीय मॉडल अपनाने की आलोचना की और कहा, ‘‘यूरोप में अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रह रहे बच्चों को विस्तारित परिवार माना जाता है। लेकिन हमारी संस्कृति में हम दादा-दादी या नाना-नानी को परिवार का हिस्सा मानते हैं। चुनौती ऐसी प्रणालियों को भारतीय संदर्भ में ढालने और इन रिश्तों को कानूनी मान्यता देने की थी।’’
उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व में एनसीपीसीआर ने परिवार केंद्रित दृष्टिकोण लागू किया जिससे उन्हें लगता है कि कई समस्याएं प्रभावी रूप से हल हुईं।
लावारिस बच्चों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यूरोप में ऐसे बच्चों को अक्सर बाल देखभाल संस्थानों में रखा जाता है। हालांकि, भारत में यह पद्धति हमेशा उचित नहीं होती है।
कानूनगो ने कहा, ‘‘हमने सर्वेक्षण किए और लावारिस बच्चों को उनकी परिवार की स्थिति के आधार पर वर्गीकृत किया। बहुत कम...पांच प्रतिशत से भी कम बच्चों को बाल गृहों में रखने की आवश्यकता थी। बाकी के लिए हमने परिवारों को सशक्त बनाने पर ध्यान केंद्रित किया।’’
उन्होंने कहा कि इस समग्र दृष्टिकोण का उद्देश्य न केवल बच्चे बल्कि पूरे परिवार का पुनर्वास करना है।
आयोग की सफलता के बारे में कानूनगो ने कहा, ‘‘एनसीपीसीआर के तहत 37 योजनाएं हैं और राज्य स्तरीय योजनाओं के साथ इनकी संख्या बढ़कर 49 हो जाती है। हमने इन सभी योजनाओं को मानक संचालन प्रक्रिया में एकीकृत किया है। मेरा कार्यकाल पूरा होने पर मुझे यह जानकर संतुष्टि महसूस हो रही है कि हमारे द्वारा लागू किए गए परिवार-केंद्रित मॉडल के तहत 26,000 बच्चों का पुनर्वास किया गया है। मेरा मानना है कि यह संख्या बढ़ेगी और एक दिन भारत में एक भी बच्चा लावारिस नहीं होगा।’’
एनसीपीसीआर अध्यक्ष ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने बच्चों को अनुचित सामग्री देखने से रोकने के लिए ओटीटी मंचों पर नियंत्रण लगाने पर भी ध्यान केंद्रित किया।
उन्होंने इन मंचों की कानूनी जिम्मेदारियों पर जोर देते हुए कहा, ‘‘अगर कोई जानबूझकर बच्चों को अश्लील सामग्री देखने की अनुमति देता है तो उसे भारतीय कानूनों के तहत जेल भेजा जा सकता है। हमने ओटीटी मंचों को अकाउंटधारकों को स्पष्ट वैधानिक चेतावनी दिखाने के लिए कहा है कि अगर कोई बच्चा ऐसी सामग्री देखने के लिए उनके अकाउंट का इस्तेमाल करता है तो उन पर पोक्सो तथा किशोर न्याय अधिनियम के तहत आरोप लगाए जा सकते हैं।’’
भाषा
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