उच्चतम न्यायालय भवन का विस्तार न्याय के लिए क्षमता निर्माण का विस्तार: प्रधान न्यायाधीश
वैभव माधव
- 14 Oct 2024, 10:14 PM
- Updated: 10:14 PM
नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय परिसर का विस्तार नागरिकों के लिहाज से न्याय के लिए क्षमता निर्माण के अलावा न्याय के सिद्धांतों एवं कानून व्यवस्था को लेकर सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रधान न्यायाधीश ने उच्चतम न्यायालय के विस्तार के लिए आयोजित समारोह के दौरान कहा कि यह जगह का विस्तार नहीं बल्कि समयबद्ध और गरिमापूर्ण तरीके से न्याय देने की क्षमताओं का विस्तार करना है।
इस अवसर पर न्यायमूर्ति बी आर गवई ने परियोजना के लिए राशि आवंटित करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया।
उन्होंने कहा, ‘‘आज हम हमारी न्यायप्रणाली के भविष्य की आधारशिला रख रहे हैं। एक ऐसा भविष्य जो प्रगति, सुलभता और आधुनिकता का वादा करता है। जैसे-जैसे राष्ट्र विकसित होता है, वैसे-वैसे हमारी कानूनी प्रणाली के सामने आने वाली चुनौतियां भी बढ़ती हैं।’’
प्रधान न्यायाधीश के अलावा, केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल, केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी आर गवई ने भी सभा को संबोधित किया।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि शीर्ष अदालत का विस्तार बढ़ते मामलों के बोझ, नयी न्यायिक शाखाओं और न्यायाधीशों, वकीलों तथा नागरिकों की जरूरतों को देखते हुए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मूल संरचना ऐसी ही रहेगी, वहीं परिसर का अन्यत्र विस्तार नयी आधुनिक सुविधाओं का मार्ग प्रशस्त करेगा।
मेघवाल ने इस अवसर पर कहा कि उच्चतम न्यायालय के भवन का प्रस्तावित विस्तार, नया संसद भवन और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना कार्यपालिका, विधायिका तथा न्यायपालिका को बेहतर अवसंरचना प्रदान करने के प्रयासों का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय भवन विस्तार परियोजना को केंद्रीय लोक निर्माण विभाग द्वारा 795 करोड़ रुपये की लागत से अगले पांच साल में दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह परियोजना न्यायपालिका के लिए ‘कार्य सुगमता’ सुनिश्चित करेगी।
उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी आर गवई ने इस विस्तार परियोजना के लिए 800 करोड़ रुपये स्वीकृत करने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया।
उन्होंने समारोह में धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि न्याय का अधिकार मौलिक अधिकार है और अदालत कक्षों, वकीलों के कक्षों आदि के साथ नया अत्याधुनिक भवन नागरिकों को तेजी से न्याय दिलाने में कारगर होगा।
सरकार के योगदान की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘कार्यपालिका के सहयोग के बिना हम इस परियोजना को लागू नहीं कर सकते थे। मैं प्रधानमंत्री के प्रति आभार जताता हूं जिन्होंने 20 नवंबर, 2023 को इसी मंच से घोषणा की थी कि सरकार ने इस परियोजना के लिए 800 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।’’
भाषा वैभव