जेएनयूटीए ने परिवीक्षा अवधि मनमाने तरीके से बढ़ाने का दावा किया, रेक्टर की नियुक्ति पर भी खफा
रंजन
- 14 Oct 2024, 04:55 PM
- Updated: 04:55 PM
नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने सोमवार को आरोप लगाया कि कई नवनियुक्त संकाय सदस्यों(अध्यापकों) की परिवीक्षा अवधि मनमाने तरीके से बढ़ा दी गयी है।
संघ ने यह दावा करते हुए रेक्टर प्रथम की नियुक्ति पर भी आपत्ति जतायी कि यह वरिष्ठता नियम का उल्लंघन कर किया गया।
इन कदमों को ‘अवैध’ और संस्थान के चरित्र के लिए ‘हानिकारक’ बताते हुए जेएनयूटीए ने एक बयान में आरोप लगाया कि अध्यादेश पांच (उपबंध चार) का उल्लंघन करते हुए रेक्टर प्रथम की नियुक्ति की गई है जबकि यह उपबंध कहता है कि "यदि दो या अधिक रेक्टर हैं, तो सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाला रेक्टर सबसे वरिष्ठ होगा।’’
संघ ने दावा किया कि इस उपबंध की अवमानना करते हुए कुलपति "जानबूझकर एक अवैधानिक कार्य कर रही हैं, जिसका विश्वविद्यालय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि इसमें रेक्टर-1 जैसा महत्वपूर्ण पद शामिल है।"
जेएनयूटीए के अनुसार, इस कदम के पहले से ही निहितार्थ हैं, क्योंकि नवनियुक्त रेक्टर ने 10 अक्टूबर को 159वीं अकादमिक परिषद की बैठक में भाग लिया था और सोमवार को होने वाली 319वीं कार्यकारी परिषद की बैठक में भाग लेने वाले हैं।
संघ ने नवनियुक्त अध्यापकों के लिए परिवीक्षा अवधि बढ़ाने पर भी चिंता प्रकट की।
जेएनयूटीए ने कहा, ‘‘कुलपति ने संबंधित केंद्रों और संकाय विद्यालयों द्वारा सेवाओं को पक्की करने की जबर्दस्त सिफारिश किये जाने के बावजूद (ऐसे अध्यापकों की) परिवीक्षा अवधि बढ़ाने के आदेश जारी किये।’’
इन आरोपों पर कुलपति शांतिश्री डी पंडित ने कहा, ‘‘ यह (परिवीक्षा अवधि में विस्तार) यूजीसी नियमों के अनुसार ही किया गया है क्योंकि नियम कहते हैं कि यदि वे (अध्यापक) अपने नौकरी अनुबंध के तहत न्यूनतम कार्यभार दायित्व का निर्वहन नहीं करते हैं ... (तो इसे बढ़ाया जा सकता है)। इस नौकरी को स्वीकार करते समय इस अनुबंध पर उन्होंने (अध्यापकों ने) भी हस्ताक्षर किये थे।’’
शिक्षक संघ ने विशेष केंद्रों के कामकाज की समीक्षा के लिए सात सदस्यीय समिति गठित करने की भी आलोचना की और इसे ‘उनकी अकादमिक स्वायत्तता एवं कामकाज पर सीधा हमला’ करार दिया।
उसने कहा, ‘‘ यह यादृच्छिक समिति विश्वविद्यालय के नियमों और निर्धारित संरचनाओं एवं प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए बनायी गयी है तथा वह 15 अक्टूबर को विशेष केंद्रों के साथ अपनी पहली बातचीत करने वाली है।’’
उसने इस समिति को तत्काल भंग करने की मांग की।
‘कैरियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस)’ पदोन्नति पर, जेएनयूटीए ने आरोप लगाया कि कुलपति ने मनमाने ढंग से उन अध्यापकों के लिए साक्षात्कार आयोजित न करने का निर्णय लिया जिनके आवेदन लंबित थे।
उसने कहा, ‘‘ कई अध्यापकों, जिन्हें पदोन्नत किया गया है, को अपनी पिछली सेवाओं की गणना छोड़ने के लिए मजबूर किया गया या उनकी पदोन्नति की तिथि को संशोधित कर दिया गया, जिससे वे अपनी सेवा के वर्षों से वंचित हो गए।’’
उसने इन कदमों को विश्वविद्यालय की अखंडता एवं स्वायत्तता को कमजोर करने का प्रयास करार दिया।
जेएनयूटीए ने कहा, ‘‘अपने पूर्ववर्ती कुलपति की तरह, यह कुलपति भी अनियमितताएं करने पर तुली हुई हैं, जिससे सरकारी विश्वविद्यालय के रूप में जेएनयू की सामूहिक छवि को अपूरणीय क्षति पहुंची है।’’
भाषा राजकुमार