उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लिया था : कर्नाटक के गृहमंत्री
धीरज रंजन
- 14 Oct 2024, 03:32 PM
- Updated: 03:32 PM
बेंगलुरु, 14 अक्टूबर (भाषा) कर्नाटक के गृहमंत्री जी.परमेश्वर ने 2022 में हुबली में हुए दंगे के आरोपियों पर से मुकदमे वापस लेने का सोमवार को बचाव करते हुए दावा किया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी खुद पर दर्ज मुकदमों को वापस लिया था।
उत्तरी कर्नाटक के हुबली में 16 अप्रैल 2022 को दंगे के दौरान पुलिस कर्मियों पर पत्थरबाजी करने की आरोपी भीड़ पर दर्ज मुकदमे वापस लेने के कर्नाटक सरकार के फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) यहां के फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन कर रही है।इस बारे में सवाल किए जाने पर परमेश्वर ने यह टिप्पणी की।
अधिकारिक सूत्रों ने बताया कि परमेश्वर को अंजुमन-ए-इस्लाम द्वारा दी गई अर्जी के बाद बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल ने कुल 43 मामलों को वापस लेने का फैसला किया जिनमें हुबली का मामला एक है।
परमेश्वर ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मामलों को वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद अदालत को फैसले की जानकारी दे दी गई है। अगर अदालत प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है तो मामले वापस हो जाएंगे। अगर ऐसा नहीं होता है तो मामले वापस नहीं होंगे। हम सतर्कता से प्रक्रिया का पालन करेंगे। हम मामले केवल इसलिए वापस नहीं लेंगे क्योंकि किसी ने ऐसा करने के लिये कहा है।’’
उन्होंने दावा किया कि भाजपा भी जब कर्नाटक और अन्य राज्यों की सत्ता में थी तब मामले वापस लिए थे।
कर्नाटक के गृहमंत्री ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) के खिलाफ भी मामले दर्ज थे। उन्होंने इन मामलों को मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए वापस लिया। कई मामले वापस लिए गए।’’
भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आप किस पर आरोप लगा रहे हैं जब व्यवस्था ऐसी है, हमने व्यवस्था के अंतर्गत यह निर्णय किया है।’’
उन्होंने कहा कि करीब 60 मामलों को वापस लेने के प्रस्ताव थे लेकिन सरकार ने 43 मामलों को वापस लेने की मंजूरी दी।
परमेश्वर से सफाई देते हुए कहा, ‘‘क्या वापस लिए गए सभी मामले अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े हुए हैं । ये सभी मामले किसानों, छात्रों और आम नागरिकों के खिलाफ दर्ज थे जिन्होंने विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था। अगर सभी 43 मामले अल्पसंख्यकों से जुड़े होते तो मैं उनसे सहमत होता। हम ऐसा नहीं करते। हम सभी को एक समान देखते हैं।’’
परमेश्वर ने 2020 में डी जे हल्ली और के जी हल्ली में हुए दंगे से जुड़े मामलों को वापस लेने के प्रस्ताव पर कहा कि सरकार उनकी समीक्षा करेगी और तय प्रक्रिया के तहत फैसला करेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं अकेला फैसला करने वाला नहीं हूं। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री अकेले फैसला नहीं कर सकते। इसके बीच कई लोगों का दिमाग होता है।’’
फ्रीडम पार्क में प्रदर्शन कर रहे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई.विजयेंद्र , विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर.अशोक, पूर्व उप मुख्यमंत्री सी.एन.अश्वथ नारायण और अन्य पार्टी नेताओं ने सरकार के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे ‘‘तुष्टीकरण की राजनीति’’ करार दिया।
भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार दंगे और हिंसा के आरोपों का सामना कर रहे लोगों के मुकदमे वापस ले रही है।
विजयेंद्र ने कहा, ‘‘हत्या की कोशिश और दंगे को भड़काना मामूली अपराध नहीं है फिर भी कांग्रेस न्याय के बजाय वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता दे रही है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि गलत काम करने वालों को प्रोत्साहित कर कांग्रेस सरकार असामाजिक तत्वों को बढ़ावा दे रही है और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डाल रही है।
भाषा धीरज