लोकसभा चुनाव: मप्र में सभी सीट पर जीत के लिए भाजपा कांग्रेस संगठन को कमजोर करने में लगी
दिमो खारी
- 26 Mar 2024, 10:24 PM
- Updated: 10:24 PM
भोपाल, 26 मार्च (भाषा) लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस के एक लाख कार्यकर्ताओं को अपने पाले में शामिल करने का लक्ष्य रखा है, जिनमें असंतुष्ट प्रभावशाली नेता भी शामिल हैं, ताकि प्रदेश में सभी 29 सीट पर जीत दर्ज की जा सके।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों और भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार रणनीति कांग्रेस को जमीनी स्तर पर कमजोर करने और साथ ही उन वरिष्ठ नेताओं के दलबदल को सुनिश्चित करने की है जो पार्टी संगठन में नाखुश हैं।
वर्ष 2019 के चुनावों में भाजपा ने 29 में से 28 सीट पर जीत जीतकर राज्य में कांग्रेस का लगभग सफाया कर दिया था। कांग्रेस सिर्फ छिंदवाड़ा सीट पर जीत हासिल कर पाई थी।
दूसरी ओर, कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के प्रमुख जीतू पटवारी ने कहा कि भगोड़ों का कोई भविष्य नहीं है।
भाजपा के एक अन्य नेता ने कहा कि भाजपा ने छिंदवाड़ा से 50,000 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को शामिल करने का एक लक्ष्य रखा है और अपनी जिला इकाई को इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कहा है।
भाजपा की प्रदेश इकाई के प्रमुख वीडी शर्मा ने दावा किया, ‘‘ मुझे लगता है कि कांग्रेस से नाखुश प्रभावशाली नेताओं सहित लगभग 50,000 कार्यकर्ता पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं।’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बड़े नेताओं के दलबदल की सिर्फ चर्चा ही हो रही है, हालांकि कांग्रेस पूरे राज्य में जिला, तहसील, खंड और बूथ स्तर पर ‘पलायन’ देख रही है।
खजुराहो सीट से लोकसभा में दूसरे कार्यकाल के लिए प्रयासरत शर्मा ने दावा किया कि लोकसभा चुनाव से पहले राज्यभर में कांग्रेस के कम से कम एक लाख कार्यकर्ता भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं।
इंदौर से पूर्व कांग्रेस विधायक अंतर सिंह दरबार और उनके सहयोगी पंकज संघवी तथा अन्य 15 मार्च को भाजपा में शामिल हो गए।
इस अवसर पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दावा किया, ‘‘ मोदी का परिवार मध्य प्रदेश में सबसे तेज गति से बढ़ रहा है’’।
मध्य प्रदेश पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जैसे भाजपा के दिग्गजों और विजया राजे सिंधिया तथा कुशा भाऊ ठाकरे जैसे संघ के दिग्गजों का राजनीतिक क्षेत्र रहा है।
भाजपा के एक नेता ने दावा किया कि यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ही थे, जिन्होंने ग्वालियर में बंद कमरे में हुई बैठक में पार्टी नेताओं और बूथ कार्यकर्ताओं से कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं को लाने के लिए कहा था।
उन्होंने दावा किया कि शाह ने बैठक में उपस्थित लोगों से कांग्रेस के स्थानीय प्रभावशाली नेताओं को शामिल करने और विपक्षी खेमे के वरिष्ठ नेताओं का निर्णय भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर छोड़ने के लिए कहा था।
उनके अनुसार, शाह ने भाजपा नेताओं से कहा कि वे कांग्रेस नेताओं की आमद के बारे में चिंता न करें और उन्हें आश्वासन दिया कि उनकी वरिष्ठता प्रभावित नहीं होगी और उन्हें पार्टी में विशेष स्थान और सम्मान मिलेगा।
छिंदवाड़ा से भाजपा उम्मीदवार विवेक साहू ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ भाजपा ने छिंदवाड़ा से 50,000 कांग्रेस कार्यकर्ताओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा है और अपनी जिला इकाई से इस लक्ष्य को हासिल करने को कहा है।’’
पिछले हफ्ते, कमल नाथ के करीबी सहयोगी दीपक सक्सेना ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और उनके भाजपा में शामिल होने की संभावना है।
विशेष रूप से, पिछले महीने कमल नाथ और उनके सांसद बेटे नकुल नाथ के भाजपा में जाने की अटकलें भी लगाई जा रही थीं, लेकिन उन्होंने इसे ‘मीडिया की उपज’ बताकर खारिज कर दिया था।
साहू ने दावा किया कि छिंदवाड़ा से 5,000 से अधिक कांग्रेसी पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं।
भाजपा में 21 मार्च को शामिल हुए छिंदवाड़ा सिटी से कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नंद किशोर सूर्यवंशी ने कहा, ‘‘ मैंने नकुलनाथ के कारण कांग्रेस छोड़ी। मेरी उनके साथ अच्छी नहीं बन रही थी। उन्हें पार्टी के वरिष्ठ नेता पसंद नहीं हैं।’’
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, भाजपा का लक्ष्य कांग्रेस को उसके उन कार्यकर्ताओं से दूर करना है जो चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बताया कि ब्राह्मण नेता एवं राज्य के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को संभावित कांग्रेसी नेताओं की तलाश के लिए भाजपा की ओर से काम सौंपा गया है।
एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा कि मिश्रा और भाजपा की मध्य प्रदेश इकाई के प्रमुख ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी सहित कांग्रेस के कई ब्राह्मण नेताओं को भाजपा में शामिल होने के लिए राजी किया है।
कभी गांधी परिवार के करीबी रहे पचौरी ने भाजपा में शामिल होते समय कहा कि वह पार्टी में शामिल हो गए क्योंकि कांग्रेस ने जनवरी में राम मंदिर अभिषेक समारोह के निमंत्रण को अस्वीकार कर दिया था।
इस मुद्दे पर बोलते हुए, पटवारी ने कहा, ‘‘ लोकतंत्र में, चुनाव इस सवाल का जवाब देते हैं।’’
उन्होंने कहा कि भगोड़े लोग पहले ही गुमनामी में चले गए हैं।
वरिष्ठ पत्रकार एवं ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के विजिटिंग फेलो रशीद किदवई ने कहा कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में अपनी जमीनी ताकत खो रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘ पिछले दो माह में जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर के पदाधिकारियों तक सैकड़ों नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। यह पलायन तब तेज हो गया जब व्यापक रूप से यह खबर आई कि कमल नाथ और उनके बेटे नकुल भाजपा में शामिल होने का विचार कर रहे हैं।’’
किदवई ने कहा कि नुकसान बहुत बड़ा है और ऐसा लगता है कि कांग्रेस में अब भाजपा को चुनौती देने वाली ताकत नहीं रह गई है।
उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से कांग्रेस ने 50 से अधिक प्रभावशाली नेताओं को पार्टी से बाहर जाते हुए देखा है जिनमें 15 पूर्व मुख्यमंत्री और इतनी ही संख्या में पूर्व केंद्रीय मंत्री, केंद्रीय नेतृत्व के पदाधिकारी और अन्य शामिल हैं।
किदवई ने कहा, ‘‘राहुल की कांग्रेस में पार्टी की विचारधारा लोगों में ऊर्जा भरने में विफल रही है।’’
राजनीतिक पर्यवेक्षक एवं पंडित दीनदयाल विचार प्रकाशन द्वारा निकाली जाने वाली मासिक पत्रिका ‘चरैवती’ के पूर्व संपादक जयराम शुक्ला ने कहा कि कांग्रेस एक डूबता हुआ जहाज है जिससे नेता बाहर कूद रहे हैं।
शुक्ला ने कहा, ‘‘ भाजपा कांग्रेस के उन ब्राह्मण नेताओं को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है जो अयोध्या में राम मंदिर के अभिषेक में शामिल नहीं होने के पार्टी के कदम से नाराज हैं।’’
मध्य प्रदेश में 19 अप्रैल से 13 मई के बीच चार चरणों में मतदान होगा।
भाषा दिमो