सौरभ भारद्वाज ने गरीबों को मिलने वाले आवास में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया, भाजपा ने किया पलटवार
योगेश नरेश
- 12 Oct 2024, 08:05 PM
- Updated: 08:05 PM
नयी दिल्ली, 12 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने गरीबों को मिलने वाले आवास में घोटाले का आरोप लगाते हुए शनिवार को कहा कि शहर में झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वालों के लिए बने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) आवास अवैध रूप से अपात्र व्यक्तियों को बेचे जा रहे हैं।
आम आदमी पार्टी (आप) के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने उन पर केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया।
भारद्वाज ने एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि डीडीए के ये फ्लैट अपात्र व्यक्तियों को बेचे जा रहे हैं।
भारद्वाज ने कहा कि कि केंद्र सरकार की कार्रवाई से विस्थापित हुए झुग्गीवासियों को आवास देने का वादा किया गया था जो अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है और यह उपराज्यपाल की सहमति के बिना नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, "केंद्र सरकार और डीडीए की मिलीभगत के बिना इन फ्लैटों को भ्रष्टाचार की बलि नहीं चढ़ाया जा सकता। इतना बड़ा घोटाला भाजपा के उपराज्यपाल की नाक के नीचे हो रहा था और यह संभव नहीं है कि उपराज्यपाल को इसकी जानकारी न हो।"
उन्होंने कहा, "भाजपा हमेशा गरीबों से परेशान रहती है और उनके खिलाफ खड़ी रहती है। जब गरीबों को मुफ्त बिजली और पानी दिया गया तो भाजपा ने इसका विरोध किया। अब ये फ्लैट, जो गरीबों के लिए थे, अन्य लोगों को अवैध रूप से दिए जा रहे हैं।"
भाजपा की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में सचदेवा ने आरोपों का खंडन किया और इन्हें निराधार बताया।
भारद्वाज ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि केवल उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के कोई कार्यरत न्यायाधीश ही पारदर्शी जांच सुनिश्चित कर सकते हैं।
भारद्वाज ने कहा, "यदि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जांच करते हैं, तो इस पर पर्दा डाल दिया जाएगा, क्योंकि ये एजेंसियां एलजी और केंद्र सरकार के अधीन काम करती हैं, इसलिए, पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए इस मामले की जांच उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के किसी कार्यरत न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए।"
इस बीच भाजपा के सचदेवा ने भी मंत्री से सवाल किया कि केजरीवाल सरकार ने नरेला और बवाना में गरीबों के लिए शीला दीक्षित सरकार के कार्यकाल के दौरान राजीव आवास योजना के तहत बनाए गए 40,000 फ्लैटों को लाभार्थियों को आवंटित किए बिना बर्बाद होने के लिए क्यों छोड़ दिया।
उन्होंने भारद्वाज से अनुरोध किया कि वे दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) द्वारा पिछले दस वर्षों में बेघरों को आवंटित किये गये मकानों की संख्या स्पष्ट करें।
भाषा योगेश