हेमा समिति की रिपोर्ट पर पिनराई विजयन ने सबको गुमराह किया: यूडीएफ
प्रीति माधव
- 11 Oct 2024, 05:50 PM
- Updated: 05:50 PM
तिरुवनंतपुरम, 11 अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने शुक्रवार को दावा किया कि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने ‘झूठ बोलकर’ सभी को ‘गुमराह’ किया है कि न्यायमूर्ति हेमा मलयालम फिल्म जगत में महिलाओं से यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार पर अपनी रिपोर्ट का खुलासा नहीं करना चाहती थीं।
केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन ने कहा कि न्यायमूर्ति हेमा ने सरकार को लिखे पत्र में कहा था कि रिपोर्ट देते समय उसे सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों में केवल इतना कहा गया था कि पीड़ितों की पहचान उजागर नहीं की जानी चाहिए।’’
सतीशन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी को गुमराह किए जाने के बाद अब राज्य के संस्कृति मंत्री साजी चेरियन ने ‘झूठ दोहराकर’ विधानसभा को गुमराह किया।
सतीशन विपक्ष द्वारा सदन से बहिर्गमन किए जाने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। दरअसल, यूडीएफ विधायक के के रेमा ने हेमा समिति की रिपोर्ट में हुए खुलासे के संबंध में आगे की जांच या कानूनी कार्रवाई की कथित कमी के संबंध में स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया था, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ए.एन. शमसीर ने इस नोटिस को खारिज कर दिया था जिसके बाद विपक्षी दल के सदस्य सदन से बाहर चले गए थे।
सतीशन ने कहा, ‘‘अध्यक्ष ने हालांकि कहा कि अनुमति देने से इनकार करने का निर्णय केवल उनका था, लेकिन इससे यह साफ पता चलता है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करना चाहती। वे इस मुद्दे पर ‘रक्षात्मक’ रुख अपना रही है। यहां तक कि अध्यक्ष का फैसला भी विधानसभा की परंपराओं के विपरीत है।’’
शमसीर ने कहा कि केरल उच्च न्यायालय में यह मुद्दा विचाराधीन है इसलिए अनुमति देने से इनकार किया गया है।
सतीशन ने अध्यक्ष द्वारा दिए गए कारणों का खंडन करते हुए संवाददाताओं से कहा कि जब अदालत के समक्ष सौर घोटाला विचाराधीन था तब भी सदन में कई बार इस पर चर्चा हुई थी। सौर घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कथित रूप से शामिल हैं।
उन्होंने हेमा समिति की रिपोर्ट के बारे में कहा कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम सहित यौन अपराधों की कई घटनाओं की जानकारी होने के बावजूद सरकार चार साल से अधिक समय तक इस पर ध्यान नहीं दे रही थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इसके बजाय कुछ लोगों को बचाने का प्रयास कर रही है।
विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस मुद्दे पर चर्चा की अनुमति देने से इनकार करने के बाद सतीशन ने कहा, “यदि हम महिलाओं से संबंधित इस मुद्दे पर चर्चा नहीं करते हैं तो यह सदन का अपमान है।”
उन्होंने कहा, ‘‘हम इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं और सदन से बहिर्गमन कर रहे हैं। सरकार इस मुद्दे पर रक्षात्मक रुख अपना रही है और इसीलिए सदन में इस पर चर्चा नहीं हो रही है।’’
एक अभिनेत्री पर साल 2017 में हुए हमले के बाद केरल सरकार ने न्यायमूर्ति के. हेमा समिति का गठन किया था। हेमा समिति की रिपोर्ट में मलयालम सिनेमा में महिलाओं से हुए उत्पीड़न और शोषण के मामलों का खुलासा हुआ।
रिपोर्ट के सार्वजनिक होने पर कई अभिनेताओं और निर्देशकों के खिलाफ यौन उत्पीड़न और शोषण के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए 25 अगस्त को विशेष जांच दल का गठन किया जिसमें सात सदस्य शामिल हैं।
भाषा
प्रीति