जम्मू कश्मीर में नयी सरकार को केंद्र से बात करने में सख्त रुख नहीं अपनाना चाहिए: तारिगामी
वैभव माधव
- 11 Oct 2024, 05:09 PM
- Updated: 05:09 PM
श्रीनगर, 11 अक्टूबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता एम वाई तारिगामी ने कहा है कि जम्मू कश्मीर की नयी सरकार को भाजपा नीत केंद्र सरकार के साथ काम करने में सख्त रुख नहीं अपनाना चाहिए, लेकिन यहां की जनता की मांगों को नयी दिल्ली तक पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास करने चाहिए।
माकपा जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के साथ गठबंधन में लड़ी थी।
तारिगामी ने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ‘‘हम दिल्ली में बैठी सरकार को कड़ा संदेश देने, यहां के लोगों की मांगों को समझने और उनसे कश्मीर के जमीनी हालात को सुनने की अपील करने के लिए अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करेंगे। किसी भी तरह की सख्ती नहीं होनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमें आगे बढ़ना है और इसके लिए जम्मू कश्मीर के लोगों के अधिकारों की बहाली बहुत जरूरी है। हम सब मिलकर सदन में इसकी मांग करेंगे।’’
तारिगामी हाल में हुए चुनाव में दक्षिण कश्मीर की कुलगाम सीट से लगातार पांचवीं बार विधायक निर्वाचित हुए हैं।
उपराज्यपाल द्वारा पांच विधायकों के प्रस्तावित नामांकन को लेकर विवाद पर एक प्रश्न का जवाब देते हुए माकपा नेता ने कहा कि गठबंधन के पास विधानसभा में किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए पर्याप्त संख्याबल है।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन सच यह है कि एक राज्य को केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया और एक बड़ी नगरपालिका के स्तर पर पहुंचा दिया गया और फिर एक और संशोधन लाया गया जो पुनर्गठन अधिनियम था। यह फिर से विधायिका को कमजोर कर रहा है, मंत्रिमंडल को कमजोर कर रहा है और भारत सरकार के मनोनीत अधिकारी को सशक्त बना रहा है।’’
तारिगामी ने कहा कि जम्मू कश्मीर की जनता के लिए नयी सरकार ही एकमात्र उम्मीद है और हम उन्हें निराश नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि देश में हर संस्थान जनादेश का सम्मान करने के लिए संविधान के प्रति बाध्य है। माकपा नेता ने कहा, ‘‘यह हम पर एहसान नहीं होगा, यह हमारा वैध अधिकार है।’’
पांचवीं बार विधानसभा के लिए चुने जाने पर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता ने कहा कि लोगों का प्यार और उनके साथ पुराना रिश्ता उनकी सफलता की कुंजी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘वे मुझे जानते हैं, वे जानते हैं कि मैंने उनके लिए क्या किया है और क्या नहीं किया है और वे ही असली निर्णायक हैं। मैंने हमेशा उनके फैसले का सम्मान किया है और उनकी सराहना की है। मेरे पास कहने के लिए और कुछ नहीं है। वे समझदार हैं और वे जानते हैं कि कैसे चुनाव करना है...न केवल कुलगाम में बल्कि अन्य जगहों पर भी।’’
हाल में हुए विधानसभा चुनावों में प्रतिबंधित जमात-ए-इस्लामी के कुछ पूर्व सदस्यों के चुनाव लड़ने के बारे में पूछे जाने पर तारिगामी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया सभी के लिए खुली है, लेकिन जो चीज इसे ‘अधिक जटिल’ बनाती है, वह है ‘अदृश्य लोगों का काम करना और उम्मीदवारों या छद्म प्रत्याशियों को प्रायोजित करना’।
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन लोग समझते हैं कि कौन क्या है। उदाहरण के लिए, मेरे विचार में अलग-अलग समूह थे, जो वास्तव में लोगों से समर्थन नहीं मांग रहे थे, लेकिन उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया गया था।’’
तारिगामी ने कहा, ‘‘लोगों ने विवेक से मतदान किया। मुझे लोगों की पसंद पर गर्व है।’’
मंत्रिमंडल में जगह मिलने की संभावना के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनकी कभी सरकार में शामिल होने की इच्छा नहीं रही है।
भाषा वैभव