डेविड बेकर, डेमिस हस्साबिस और जॉन जंपर को प्रोटीन पर काम करने के लिए रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार
एपी वैभव अविनाश
- 09 Oct 2024, 07:44 PM
- Updated: 07:44 PM
स्टॉकहोम, नौ अक्टूबर (एपी) रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार इस साल डेविड बेकर, डेमिस हस्साबिस और जॉन जंपर को प्रोटीन की संरचना का पूर्वानुमान लगाने और डिजाइन करने संबंधी कार्य के लिए प्रदान किया जाएगा।
रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेस के महासचिव हैंस एलेग्रेन ने बुधवार को उनके नाम की घोषणा की।
रसायन विज्ञान के लिए नोबेल समिति के अध्यक्ष हीनर लिन्के ने कहा कि इस पुरस्कार से उस अनुसंधान को सम्मानित किया जाएगा जिसने अमीनो एसिड की शृंखला और प्रोटीन संरचना के बीच कड़ी जोड़ी है।
उन्होंने कहा, ‘‘रसायन विज्ञान में इसे दरअसल एक बड़ी चुनौती कहा जा रहा था और खासतौर पर जैव रसायन में दशकों से यह चुनौती बना हुआ था। इसलिए इस उपलब्धि को आज सम्मान के लिए चुना गया है।’’
बेकर सिएटल में यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन में जबकि हस्साबिस और जंपर लंदन में ब्रिटिश अमेरिकी एआई अनुसंधान प्रयोगशाला गूगल डीपमाइंड संस्थान में काम करते हैं।
नोबेल समिति ने कहा कि 2003 में बेकर ने एक नया प्रोटीन डिजाइन किया था और तब से उनके अनुसंधान समूह ने एक के बाद एक कल्पनाशील प्रोटीन का निर्माण किया है, जिसमें ऐसे प्रोटीन शामिल हैं जिनका उपयोग फार्मास्यूटिकल्स, टीकों, नैनोमैटेरियल और छोटे सेंसर के रूप में किया जा सकता है।
नोबेल समिति के प्रोफेसर जोहान एक्विस्ट ने कहा, ‘‘उन्होंने जितने डिजाइन तैयार किए और प्रकाशित किए हैं, वे और उनकी विविधता वास्तव में शानदार है। ऐसा लगता है कि इस प्रौद्योगिकी से आप किसी भी प्रकार के प्रोटीन का निर्माण कर सकते हैं।’’
समिति ने कहा कि हस्साबिस और जंपर ने एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल तैयार किया जो लगभग उन सभी 20 करोड़ प्रोटीन की संरचना का पूर्वानुमान व्यक्त करने में सक्षम है जिनकी पहचान अनुसंधानकर्ताओं ने की है।
लिन्के ने कहा, ‘‘प्रोटीन ऐसे कण हैं जो जीवन के लिए जरूरी हैं। ये हड्डी, त्वचा, बाल और ऊतक बनाते हैं। जीवन कैसे काम करता है, यह समझने के लिए हमें पहले प्रोटीन की आकृति समझनी होगी।’’
लिन्के ने कहा कि वैज्ञानिक लंबे समय से प्रोटीन की त्रिआयामी संरचना का पूर्वानुमान लगाने का सपना देख रहे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘चार साल पहले डेमिस हस्साबिस और जॉन जंपर इस कोड का पता लगाने में कामयाब रहे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के कुशल उपयोग से उन्होंने प्रकृति में किसी भी ज्ञात प्रोटीन की जटिल संरचना की भविष्यवाणी करना संभव बनाया।’’
लिन्के ने कहा, ‘‘वैज्ञानिकों का एक और सपना नए प्रोटीन बनाने का रहा है ताकि हमारे उद्देश्यों के लिए प्रकृति की इस कृति का इस्तेमाल करना सीखा जा सके।’’
उन्होंने कहा, ‘‘डेविड बेकर ने इस समस्या का समाधान निकाला। उन्होंने ऐसे कंप्यूटेशनल टूल विकसित किए जो अब वैज्ञानिकों को पूरी तरह अभिनव संरचनाओं और कार्यों वाले नए प्रोटीन डिजाइन करने में सक्षम बनाते हैं और मानवता के व्यापक लाभ की अनंत संभावनाएं खोलते हैं।’’
बेकर ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा कि यह सफलता उत्साह बढ़ाने वाली है। उन्हें अपनी पत्नी के साथ तड़के यह सूचना मिली। उनकी पत्नी तो खुशी से चिल्लाने लगीं।
स्टॉकहोम में पुरस्कार की घोषणा के समय उपस्थित रहे नोबेल अधिकारियों और पत्रकारों से खुली बातचीत में बेकर से पूछा गया कि क्या कोई एक प्रोटीन है जो उन्हें सबसे ज्यादा पसंद है। उन्होंने कहा कि वह सभी प्रोटीन को पसंद करते हैं।
पिछले वर्ष रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार अमेरिका के तीन वैज्ञानिकों मौंगी बावेंडी, लुई ब्रूस और एलेक्सी एकिमोव को सूक्ष्म ‘क्वांटम डॉट्स’ पर उनके काम के लिए प्रदान किया गया था।
इस साल के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा सोमवार से शुरू हुई। माइक्रो आरएनए की खोज के लिए अमेरिकी वैज्ञानिकों विक्टर एंब्रोस और गैरी रुवकुन को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार प्रदान किये जाने की घोषणा सोमवार को की गई।
मंगलवार को जॉन होपफील्ड और ज्योफ्री हिंटन को मशीन लर्निंग को सक्षम बनाने वाली खोजों के लिए भौतिकी के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई।
बृहस्पतिवार को साहित्य के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की जाएगी। शांति के लिए नोबेल पुरस्कार की घोषणा शुक्रवार को और अर्थशास्त्र के लिए यह घोषणा 14 अक्टूबर को की जाएगी।
नोबेल पुरस्कार के तहत 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (करीब 10 लाख अमेरिकी डॉलर) राशि प्रदान की जाएगी। इसमें आधी राशि बेकर को प्रदान की जाएगी और बाकी आधी पुरस्कार राशि हस्साबिस और जंपर साझा करेंगे।
विजेताओं को पुरस्कार के संस्थापक अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि 10 दिसंबर पर एक समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
एपी वैभव