महिला नीत विकास को बढ़ावा देने के लिए और प्रयास कर सकता है फिल्म उद्योग: मुर्मू
अमित देवेंद्र
- 08 Oct 2024, 11:05 PM
- Updated: 11:05 PM
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि भारतीय फिल्म उद्योग में महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को बढ़ावा देने के लिए और अधिक प्रयास किए जा सकते हैं।
विज्ञान भवन में 70वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार वितरण समारोह में मुर्मू ने कहा कि भारतीय सिनेमा दुनिया का सबसे बड़ा फिल्म उद्योग है क्योंकि यह ‘‘कई भाषाओं और क्षेत्रों’’ में फिल्में बनाता है।
मुर्मू ने पुरस्कार प्रदान करने के बाद कहा, ‘‘भारतीय सिनेमा, विश्व का सबसे बड़ा फिल्म उद्योग है। अनेक भाषाओं और देश के सभी क्षेत्रों में फिल्में बनायी जा रही हैं। साथ ही, यह सबसे अधिक विविधतापूर्ण कला-क्षेत्र भी है।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त करने वाले 85 लोगों में से केवल 15 महिलाएं हैं।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘आज के कुल पुरस्कार विजेताओं की संख्या 85 से अधिक है, लेकिन महिला पुरस्कार विजेताओं की संख्या केवल 15 है। मैं शिक्षण संस्थानों के कई दीक्षांत समारोहों में जाती हूं। अधिकांश उच्च-शिक्षण संस्थानों में, पुरस्कार प्राप्त करने वाली छात्राओं की संख्या, छात्रों से अधिक होती है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा ही बदलाव, रोजगार और उद्योग जगत में भी होना चाहिए। फिल्म-उद्योग द्वारा, महिला नीत विकास की दिशा में और अधिक प्रयास किया जा सकता है।’’
मुर्मू ने कहा कि फिल्में और सोशल मीडिया समाज को बदलने का सबसे अधिक मजबूत माध्यम हैं। उन्होंने कहा, ‘‘लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए जितना असर इन माध्यमों से पड़ता है, उतना किसी और माध्यम से संभव नहीं है।’’
राष्ट्रपति ने जानेमाने अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को बधाई भी दी जिन्हें समारोह में ‘दादा साहब फाल्के पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। दादा साहब फाल्के पुरस्कार सिनेता के क्षेत्र में सरकार की ओर से दिया जाने वाला सबसे बड़ा पुरस्कार है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने स्वतंत्रता सेनानी एवं उड़िया भाषा के प्रसिद्ध लेखक भगवती चरण पाणिग्रही द्वारा लिखी गई एक कहानी ‘शिकार’ स्कूल के समय पढ़ने का उल्लेख किया। इस कहानी को महान फिल्म निर्माता मृणाल सेन ने 1976 में अपनी फिल्म "मृगया" में रूपांतरित किया, जिसमें चक्रवर्ती ने घिनुआ नामक एक युवा आदिवासी की भूमिका निभायी।
चक्रवर्ती को उस फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी दिया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘मिथुन चक्रवर्ती जी ने अपनी पहली ही फिल्म 'मृगया' में उस अनोखे किरदार को जीवंत कर दिया और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हुए। अब तक लगभग पांच दशकों की अपनी कला-यात्रा के दौरान मिथुन जी ने गंभीर चरित्रों को पर्दे पर उतारने के साथ-साथ, सामान्य कहानियों को भी, अपनी विशेष ऊर्जा से सफलता प्रदान की है। उनकी लोकप्रियता का दायरा दूसरे देशों तक फैला हुआ है।’’
राष्ट्रपति ने इसको लेकर अफसोस जताया कि सार्थक फिल्मों को अक्सर दर्शक नहीं मिलते और उनका ठीक से प्रचार नहीं हो पाता।
उन्होंने कहा, ‘‘न केवल फिल्म उद्योग से जुड़ी पत्रिकाएं करोड़ों रुपये की लागत और कमाई वाली फिल्मों के बारे में लिखती हैं, बल्कि अखबार भी उन फिल्मों की समीक्षा और रिपोर्ट को अधिक महत्व देते हैं। फिल्म के प्रचार पर खर्च करना फिल्म की सफलता का अहम हिस्सा माना जाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी स्थिति में लगता है कि आर्थिक ताकत फिल्म जैसे महत्वपूर्ण माध्यम को नियंत्रित कर रही है। आज कई पुरस्कार विजेता फिल्मों के निर्माताओं के पास उस तरह की वित्तीय ताकत नहीं है, जो बड़े बजट की फिल्मों को आगे बढ़ाती है।’’
मुर्मू ने कहा कि समाज के नागरिकों, सामाजिक संगठनों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारों को सार्थक सिनेमा की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रयास करने चाहिए।
भाषा अमित