कोलकाता : पूजा समितियां वर्तमान समय के ज्वलंत विषयों को उठा रहीं
शुभम अविनाश
- 07 Oct 2024, 07:53 PM
- Updated: 07:53 PM
(सुप्रतीक सेनगुप्ता)
कोलकाता, सात अक्टूबर (भाषा) शहर और इसके बाहरी इलाकों में दुर्गा पूजा आयोजक अपनी रचनात्मकता का इस्तेमाल मौजूदा ज्वलंत मुद्दों पर सशक्त टिप्पणी करने के लिए कर रहे हैं, जिनमें महिलाओं के अधिकार और सामाजिक न्याय से लेकर पर्यावरण और तेजी से बढ़ते शहरीकरण भी शामिल हैं।
इस उत्सव के बीच केवल एक पूजा समिति ने आर जी कर अस्पताल की एक महिला चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या की क्रूर घटना के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन की वास्तविकता को दिखाने का प्रयास किया है।
बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार नौ अक्टूबर से शुरू होने वाला है। कोलकाता के कंकुरगाछी क्षेत्र में श्री श्री सरस्वती और काली माता मंदिर परिषद ने 'लज्जा' शीर्षक से एक मूर्ति का अनावरण किया है, जिसमें देवी को एक महिला के शव के सामने अपनी हथेलियों से अपना चेहरा ढकते हुए दिखाया गया है।
'पीटीआई भाषा' से बात करते हुए समिति के प्रवक्ता ने बताया, "जब आगंतुक पंडाल में प्रवेश करेंगे तो वे देवी को शर्म से अपना चेहरा ढंकते हुए देखेंगे, जबकि उनके सामने एक महिला का शव है।" देवी के साथ शेर को भी शव के सामने बैठे हुए दिखाया गया है, जिसका सिर शोक में झुका हुआ है। पास में, एक सफेद एप्रन और स्टेथोस्कोप (चिकित्सा पेशे के प्रतीक) प्रदर्शित किए गए हैं।
हालांकि समिति ने मंडप के अंत में देवी की पारंपरिक प्रतिमा को बरकरार रखा है।
प्रवक्ता ने कहा, "हम देवी के 'सबेकी' (पारंपरिक) स्वरूप के साथ छेड़छाड़ नहीं करना चाहते। दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम के बाद यह विषय जोड़ा गया है।"
नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़ी 82 साल पुरानी 'हाजरा पार्क दुर्गा पूजा' ने अपने उत्सव का विषय सामाजिक न्याय और सामुदायिक सशक्तीकरण पर आधारित रखा है और इसका शीर्षक 'शुद्धि' है।
हाजरा पार्क दुर्गोत्सव समिति के संयुक्त सचिव सायन देब चटर्जी ने कहा, "हमारी पूजा सामाजिक न्याय के महत्व की याद दिलाती है।"
उन्होंने कहा कि इस साल हमारे पंडाल में ऐसे संदेश और मूर्तियां होंगी जो जाति और समुदायों के खिलाफ पूर्वाग्रह के जहर को खत्म करने के लिए आत्मा की शुद्धि को बढ़ावा देंगी। देवी यह संदेश देंगी कि उनके सामने सभी समान हैं।
चटर्जी ने कहा, "हालांकि समाज में काफी प्रगति हुई है, लेकिन समानता की लड़ाई जारी है।"
ऐतिहासिक रूप से यह पूजा दलित समुदाय द्वारा आयोजित की जाती रही है।
शहर के उत्तरी भाग में 'यंग बॉयज क्लब' ने तीव्र शहरीकरण से उत्पन्न पारिस्थितिकीय खतरों को उजागर करने के लिए 'एक टुकड़ा आकाश' को अपना विषय चुना है।
मुख्य आयोजक राकेश सिंह ने कहा, "हमारे पास ऐसे मॉडल हैं जिनमें गगनचुंबी इमारतों को क्षितिज पर हावी होते और हरियाली की जगह लेती अर्धनिर्मित इमारतों को दर्शाया गया है।"
उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी के लिए बहुमंजिला इमारतें जरूरी हैं, लेकिन इनसे खुली जगह और प्राकृतिक रोशनी में काफी कमी आई है।
सिंह ने जोर देकर कहा, "इस वर्ष हमारा लक्ष्य उत्सव मनाने वालों के लिए एक अनूठा अनुभव पेश करना है, तथा उम्मीद है कि 'एक टुकड़ा आकाश' पर्यावरणीय जिम्मेदारी को बढ़ावा देगा तथा विशेष रूप से युवाओं के बीच सकारात्मक बदलाव को प्रोत्साहित करेगा।"
शहर के 'आजादगढ़ सेवक संघ' ने अपने उत्सव का विषय प्राचीन डोकरा कला के इर्द-गिर्द रखा है जो हड़प्पा और मोहनजोदड़ो सभ्यताओं की 4,000 साल पुरानी धातु की ढलाई परंपरा है।
वहीं 'मोहम्मद अली पार्क' के युवा संघ ने पारंपरिक थीम को चुना और मध्य कोलकाता स्थित व्हाइट हाउस की प्रतिकृति बनाई।
शहर के उत्तरी छोर पर श्यामनगर स्थित 'बनर्जीपारा पूजा मंदिर समिति' ने महिलाओं की तस्करी और उनके शोषण पर जोर दिया है।
भाषा
शुभम