सरकार और पुलिस पशु चिकित्सा के छात्र की मौत के जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है: यूडीएफ
सिम्मी रंजन
- 26 Mar 2024, 02:54 PM
- Updated: 02:54 PM
तिरुवनंतपुरम, 26 मार्च (भाषा) कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) ने मंगलवार को केरल की वामपंथी सरकार और पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने वायनाड स्थित राजकीय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान महाविद्यालय के एक छात्र की मौत के मामले की जांच को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने में देरी करके दोषियों को बचाने की कोशिश की।
राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता वी डी सतीशन ने फेसबुक पर साझा किए गए एक पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि मामले को सीबीआई को सौंपने में देरी करके राज्य सरकार और पुलिस ने मामले में सबूत नष्ट करने की भी कोशिश की।
सिद्धार्थनन जे एस (20) का शव 18 फरवरी को महाविद्यालय के छात्रावास के स्नानघर में लटका मिला था। उसके पिता ने यहां ‘कैंटोनमेंट हाउस’ में स्थित सतीशन के आधिकारिक आवास पर उनसे मुलाकात की थी जिसके बाद नेता ने ये आरोप लगाए।
विपक्ष के नेता ने कहा कि सिद्धार्थनन के पिता जयप्रकाश और उनके परिवार के अन्य सदस्य इस बात को लेकर चिंतित हैं कि छात्र के कथित हत्यारों को सरकार, पुलिस और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता बचा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि छात्र की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाने की लड़ाई में सिद्धार्थनन के परिवार को पूरा सहयोग दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि विपक्ष के छात्र, युवा और महिला संगठनों का विरोध प्रदर्शन और आगामी चुनाव का दबाव ऐसे कारक हैं जिन्होंने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला करने के लिए मजबूर किया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि जांच को नुकसान पहुंचाने के कदम का हर कीमत पर विरोध किया जाएगा।
सतीशन से मुलाकात के बाद छात्र के पिता ने पत्रकारों से कहा कि सिद्धार्थनन की मौत के बाद जारी एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार, उनके बेटे को उसकी मौत से पहले आठ महीने तक परेशान किया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि एसएफआई (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) के कई वरिष्ठ नेता कई महीनों से कॉलेज में ‘‘डेरा डाले हुए’’ थे और उनके बेटे को कथित तौर पर कपड़े उतारकर घुटनों के बल बैठाया गया था।
उन्होंने कहा, ‘‘वे सभी जानते थे कि क्या हो रहा था। वे इसे उसी वक्त रोक सकते थे। मैं नहीं मान सकता कि एसएफआई के वरिष्ठ नेता इस बात से अनजान थे कि वहां क्या हो रहा था।’’
जयप्रकाश ने कहा कि वह सतीशन से मिलने आए क्योंकि उन्हें विपक्षी नेता पर भरोसा है जो शुरू से ही उनकी मदद करते रहे हैं।
पीड़ित के पिता ने यह भी दावा किया कि रैगिंग विरोधी दल की रिपोर्ट में कुछ महिला छात्रों का भी नाम था, लेकिन उनके या डीन के खिलाफ कोई पुलिस कार्रवाई नहीं की गई।
महाविद्यालय द्वारा जारी उस विवादास्पद आदेश को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान के हस्तक्षेप के बाद सोमवार को रद्द कर दिया गया था, जिसमें छात्र की मौत के मामले में निलंबित किए गए 33 छात्रों को बहाल किया गया था।
भाषा सिम्मी