नक्सली मानवाधिकारों के सबसे बड़े उल्लंघनकर्ता हैं : अमित शाह
आशीष माधव
- 07 Oct 2024, 08:22 PM
- Updated: 08:22 PM
(तस्वीरों सहित)
नयी दिल्ली, सात अक्टूबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलियों को मानवाधिकार का सबसे बड़ा उल्लंघनकर्ता करार देते हुए सोमवार को कहा कि सुरक्षा बल अब नक्सलियों के खिलाफ रक्षात्मक कार्रवाई के बजाय ‘‘आक्रामक अभियान’’ चला रहे हैं और हाल के समय में उन्होंने बड़ी सफलता हासिल की है।
नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों को संबोधित करते हुए शाह ने यह भी कहा कि नक्सलवाद प्रभावित सभी राज्य मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
शाह ने कहा कि नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति में सुधार के कारण पिछले लोकसभा चुनाव में 70 प्रतिशत तक मतदान हुआ। इससे पहले इस क्षेत्र में एक भी मत नहीं पड़ा था।
शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर, कश्मीर और नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों के 13,000 से अधिक लोग हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने नक्सली गिरोहों से जुड़े युवाओं से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा कि सभी राज्यों ने उनके लिए लाभकारी पुनर्वास योजनाएं तैयार की हैं।
इस महत्वपूर्ण बैठक में नक्सल-विरोधी अभियानों और प्रभावित क्षेत्रों में की गई विकास पहल पर चर्चा की गई। छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों द्वारा कम से कम 31 नक्सलियों को मार गिराए जाने के कुछ दिनों बाद नक्सल-प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ केंद्रीय गृहमंत्री की यह बैठक हुई है। यह मुठभेड़ हाल के दिनों में नक्सलियों के खिलाफ सबसे सफल अभियानों में से एक है। शाह ने कहा, ‘‘सुरक्षा बल अब रक्षात्मक अभियान चलाने के बजाय आक्रामक अभियान चला रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि नक्सलियों के वित्तपोषण को रोकने के लिए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को सक्रिय करके एक ‘‘आक्रामक रणनीति’’ अपनाई गई है, जिसके परिणामस्वरूप उनके लिए वित्तीय संसाधनों की कमी हो गई है। उन्होंने कहा कि लंबी अवधि के कई अभियान चलाए गए, जिससे यह सुनिश्चित हो गया कि नक्सलियों को घेरा जाए और उन्हें भागने का कोई अवसर न मिले।
शाह ने कहा कि नक्सलवाद को पूरी तरह से समाप्त करने की दिशा में अंतिम प्रयास करना आवश्यक है। उन्होंने सभी प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों से आग्रह किया कि वे विकास और नक्सल विरोधी अभियानों की प्रगति की कम से कम महीने में एक बार समीक्षा करें। शाह ने पुलिस महानिदेशकों से अनुरोध किया कि वे कम से कम हर 15 दिन में एक बार ऐसी समीक्षा करें।
उन्होंने नक्सलियों को विकास के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा बताते हुए कहा कि वे मानवाधिकार के सबसे बड़े उल्लंघनकर्ता हैं, जो आठ करोड़ से अधिक लोगों को विकास और बुनियादी कल्याण के अवसरों से वंचित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि नक्सलवाद शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, संपर्क, बैंकिंग और डाक सेवाओं को गांवों तक पहुंचने से रोकता है। गृह मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के लिए नक्सलवाद को पूरी तरह से खत्म करना होगा।
नक्सलवाद के खतरे से प्रभावित राज्यों में छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश और मध्यप्रदेश शामिल हैं।
बैठक में छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया, जबकि अन्य राज्यों का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ मंत्रियों और अधिकारियों ने किया।
शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के प्रति शून्य सहनशीलता तथा सरकारी योजनाओं के शत-प्रतिशत क्रियान्वयन के साथ केंद्र सरकार सभी माओवाद प्रभावित क्षेत्रों का पूर्ण विकास करना चाहती है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने नक्सलियों से लड़ने के लिए दो नियम बनाए हैं- पहला, हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में कानून का राज स्थापित करना और दूसरा, उन क्षेत्रों में नुकसान की शीघ्र भरपाई करना जो लंबे नक्सली आंदोलन के कारण विकास से वंचित रहे।
गृह मंत्री ने कहा कि 30 वर्षों में पहली बार 2022 में वामपंथी उग्रवाद के कारण हताहतों की संख्या 100 से नीचे हो गई, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई अपने अंतिम चरण में है और मार्च 2026 तक सभी के सहयोग से देश इस दशकों पुरानी समस्या से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।
शाह ने कहा कि 2004 से 2014 के बीच हिंसा की 16,463 घटनाएं हुईं। पिछले दशक में यह संख्या घटकर 7,700 रह गई, जो लगभग 53 प्रतिशत की कमी है। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार, नागरिकों और सुरक्षा बलों की मौतों में 70 प्रतिशत की कमी आई है तथा हिंसा प्रभावित जिलों की संख्या 96 से घटकर 16 हो गई है।
उन्होंने कहा कि हिंसा की रिपोर्ट करने वाले थानों की संख्या भी 465 से घटकर 171 हो गई है। इनमें से 50 थाने नए हैं और यह सफलता सभी राज्यों और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
हाल के महीनों में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई में मिली सफलता के लिए छत्तीसगढ़ सरकार की सराहना करते हुए शाह ने कहा कि यह राज्य सभी के लिए प्रेरणा है। मंत्री के अनुसार, जनवरी 2024 से अब तक छत्तीसगढ़ में 237 नक्सली मारे गए हैं, 812 गिरफ्तार हुए हैं और 723 ने आत्मसमर्पण किया है।
शाह ने कहा कि 2019 से नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने बहुआयामी रणनीति लागू की है, जिसके तहत सुरक्षा बलों की तैनाती के लिए उन स्थानों की पहचान की गई, जहां उनकी तैनाती नहीं है। नतीजतन, सिर्फ एक साल में 194 से ज्यादा कैंप स्थापित किए गए, जिससे महत्वपूर्ण सफलता मिली।
उन्होंने कहा कि 45 थानों के माध्यम से सुरक्षा रिक्तता को भरना, राज्य खुफिया शाखाओं को मजबूत करना तथा राज्य विशेष बलों के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने रणनीति की सफलता में योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि हेलीकॉप्टर की उपलब्धता से सैनिकों के हताहत होने की संख्या में भारी कमी आई है। पहले, जवानों की सेवा के लिए केवल दो हेलीकॉप्टर तैनात थे, लेकिन अब 12 हेलीकॉप्टर परिचालन में हैं। इनमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और वायुसेना के छह-छह हेलीकॉप्टर हैं।
भाषा आशीष