भारत राष्ट्रीय संप्रभुत्ता को बनाए रखने में फिलीपीन का समर्थन करता है : जयशंकर
धीरज संतोष
- 26 Mar 2024, 11:55 PM
- Updated: 11:55 PM
मनीला, 26 मार्च (भाषा) विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर देश के रुख को सार्वजनिक रूप से रखते हुए मंगलवार को कहा कि भारत अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता को बनाए रखने में फिलीपीन का दृढ़ता से समर्थन करता है। उन्होंने यह टिप्पणी ऐसे समय की है जब फिलीपीन और चीन वर्तमान में संसाधनों से समृद्ध इस क्षेत्र को लेकर सीमा विवाद में उलझे हुए हैं।
जयशंकर ने मनीला में फिलीपीन के विदेश मंत्री एनरिक मनालो के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में ये टिप्पणियां कीं।
जयशंकर ने संभवत: पहली बार दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर भारत के रुख का संकेत देते हुए कहा, ‘‘मैं इस अवसर पर फिलीपीन की राष्ट्रीय संप्रभुता को बनाए रखने के लिए भारत के समर्थन को मजबूती से दोहराता हूं।’’
जयशंकर की टिप्पणी अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन द्वारा फिलीपीन की रक्षा के लिए अमेरिका की ‘‘दृढ़ प्रतिबद्धता’’ को दोहराने के लगभग एक हफ्ते बाद आई है। दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ तनाव से व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
चीनी तट रक्षक और समुद्री मिलिशिया इकाइयों ने हाल के हफ्तों में जलमार्ग में विवादित विशेषाधिकार को लेकर फिलीपीन के जहाजों को निशाना बनाया है। दो सप्ताह पहले हुए हालिया टकराव में, एक चीनी तट रक्षक जहाज ने एक फिलीपीनी नाव पर पानी की बौछार का इस्तेमाल किया, जिससे उसके शीशे टूट गये और फिलीपीन के चार नाविक घायल हो गए।
जयशंकर ने अपने प्रेस वक्तव्य में कहा, ‘‘एक राष्ट्र के रूप में अपनी एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत दृष्टिकोण के कारण इस क्षेत्र में गहराई से निवेश किया गया है, भारत सभी घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है।’’
उन्होंने चीन का स्पष्ट तौर पर संदर्भ देते हुए कहा, ‘‘हम आसियान की केंद्रीयता, एकजुटता और एकता के पुरजोर समर्थक हैं। हम यह भी मानते हैं कि इस क्षेत्र की प्रगति और समृद्धि नियम-आधारित व्यवस्था की कड़ाई से पालन करने से ही संभव है। यूएनसीएलओएस 1982 इस संबंध में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका संविधान समुद्र के लिए है। सभी पक्षों को इसका पूरी तरह से पालन करना चाहिए, अक्षरश: और भावना दोनों संदर्भ में।’’
हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण द्वारा 2016 के खिलाफ में फैसला दिए जाने के बावजूद चीन संसाधन संपन्न दक्षिण चीन सागर के लगभग सभी 13 लाख वर्ग मील पर ‘निर्विवाद संप्रभुता’ का दावा करता है।
बीजिंग में, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘समुद्री विवाद संबंधित देशों के बीच के मुद्दे हैं। तीसरे पक्ष को किसी भी तरह से हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।’’
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने जयशंकर की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘हम संबंधित पक्षों से दक्षिण चीन सागर मुद्दे पर तथ्यों और सच्चाई का दृढ़ता से सामना करने और चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकारों और हितों तथा दक्षिण चीन सागर को शांतिपूर्ण और स्थिर रखने के क्षेत्र के देशों के प्रयासों का सम्मान करने का आग्रह करते हैं।’’
विदेश मामलों के सचिव मनालो ने कहा कि फिलीपींन और भारत समुद्री सहयोग में तेजी लाने और जल्द ही एक उद्घाटन वार्ता आयोजित करने पर सहमत हुए हैं, जिसमें समुद्री पर्यावरण संरक्षण से लेकर सुरक्षा तक में संभावित साझेदारी पर चर्चा होगी।
ट्रैक 1 या सरकार-से-सरकार स्तर पर समुद्री वार्ता की औपचारिक घोषणा जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद मनालो ने की।
फिलीपीन समाचार एजेंसी ने मनालो के हवाले से कहा, ‘‘हमारा सहयोग इस अर्थ में बढ़ रहा है कि हम न केवल प्रशिक्षण और संयुक्त समिति की बैठकों जैसी नई गतिविधियों को आगे बढ़ा रहे हैं, बल्कि अन्य तरीकों की भी खोज कर रहे हैं जहां हम अपने दोनों देशों की सुरक्षा में योगदान दे सकते हैं और यह भी सुनिश्चित कर सकते हैं कि भारत- प्रशांत क्षेत्र खुला और शांतिपूर्ण बना रहे और यह शांति और विकास का क्षेत्र रहे।’’
अभी तक कोई विशिष्ट समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन मनालो ने कहा कि उद्घाटन संवाद मनीला में होगा।
जयशंकर दूसरी बार मनीला के दौरे पर हैं। उन्होंने पहली बार फरवरी 2022 में फिलीपीन का दौरा किया था। अपनी वर्तमान यात्रा के दौरान, उन्होंने राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर मार्कोस जूनियर से भी मुलाकात की।
विदेशमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘फिलीपींन के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर मार्कोस जूनियर से मुलाकात करके सम्मानित महसूस कर रहा हूं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की व्यक्तिगत शुभकामनाएं दीं। भारत-फिलीपीन साझेदारी के प्रति उनकी गर्मजोशी भरी भावनाओं को महत्व देता हूं। इसे नए क्षेत्रों में ले जाने के लिए उनका मार्गदर्शन हमारे दोनों लोकतंत्रों के बीच सहयोग को मजबूत करेगा।’’
उन्होंने फिलीपीन के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एडुआर्डो एनो और रक्षा सचिव गिल्बर्ट टेओडोरो से भी मुलाकात की।
जयशंकर ने टेओडोरो के साथ अपनी बैठक के बारे में पोस्ट किया, ‘‘हमारी रक्षा साझेदारी को मजबूत करने पर चर्चा हुई, जो हमारे साझा हितों और हिंद-प्रशांत में कई अभिसरणों को दर्शाती है। क्षमताओं को बढ़ाने, आदान-प्रदान को तेज करने और निकट संपर्कों को बढ़ाने के लिए तत्पर हैं।’’
इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में मनालो से मुलाकात के बारे में कहा, ‘‘फिलीपीन के मंत्री मनालो के साथ सार्थक मुलाकात हुई। राजनीति, रक्षा, सुरक्षा व समुद्री सहयोग, व्यापार व निवेश, बुनियादी ढांचा, विकास सहयोग, शिक्षा, डिजिटल, प्रौद्योगिकी, संस्कृति तथा दूतावास संबंधी क्षेत्रों में संबंध मजबूत बनाने पर व्यापक चर्चा हुई।’’
उन्होंने हिंद-प्रशांत, दक्षिणपूर्व एशियाई देशों के संघ (आसियान), पश्चिम एशिया, यूक्रेन, गुट निरपेक्ष आंदोलन तथा संयुक्त राष्ट्र समेत वैश्विक, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर विचार साझा किए।
जयशंकर कहा, ‘‘चूंकि दोनों लोकतंत्र नियम आधारित व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं, लिहाजा हमारा सहयोग गहरा बनाने के लिए उत्साहित हूं।’’
मनालो के साथ एक संवाददाता सम्मेलन में जयशंकर ने कहा ‘‘मैं इस अवसर पर दृढ़ता के साथ दोहराना चाहता हूं कि भारत राष्ट्रीय संप्रभुत्ता को बनाए रखने में फिलीपीन का समर्थन करता है।’’
उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया के साथ यह आवश्यक है कि भारत और फिलीपीन उभरते विश्व को आकार देने में अधिक निकटता से सहयोग करें।
विदेश मंत्री ने एक सवाल पर कहा कि प्रत्येक देश को अपनी राष्ट्रीय संप्रभुत्ता को बनाए रखने का अधिकार है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने इस पर भी चर्चा की है।’’
जयशंकर ने कहा कि हाल में भारत और फिलीपीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों में बहुत उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
दक्षिण चीन सागर में घटनाक्रम के बीच फिलीपीन के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने की भारत की योजनाओं पर एक सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा, ‘‘आपको उस सहयोग को उसकी खूबियों के आधार पर देखने की जरूरत है। यह जरूरी नहीं है कि इसका संबंध किसी खास स्थिति से है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन आज यह स्वाभाविक है कि जब दो देशों के बीच यह विश्वास तेजी से बढ़ रहा है, लिहाजा हम सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों की संभावनाओं को तलाश करेंगे। और निश्चित तौर पर रक्षा तथा सुरक्षा उनमें से एक है।’’
गौरतलब है कि चीन ज्यादातर दक्षिण चीन सागर पर अपना दावा जताता है जबकि फिलीपीन, वियतनाम, मलेशिया, ब्रूनेई और ताइवान भी उस पर अपने दावे जताते हैं।
मनालो ने कहा कि जब समुद्री क्षेत्र की बात आती है तो फिलीपीन ने लगातार अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय नियमों व विनियमों का पालन करने की आवश्यकता की पुष्टि की है।
दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की हालिया गतिविधियों के बारे में उन्होंने चीन पर फिलीपीन के जहाजों को उसके सैनिकों तक सामान की आपूर्ति करने से रोकने का आरोप लगाया।
मनालो ने कहा, ‘‘भारत और फिलीपीन की मुक्त, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत सुनिश्चित करने में गहरी रूचि है। और इस संदर्भ में, हम रक्षा व सुरक्षा सहयोग पर नियमित रूप से व्यापक बातचीत कर रहे हैं।’’
जयशंकर ने कहा कि प्रत्येक देश का समुद्री सुरक्षा में हित है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे मामले में संभवत: यह कई अन्य देशों से कहीं अधिक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘बैठकें तथा यात्राएं हमारे दोनों देशों के बीच बढ़ती निकटता का एक संकेतक है। लेकिन यह व्यापार और निवेश तथा स्वास्थ्य व खाद्य सुरक्षा से लेकर शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, रक्षा तथा समुद्री सहयोग तक कई क्षेत्रों में समान रूप से दिखायी देता है।’’
जयशंकर ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार पिछले साल के तीन अरब डॉलर के स्तर के पार चला गया है और उन्होंने विश्वास जताया कि यह बढ़ता रहेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मंत्री मनालो के साथ हुई चर्चा में मेरा संदेश यही था कि हर साल करीब सात फीसदी की दर से वृद्धि कर रही पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था फिलीपीन के साथ अपनी भागीदारी बढ़ाने की तैयारी कर रही है।’’
जयशंकर ने कहा कि उन्होंने और उनके समकक्ष ने ‘‘यह देखते हुए समुद्री सुरक्षा में हमारे साझा हितों पर चर्चा की कि हमारे दोनों देशों ने वैश्विक जहाजरानी उद्योग में कितना योगदान दिया है।’’
उन्होंने लाल सागर तथा अरब सागर में मौजूदा खतरों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना की तैनाती के बारे में भी मनालो को जानकारी दी।
जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ने पर उन्हें विश्वास है कि और भी बहुत कुछ उनका इंतजार कर रहा है।
भाषा धीरज