बहुपक्षीय कार्यक्रम के लिए इस्लामाबाद जा रहा हूं, भारत-पाक संबंधों पर चर्चा करने नहीं: जयशंकर
प्रशांत दिलीप
- 05 Oct 2024, 10:40 PM
- Updated: 10:40 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर (भाषा) विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए इस महीने इस्लामाबाद की यात्रा के दौरान अपने पाकिस्तानी समकक्ष मुहम्मद इशाक डार के साथ किसी भी द्विपक्षीय वार्ता की संभावना को शनिवार को खारिज कर दिया।
भारत ने शुक्रवार को घोषणा की कि जयशंकर इस्लामाबाद में एससीओ शासनाध्यक्ष शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
उन्होंने एक संवाद सत्र में कहा, “मुझे उम्मीद है कि रिश्ते की प्रकृति को देखते हुए मीडिया की इसमें काफी रुचि होगी।”
उन्होंने कहा, “मैं कहना चाहूंगा कि यह एक बहुपक्षीय कार्यक्रम के लिए है, मैं वहां भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने नहीं जा रहा हूं, मैं वहां एससीओ के एक अच्छे सदस्य के तौर पर जा रहा हूं।”
जयशंकर की यह टिप्पणी इस सवाल के बाद आई कि क्या वह इस्लामाबाद में अपने पाकिस्तानी समकक्ष के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
कार्यक्रम में अपने संबोधन में विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी पड़ोसी की तरह भारत निश्चित रूप से पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखना चाहेगा, लेकिन सीमापार आतंकवाद को नजरअंदाज करके ऐसा नहीं हो सकता।
लगभग नौ वर्षों में यह पहला मौका है, जब भारत के विदेश मंत्री पाकिस्तान जायेंगे। कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान से सीमापार आतंकवाद को लेकर दोनों पड़ोसियों के बीच रिश्तों पर बर्फ जमी है।
पाकिस्तान 15 और 16 अक्टूबर को एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद (सीएचजी) की बैठक की मेजबानी कर रहा है।
पाकिस्तान का दौरा करने वाली आखिरी भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज थीं। वह दिसंबर 2015 में अफगानिस्तान पर एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद गई थीं।
जयशंकर ने कहा, “हां, मैं इस महीने के मध्य में पाकिस्तान जाने वाला हूं, और वह एससीओ शासनाध्यक्षों की बैठक के लिए है। आम तौर पर, प्रधानमंत्री राष्ट्राध्यक्षों की उच्च स्तरीय बैठकों में जाते हैं, और मंत्रियों में से एक सरकार प्रमुखों की बैठक के लिए जाता है।”
उन्होंने कहा कि यह परंपरा के अनुरूप है।
अगस्त में पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एससीओ शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया था।
जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे नयी दिल्ली की ओर से एक बड़े फैसले के रूप में देखा जा रहा है।
शासन विषय पर सरदार पटेल स्मृति व्याख्यान में जयशंकर ने कहा, “किसी भी पड़ोसी की तरह भारत निश्चित रूप से पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखना चाहेगा।”
उन्होंने कहा, “लेकिन सीमापार आतंकवाद को नजरअंदाज करके और केवल इच्छा होने से ऐसा नहीं हो सकता। जैसा कि सरदार ने दिखाया, यथार्थवाद ही नीति का आधार होना चाहिए।”
वरिष्ठ मंत्री को भेजने के निर्णय को एससीओ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है।
पाकिस्तान के तत्कालीन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी मई 2023 में गोवा में एससीओ देशों के विदेश मंत्रियों की व्यक्तिगत बैठक में भाग लेने के लिए भारत आए थे।
यह लगभग 12 वर्षों में किसी पाकिस्तानी विदेश मंत्री की पहली भारत यात्रा थी।
अपने संबोधन में जयशंकर ने पाकिस्तान के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों पर भी चर्चा की।
उन्होंने कहा, “आज हम यह अनुमान लगाने के लिए प्रेरित हो सकते हैं कि सरदार पटेल का अपने निधन के बाद के दशक में सामने आए पाकिस्तान संबंधी मुद्दों पर क्या दृष्टिकोण रहा होगा।”
एससीओ की स्थापना 2001 में शंघाई में रूस, चीन, किर्गिज़ गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपतियों द्वारा एक शिखर सम्मेलन में की गई थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके स्थायी सदस्य बने।
जुलाई 2023 में भारत द्वारा आयोजित डिजिटल शिखर सम्मेलन में ईरान एससीओ का नया स्थायी सदस्य बन गया।
अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा, “आज विश्व पुनः एक व्यापक मंथन के दौर से गुजर रहा है, तथा पटेल के समय में जो विश्व व्यवस्था उभरी थी, वह अब अपना दौर पूरा कर चुकी है।”
उन्होंने रेखांकित किया, “हम बहुध्रुवीयता के उदय तथा विश्व में प्राकृतिक विविधता की वापसी देख रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि “इस युग में कोई प्रारूप या कोई पाठ्य पुस्तक हमारा मार्गदर्शन नहीं कर सकती।”
जयशंकर ने कहा, “हमें आत्मविश्वास, यथार्थवाद, तैयारी, राष्ट्रवाद, सरदार पटेल के उन गुणों का सही संयोजन चाहिए, जिनके बारे में मैंने बात की थी। हमें उन्हें विकसित भारत के लिए तैयार करने की आवश्यकता है। सरदार पटेल हमेशा उस प्रयास के लिए प्रेरणास्रोत रहेंगे।”
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