जनता की सच्ची आवाज बन गए हैं राहुल : कांग्रेस
हक हक दिलीप
- 04 Oct 2024, 06:55 PM
- Updated: 06:55 PM
नयी दिल्ली, चार अक्टूबर (भाषा) कांग्रेस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी के 100 दिन के कामकाज का उल्लेख करते हुए शुक्रवार को कहा कि वह जनता की सच्ची आवाज बन गए हैं तथा वंचितों एवं पीड़ितों के साथ खड़े हुए हैं।
राहुल गांधी इस साल लोकसभा चुनाव के बाद नेता प्रतिपक्ष बने।
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले 100 दिनों में राहुल गांधी जी बेजुबानों की आवाज़ बन गए हैं। मणिपुर में हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए आवाज़ उठाने से लेकर अन्यायपूर्ण सरकारी नीतियों का विरोध करने तक, वे लगातार वंचितों और उत्पीड़ितों के लिए खड़े हुए हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वह (राहुल गांधी) मणिपुर में हिंसा के खिलाफ़ खड़े हुए, राज्य का दौरा किया, प्रतिनिधियों से बातचीत की और संसद में इस मुद्दे को उठाया। राहुल गांधी ने सरकारी नौकरी में लेटरल एंट्री का विरोध किया, जिससे सरकार को इस कदम को वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने निष्पक्ष भर्ती प्रक्रियाओं का बचाव किया।’’
खेड़ा के अनुसार, राहुल गांधी ने नीट पेपर लीक का विरोध करके और प्रवेश परीक्षाओं में जवाबदेही की मांग करके सरकारी परीक्षाओं में गड़बड़ी को चुनौती दी। राहुल गांधी ने लोको पायलटों की कार्य स्थितियों का मुद्दा उठाया, ट्रेन सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव को उजागर किया। मीडिया का ध्यान इस पर गया, जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि इस मुद्दे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने बजट में ‘इंडेक्सेशन’ लाभ और पूंजीगत लाभ कर को प्रभावित करने वाले खंड का विरोध किया, जिससे सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पर मजबूर होना पड़ा।
उनके मुताबिक, राहुल गांधी ने ‘अग्निपथ’ योजना के खिलाफ एक साहसिक कदम उठाया और सेना में निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की पैरवी की।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘राहुल गांधी ने जाति जनगणना की मांग को लेकर अपना पक्ष रखा, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन के कई दलों को भी इस मांग के पक्ष में खड़ा होना पड़ा। वह स्वतंत्र मीडिया की आवाज को दबाने के उद्देश्य से बनाए गए प्रसारण विधेयक के खिलाफ मजबूती से खड़े रहे। राहुल के नेतृत्व की बदौलत, इस विधेयक को रद्द कर दिया गया।’’
खेड़ा ने कहा कि राहुल गांधी ने भारत के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का बचाव किया और सरकार को वक्फ संशोधन विधेयक को समीक्षा के लिए संसदीय समिति के पास भेजना पड़ा।
उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 100 दिनों में राहुल गांधी ने पूरे देश की यात्रा की है, किसानों, मजदूरों, लोको पायलटों और मैला ढोने वालों की शिकायतों को सुना है। उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि उनकी आवाज सुनी जाए और उनके मुद्दों को संसद में सबसे आगे लाया जाए। वह जनता की सच्ची आवाज बन गए हैं।’’
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