पंजाब: किसानों का दो घंटे का ‘रेल रोको’ आंदोलन, ट्रेन सेवा प्रभावित
जितेंद्र संतोष
- 03 Oct 2024, 08:59 PM
- Updated: 08:59 PM
होशियारपुर/लुधियाना, तीन अक्टूबर (भाषा) लखीमपुर खीरी कांड (2021) के पीड़ितों को न्याय दिलाने समेत विभिन्न मांगों के समर्थन में बृहस्पतिवार को किसानों ने दो घंटे के ‘रेल रोको’ विरोध प्रदर्शन के तहत रेल की पटरियों पर धरना दिया, जिससे पूरे पंजाब में कई ट्रेन की आवाजाही प्रभावित हुई।
संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा की ओर से आयोजित यह विरोध प्रदर्शन राज्य में 33 स्थानों पर मध्याह्न साढ़े 12 बजे शुरू हुआ।
यह लखीमपुर खीरी में 2021 में तीन कृषि कानूनों (अब निरस्त किए जा चुके) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत की घटना की तीसरी बरसी है।
फिरोजपुर मंडल के रेलवे अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन के कारण 17 ट्रेन रोकी गईं लेकिन किसी भी ट्रेन को रद्द या फिर किसी भी ट्रेन का मार्ग परिवर्तित नहीं किया गया।
अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन केवल उन्हीं स्टेशनों पर रोकी गईं, जहां यात्रियों को आसानी से भोजन और अन्य सुविधाएं मिल सकती थीं।
जिन ट्रेन को रोका गया उनमें लुधियाना-फिरोजपुर कैंट एक्सप्रेस, फिरोजपुर कैंट-लुधियाना एक्सप्रेस, सूर्य नगरी एक्सप्रेस, दुर्ग-जम्मू तवी स्पेशल, अमृतसर-जयनगर शहीद एक्सप्रेस, अमृतसर-अजमेर एक्सप्रेस, पुणे-जम्मू तवी झेलम एक्सप्रेस, जामनगर-माता वैष्णो देवी कटरा एक्सप्रेस और जम्मू तवी-अहमदाबाद एक्सप्रेस शामिल हैं।
प्रदर्शनकारी किसानों ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी, ऋण माफी, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने और लखीमपुर खीरी की घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को दंडित करने की मांग की।
अमृतसर में मनावाला रेलवे स्टेशन के पास किसानों के अमृतसर-दिल्ली रेल की पटरियों पर बैठ जाने से दोनों शहरों के बीच चलने वाली कई ट्रेन का मार्ग बदलना पड़ा।
किसान मजदूर मोर्चा (केएमएम) के संयोजक सरवन सिंह पंधेर ने लखीमपुर खीरी की घटना में न्याय की मांग की तथा राज्य एवं केंद्र, दोनों सरकारों पर किसानों की लंबे समय से लंबित मांगों पर ध्यान न देने तथा उनके प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया।
केंद्र सरकार द्वारा फसलों पर एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी देने समेत विभिन्न मांग पूरी करने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से एसकेएम और केएमएम किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारी किसान 13 फरवरी को सुरक्षा बलों द्वारा उनके मार्च को रोके जाने के बाद से पंजाब और हरियाणा के बीच शंभू तथा खनौरी सीमा पर डटे हुए हैं।
होशियारपुर में भारतीय किसान यूनियन (दोआबा) के राज्य उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं द्वारा मंडियाला गांव में रेलवे क्रासिंग के पास पटरियों पर धरना दिए जाने से होशियारपुर से जालंधर जाने वाली एक यात्री ट्रेन को नसराला रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया।
किसान मजदूर हितकारी सभा के सदस्यों ने जालंधर जिले के भंगाला में अनाज मंडी से रेलवे स्टेशन तक मार्च किया और जालंधर-जम्मू रेल खंड पर धरना देने से पठानकोट जाने वाली एक मालगाड़ी को मुकेरियां रेलवे स्टेशन पर रुकना पड़ा।
जिलाध्यक्ष परमजीत सिंह भुल्ला के नेतृत्व में किसान मजदूर संघर्ष समिति के सदस्यों ने टांडा रेलवे स्टेशन पर रेल पटरी पर धरना दिया, जबकि गन्ना संघर्ष समिति के सदस्यों ने दसूहा रेलवे स्टेशन के ‘प्लेटफार्म’ पर धरना दिया। लुधियाना में किसानों ने साहनेवाल और फिल्लौर रेलवे स्टेशनों पर रेल पटरियों पर धरना दिया।
भाषा जितेंद्र