बदलापुर मामला: अदालत ने आरोपी की हिरासत में मौत पर जांच रिपोर्ट 18 नवंबर तक सौंपने को कहा
नोमान नरेश
- 03 Oct 2024, 03:27 PM
- Updated: 03:27 PM
मुंबई, तीन अक्टूबर (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मजिस्ट्रेट को बदलापुर स्कूल यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी अक्षय शिंदे की हिरासत में मौत के मामले पर जांच रिपोर्ट 18 नवंबर तक पेश करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की खंडपीठ ने यह निर्देश दिया। पीठ ने यह भी आदेश दिया कि मामले से संबंधित सभी साक्ष्य एकत्रित किए जाएं, संरक्षित किए जाएं और फोरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा उनकी जांच की जाए।
पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि पुलिस इस घटना की जांच में मजबूत फोरेंसिक साक्ष्य भी शामिल करे, जिसमें आरोपी पुलिस की गोलीबारी में मारा गया था।
कानून में यह अनिवार्य किया गया है कि हिरासत में हुई प्रत्येक मौत के मामले की जांच मजिस्ट्रेट द्वारा की जाए।
महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने कहा कि सभी प्रासंगिक दस्तावेज जांच के लिए मजिस्ट्रेट को भेज दिए गए हैं।
उच्च न्यायालय ने कहा,“ रिपोर्ट 18 नवंबर को हमारे समक्ष रखी जाए।”
अदालत आरोपी के पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें आरोपी शिंदे की मौत के मामले की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की गई है।
राज्य अपराध जांच विभाग (सीआईडी) मामले की जांच कर रहा है।
शिंदे (24) पर ठाणे जिले के बदलापुर के एक स्कूल में दो बच्चियों का उत्पीड़न करने का आरोप था। 23 सितंबर को जब उसे नवी मुंबई की तलोजा जेल से बदलापुर वापस लाया जा रहा था, तभी गोलीबारी की घटना में उसकी मौत हो गई। यह घटना ठाणे में मुंब्रा बाईपास के पास हुई।
उसे पुलिस के एक वाहन से ले जाया जा रहा था तभी उसने एक पुलिसकर्मी की पिस्तौल कथित तौर पर छीन ली। उसे उसकी अलग रह रही पत्नी की शिकायत पर दर्ज मामले की जांच के लिए पुलिस वाहन में ले जाया जा रहा था।
उच्च न्यायालय की पीठ ने सीआईडी की जांच पर सवाल उठाए और आग्रह किया कि सभी साक्ष्य एकत्रित किए जाएं, संरक्षित किए जाएं तथा फोरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा उनकी जांच की जाए।
पीठ ने पूछा कि क्या पुलिस ने शव से फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किये हैं।
अदालत ने कहा कि प्रत्येक आग्नेयास्त्र का एक विशिष्ट पैटर्न होता है तथा उसके द्वारा छोड़ा गया अवशेष भी अलग होता है।
पीठ ने कहा कि शिंदे के सिर से और हाथों से गोली लगने और चलाने के दौरान निकले उसके अवशोषों को एकत्रित कर उन्हें संरक्षित किया जाना चाहिए तथा फोरेंसिक रूप से उनका विश्लेषण किया जाना चाहिए। उसके सिर पर गोली मारी गई थी जब उसने कथित रूप से गोली चलाई थी।
अदालत ने कहा, “शव सबसे मूक और ईमानदार गवाह होता है।” उन्होंने सभी साक्ष्यों को एकत्र करने और संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
पीठ ने कहा कि घटना में दो अलग-अलग बंदूकों से गोलियां चलाई गईं।
अदालत ने कहा, “जो खोखे मिले हैं, वे दो अलग-अलग हथियारों के थे। हर बंदूक का ‘फायरिंग पिन’ अलग-अलग होता है। यह इस बात का निर्णायक सबूत हो सकता है कि किस हथियार में कौन-सा ‘फायरिंग पिन’ होगा।
उच्च न्यायालय ने कहा, “हम एक ऐसी रिपोर्ट देखना चाहते हैं जो इसे निर्णायक रूप से दर्शाए।”
अदालत ने यह भी पूछा कि क्या उसे वह गोली मिल गई है जो आरोपी के आरपार हो गई थी ?
पीठ ने पूछा, “गोली कितनी दूर तक गई? वह एक सुनसान इलाका था। क्या आपको वह नहीं मिली?”
सराफ ने कहा कि सीआईडी इसे देखेगी।
अदालत ने इस बात पर अपनी नाराजगी व्यक्त की कि पुलिस ने उस पानी की बोतल को जब्त नहीं किया है जो आरोपी को वाहन में पानी मांगने पर दी गई थी।
पुलिस का कहना था कि आरोपी ने जब पानी मांगा तो उसकी हथकड़ी खोल दी गई, जिसके बाद उसने एक पुलिस अधिकारी की पिस्तौल छीन ली और गोली चला दी।
अदालत ने कहा कि पुलिस अपराध स्थल से साक्ष्य जुटाने में विफल रही है।
अदालत ने शिंदे द्वारा की गई गोलीबारी में घायल हुए पुलिस अधिकारी की मेडिकल रिपोर्ट भी मांगी है।
अदालत ने पूछा, “जिस पुलिस अधिकारी को गोली लगी थी...क्या उसकी उचित तरीके से जांच की गई है? ...क्या घायल हुए पुलिस अधिकारी की जांघ पर (गोली का) कोई प्रवेश और निकास घाव था?”
पीठ ने कहा “हमें उसका चोट प्रमाण पत्र देखने की जरूरत है। गोली लगने के घाव पर (गोली का) कुछ अवशेष भी होना चाहिए, ताकि पता चल सके कि उसे किस बंदूक की गोली लगी।”
भाषा
नोमान