केंद्र को लद्दाख के प्रदर्शनकारी समूहों से बातचीत करनी चाहिए : सांसद मोहम्मद हनीफा
धीरज नरेश
- 29 Sep 2024, 07:53 PM
- Updated: 07:53 PM
(अंजलि ओझा)
नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) लद्दाख से लोकसभा सदस्य मोहमद हनीफा ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश के संविधान की छठी अनुसूची से संबंधित मुद्दे समेत विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे समूहों से केंद्र को बातचीत बहाल करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के नेतृत्व में एक मार्च सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचने वाला है।
लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) द्वारा आहूत मार्च एक सितंबर को वांगचुक के नेतृत्व में लेह से शुरू हुआ और सोमवार शाम को दिल्ली के सिंघू बॉर्डर पर पहुंचेगा। करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (केडीए) के सदस्य भी समूह में शामिल होंगे।
समूहों ने घोषणा की है कि दो अक्टूबर को गांधी जयंती पर वे दिल्ली के राजघाट तक मार्च करेंगे जबकि तीन अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक सार्वजनिक सभा की योजना बनाई है।
दोनों समूहों ने पिछले चार वर्षों से लद्दाख के लिए राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची के शामिल करने, लद्दाख के लिए लोक सेवा आयोग के साथ शीघ्र भर्ती प्रक्रिया और लेह तथा करगिल जिलों के लिए अलग लोकसभा सीट के समर्थन में संयुक्त रूप से आंदोलन शुरू किया है।
लद्दाख के प्रतिनिधियों और केंद्र सरकार के बीच मार्च में हुई वार्ता बेनतीजा रही थी।
हनीफा ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘पिछले तीन वर्षों से केडीए और एलएबी चार सूत्री मांगें उठा रहे हैं। हम सरकार के साथ बातचीत कर रहे हैं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम शांतिप्रिय लोग हैं। हम समझते हैं कि लद्दाख रणनीतिक रूप से अहम क्षेत्र है। हमने राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली कोई कार्रवाई नहीं की है।’’
हनीफा ने कहा,‘‘एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई, बैठकें भी हुईं, लेकिन वार्ता ठप हो गई। चुनाव के बाद हमें उम्मीद थी कि सरकार फिर से वार्ता शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’’
उन्होंने कहा कि वांगचुक के नेतृत्व में पैदल मार्च उनके चार सूत्री एजेंडे को उठाने के लिए किया जा रहा है।
लद्दाख के सांसद ने कहा, ‘‘मैंने गृह सचिव से मुलाकात की, मैं गृह मंत्री से मुलाकात का समय लेने का प्रयास कर रहा हूं। मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूं कि चुनाव से पहले रुकी हुई बातचीत को फिर से शुरू किया जाए।’’
निर्दलीय सांसद हनीफा ने कहा कि बेरोजगारी की समस्या के समाधान के लिए सरकारी रिक्तियों पर भर्ती प्रमुख मांगों में से एक है, जिसका तत्काल समाधान किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘एजेंडे में भर्ती बोर्ड का मुद्दा भी शामिल है जो इस समय सबसे महत्वपूर्ण है। लद्दाख में बेरोजगारी सबसे ज्वलंत मुद्दा है और इसका समाधान करना महत्वपूर्ण है।’’
लद्दाख के सांसद ने कहा कि वह इस मुद्दे पर गृहमंत्री अमित शाह को भी पत्र लिखेंगे।
लद्दाख में नए जिलों के गठन की हाल की घोषणा के बारे में पूछे जाने पर हनीफा ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक अलग मुद्दा है। भले ही आप दस जिलों की घोषणा कर दें, अगर हम इस व्यवस्था में हैं, तो लद्दाख तो रहेगा लेकिन लद्दाखी खत्म हो जाएंगे। हमारी पहचान नष्ट हो जाएगी।’’
केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने पिछले महीने घोषणा की थी कि लद्दाख में पांच नए जिले जंस्कर, द्रास, शाम, नुब्रा और चांगथांग बनाए जाएंगे।
हनीफा ने कहा, ‘‘हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में हैं, लेकिन लद्दाख के लोग लोकतंत्र से वंचित हैं। लोगों को एहसास हो गया है कि वे इस नौकरशाही प्रणाली में सब कुछ खो देंगे।’’
सांसद ने कहा, ‘‘जब तक हमें चार सूत्री एजेंडे की मांग के अनुसार सुरक्षा उपाय नहीं मिलते, हमारी पहचान और संस्कृति नष्ट हो जाएगी।’’ उन्होंने कहा कि जिलों का गठन करने के मामले में करगिल के अधिक आबादी वाले क्षेत्रों को नजरअंदाज किया गया है।
छठी अनुसूची में स्वायत्त जिला परिषदों (एडीसी) के माध्यम से असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित प्रावधान हैं।
भाषा धीरज