प्रकाश करात माकपा पोलित ब्यूरो, केंद्रीय समिति के अंतरिम समन्वयक होंगे
आशीष सुरेश
- 29 Sep 2024, 08:08 PM
- Updated: 08:08 PM
नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के वरिष्ठ नेता प्रकाश करात अगले साल अप्रैल में पार्टी का 24वां सम्मेलन होने तक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर पार्टी के पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के समन्वयक होंगे। वाम दल ने रविवार को यह जानकारी दी।
यह निर्णय माकपा महासचिव सीताराम येचुरी का 72 साल की उम्र में 12 सितंबर को निधन हो जाने के मद्देनजर लिया गया है।
माकपा ने एक बयान में कहा, ‘‘नयी दिल्ली में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक में फैसला किया गया है कि कॉमरेड प्रकाश करात अप्रैल 2025 में मदुरै में 24वीं ‘पार्टी कांग्रेस’ (सम्मेलन) होने तक अंतरिम व्यवस्था के तौर पर पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के समन्वयक होंगे।’’
पार्टी ने कहा, ‘‘यह निर्णय माकपा के मौजूदा महासचिव कॉमरेड सीताराम येचुरी के दुखद और अचानक निधन के कारण लिया गया है।’’
माकपा के सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल करात (76) वर्ष 2005 से 2015 तक पार्टी के महासचिव रहे।
करात का जन्म सात फरवरी 1948 को वर्तमान म्यांमा के लेतपादान में हुआ था, जहां उनके पिता सी पी नायर बर्मा रेलवे और बाद में बर्मा तेल पाइपलाइन परियोजना में कार्यरत थे।
उन्होंने चेन्नई के मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई की और बाद में राजनीति में मास्टर डिग्री के लिए ब्रिटेन के एडिनबर्ग विश्वविद्यालय चले गए। वह विश्वविद्यालय में छात्र राजनीति में सक्रिय हो गए।
बाद में वह भारत लौट आए और 1970 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में शामिल हुए। उन्होंने माकपा नेता ए. के. गोपालन के सहयोगी के रूप में भी काम किया।
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के संस्थापकों में से एक करात जेएनयू छात्र संघ के तीसरे अध्यक्ष चुने गए। वह 1974 से 1979 के बीच एसएफआई के दूसरे अध्यक्ष भी बने।
वह 1982 से 1985 तक माकपा की दिल्ली प्रदेश समिति के सचिव रहे, 1985 में पार्टी की केंद्रीय समिति के लिए चुने गए और 1992 में इसके पोलित ब्यूरो के सदस्य बने।
दशकों तक पार्टी के प्रमुख चेहरों में से एक रहे करात उस समय माकपा का नेतृत्व कर रहे थे, जब पार्टी ने 2008 में केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया था। इसके बाद के वर्षों में संसद में वाम दलों के सदस्यों की संख्या घटती गई।
वर्ष 2004 में लोकसभा में माकपा के 43 सांसद थे, जो 2014 में घटकर नौ रह गए। विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के घटक के रूप में, वामपंथी पार्टी ने इस साल हुए लोकसभा चुनावों में चार सीट जीतीं।
भाषा आशीष