येचुरी वह ‘गोंद’ थे जिसने ‘इंडिया’ गठबंधन को जोड़े रखा : नेताओं ने शोकसभा में कहा
धीरज माधव
- 28 Sep 2024, 09:20 PM
- Updated: 09:20 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा)के दिवंगत महासचिव सीताराम येचुरी को श्रद्धांजलि देने लिए शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं ने कहा कि वह ‘गोंद’ थे, जिसने ‘इंडिया’ गठबंधन को एक साथ जोड़े रखा। उन्होंने येचुरी के निधन को विपक्ष के लिए क्षति बताया।
माकपा महासचिव येचुरी का 12 सितंबर को फेफड़ों के संक्रमण के कारण निधन हो गया था। उनके निधन पर आयोजित शोक सभा में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव सहित तमाम विपक्षी नेता शामिल हुए।
राहुल गांधी ने येचुरी को एक ऐसे मित्र के रूप में याद किया जो राजनीतिक व्यवस्था में सक्रिय थे। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उन्होंने कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठगंधन एवं संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के अन्य दलों के बीच सेतु की भूमिका निभाई।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने येचुरी को उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही ध्यान से देखा है। उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे एक ऐसा व्यक्ति मिला जो लचीला था, जो सुनता था, जो वैचारिक रूप से विपरीत विचारधारा का होने के बावजूद यह समझने की क्षमता रखता था कि हम कहां से आ रहे हैं और उसने हमें यह भी समझने दिया कि वह कहां से आ रहा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक तरह से वह कांग्रेस पार्टी और भारत सरकार (संप्रग शासन के दौरान)में अन्य दलों के बीच एक सेतु थे। कुछ लोग दिखाई देते हैं और वे सामने होते हैं, आप उन्हें देख सकते हैं, और फिर कुछ ‘गोंद’ होते हैं जो दिखाई नहीं देते, जो छिपे होते हैं, लेकिन वास्तव में वही है जो संरचना को एक साथ रखते हैं।’’
राहुल गांधी ने कहा, ‘‘श्री येचुरी एक ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने निश्चित रूप से ‘इंडिया’ गठबंधन और पिछले संप्रग गठबंधन की संरचना को बनाए रखा। वह सूत्रधार थे जिसने सभी को एक साथ रखा क्योंकि वह लचीले थे, क्योंकि व सुनते थे।’’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने माकपा नेता द्वारा ‘इंडिया’ गठबंधन को आकार देने के लिए सोनिया गांधी के साथ की गई बैठकों को याद किया और विभिन्न दलों को एक साथ लाने का श्रेय उन्हें दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘ विपक्ष के ‘इंडिया’ गठबंधन के गठन में उनकी बड़ी भूमिका थी... कुछ लोगों ने गठबंधन के गठन का श्रेय लेने की कोशिश की, लेकिन जो व्यक्ति श्रेय चाहता था वह भाग गया।’’
खरगे स्पष्ट रूप से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का जिक्र कर रहे थे, जिन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले ‘इंडिया’ गठबंधन को छोड़ दिया था।
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने उस समय को याद किया जब माकपा नेता और तत्कालीन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने 1996 में संयुक्त मोर्चा सरकार में प्रधानमंत्री पद लेने के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।
अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘मुझे इस समूह (वामपंथी) से भी बहुत शिकायतें हैं। जब हम पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु को भारत का प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे तो यह समूह सहमत नहीं हुआ। अगर ज्योति बसु भारत के प्रधानमंत्री बन जाते, तो मुझे लगता है कि भारत आज जैसा नहीं होता।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप वाकई भारत को इन लोगों से बचाना चाहते हैं जो देश को धर्म के आधार पर बांट रहे हैं, तो हमें सोचना होगा कि इनसे कैसे छुटकारा पाया जाए। मैं मुसलमान हूं, क्या मैं घुसपैठिया हूं? क्या मैं पाकिस्तानी हूं? मैं भारत में पैदा हुआ हूं और यहीं मरूंगा।’’
माकपा नेता प्रकाश करात ने धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक ताकतों को एक साथ लाने में येचुरी के योगदान को याद किया और कहा कि उन्होंने ‘इंडिया’ गठबंधन को एक साथ लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता मनोज झा, द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की कनिमोझी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले,झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, आम आदमी पार्टी के गोपाल राय, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी राजा, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी)लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, आरएसपी महासचिव मनोज भट्टाचार्य और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के महासचिव जी देवराजन ने भी शोक सभा को संबोधित किया और लोकतंत्र को मजबूत करने में येचुरी के योगदान को याद किया।
माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने येचुरी के लिए शोक प्रस्ताव पेश किया और भारत में वामपंथी आंदोलन में उनके योगदान को याद किया तथा मार्क्सवाद के प्रति उनकी ‘प्रतिबद्धता’ पर प्रकाश डाला।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने येचुरी को एक ‘‘उत्कृष्ट मार्क्सवादी विचारक के रूप में याद किया, जिन्हें भारतीय इतिहास, समाज, संस्कृति और राजनीति का अच्छा ज्ञान था।’’
कार्यक्रम में अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक, सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और समाचार पत्र ‘द हिंदू’ के पूर्व प्रधान संपादक एन राम ने भी अपनी-अपनी बात रखी।
भाषा धीरज